स्टार प्लस के चर्चित धारावाहिक अनुपमा के मंच पर प्रतिस्पर्धा का माहौल अब पारिवारिक तनाव और व्यक्तिगत रंजिशों में बदल चुका है। जारी गेम शो के दौरान आयोजित पॉलीग्राफ यानी लाई डिटेक्टर परीक्षा ने शाह और कोठारी खानदान के कई दबे हुए राज उजागर कर दिए हैं। इस खास दौर में जहां एक तरफ झूठे दावों के चलते टीमों के अंक कटे, वहीं दूसरी तरफ दिलों में छिपे सच ने प्रतियोगिता का रुख पूरी तरह बदल दिया। एपिसोड की शुरुआत में ही बड़े-बुजुर्ग लीला और हसमुख इस बात को लेकर बेहद चिंतित दिखे कि आयोजक उनके घरेलू मामलों को सार्वजनिक कर रहे हैं। इस बीच पारितोष, पाखी और इशानी भी राही की रणनीति पर चर्चा करते नजर आए।
राही के असत्य ने पहुंचाया टीम को झटका
गेम शो के संचालक ने राही के सामने एक पेचीदा प्रश्न रखा कि यदि प्रेम प्रतियोगिता जीत जाए और उसकी मां अनुपमा पराजित हो जाएं, तो क्या उसे खुशी होगी? अपनी टीम की बढ़त बनाए रखने और खुद का बचाव करने के मकसद से राही ने हां में जवाब दिया। हालांकि, लाई डिटेक्टर तकनीक ने उसके इस बयान को तुरंत असत्य घोषित कर दिया। संचालक ने स्पष्ट टिप्पणी की कि कोई भी संतान अपनी माता की असफलता पर प्रसन्न नहीं हो सकती। यदि राही ने अपने मन का वास्तविक सच स्वीकार किया होता, तो उसकी टीम को अंक मिल जाते। इस गलत कदम के कारण उसकी टीम को महत्वपूर्ण अंकों का नुकसान उठाना पड़ा।
दिग्विजय का भावुक उद्गार और प्रेम का अहंकार
प्रतियोगिता का अगला अध्याय तब बेहद भावुक हो गया जब आयोजकों ने दिग्विजय से अनुपमा के प्रति उनके निरंतर समर्थन पर सवाल दागा। उनसे पूछा गया कि क्या इस सहायता के पीछे उनका कोई निजी लाभ है अथवा वह पुरस्कार राशि में हिस्सेदारी चाहते हैं। दिग्विजय ने बेहद संवेदनशील होकर जवाब दिया कि अनुपमा से भेंट होने से पूर्व उनके जीवन का कोई उद्देश्य नहीं था, लेकिन उन्होंने ही उन्हें नई दिशा प्रदान की है। दिग्विजय ने अनुपमा को अपनी गार्जियन एंजल बताते हुए घोषणा की कि वह अंतिम समय तक उनके साथ खड़े रहेंगे। मशीन ने उनके इस बयान को पूर्णतः सत्य माना और उन्हें पूरे अंक दिए।
दिग्विजय की इस सफलता पर पारितोष और प्रेम भड़क उठे। श्रुति ने इस वक्तव्य को निरर्थक बताया, जबकि पारितोष ने उपकरण की कार्यप्रणाली पर ही उंगली उठा दी। इसके पश्चात जब प्रेम से पूछा गया कि क्या अनुपमा उनसे श्रेष्ठ शेफ हैं और विजेता ट्रॉफी की वास्तविक हकदार हैं, तो प्रेम ने अपने दंभ में कहा कि वह अनुपमा को अपनी प्रतिस्पर्धी मानते ही नहीं हैं और ट्रॉफी पर केवल उनका अधिकार है। मशीन ने उनके इस अहंकारी बयान को असत्य करार दिया, जिससे प्रेम ने भी अपनी टीम का अंक गंवा दिया।
अनुपमा की खेल भावना और आगामी महा-ट्विस्ट
जब अनुपमा से यह सवाल हुआ कि क्या वह राही अथवा प्रेम के प्रति अपने स्नेह के कारण जानबूझकर हार स्वीकार कर लेंगी, तो उन्होंने निष्पक्षता का परिचय दिया। अनुपमा ने कहा कि वह अपनी निष्ठा से कोई समझौता नहीं करेंगी और उनका समर्थन करने वाले सदस्यों के लिए पूरी ईमानदारी से खेलेंगी। उनके इस सच्चे उत्तर ने उन्हें अंक दिलाए। बाद में जब राही से पूछा गया कि क्या प्रेम एक सक्षम कप्तान नहीं हैं, तो राही ने प्रेम के पक्ष में खड़े होकर अपनी टीम के लिए अंक सुरक्षित किया। इस बीच शाह और कोठारी परिवारों में बढ़ती तीखी बहस को अनुपमा ने अपनी सूझबूझ से शांत कराया।
एपिसोड का सबसे बड़ा मोड़ इसके आगामी अंश में देखने को मिला। अनुपमा यह जानकर अचंभित रह जाती हैं कि किसी अनजान व्यक्ति ने उनकी भूमि की प्रारंभिक किस्त का भुगतान कर दिया है। इसके तुरंत बाद वसुंधरा मंच पर खुलासा करती हैं कि यह धन राशि उन्होंने जमा की है। परंतु इसके बदले में वह एक बड़ी शर्त रखते हुए अनुपमा से प्रेम के पक्ष में ट्रॉफी का त्याग करने की मांग करती हैं। वसुंधरा का यह सौदा सुनकर अनुपमा के होश उड़ जाते हैं।



















