श्रीलंका में चल रही ट्राई सीरीज का एक मुकाबला उस वक्त सुर्खियों में आ गया जब इंडिया ए और श्रीलंका ए के बीच कांटे की टक्कर मैदान पर तनातनी में बदल गई. नतीजा रोमांचक रहा, मगर मैच खत्म होते ही माहौल गरमा गया और दोनों टीमों के खिलाड़ी आपस में भिड़ गए.
मैदान पर कैसे शुरू हुआ बवाल
विवाद की चिंगारी जश्न के बीच भड़की. श्रीलंकाई खिलाड़ियों ने जीत का जश्न मनाते हुए सूर्यांश शेडगे से कुछ बातें कह दीं, जो उन्हें नागवार गुजरीं और वह गुस्से में आ गए. देखते ही देखते इस झड़प में वैभव सूर्यवंशी भी कूद पड़े और उन्होंने विशेन हलंबगे को धक्का दे दिया. मैदान पर तकरार बढ़ती देख श्रीलंका के अनुभवी और 79 साल के पूर्व क्रिकेटर अनुरा टेनेकून ने मोर्चा संभाला और महज 15 साल के वैभव को ऐसे झमेलों से दूर रहने की समझाइश दी.
पूर्व कप्तान खुद वैभव से मिलने पहुंचे
इस पूरे घटनाक्रम के बाद टेनेकून खुद चलकर वैभव सूर्यवंशी से मिलना चाहते थे. TrendKia से बातचीत में उन्होंने युवा बल्लेबाज को समझाते हुए कहा, “तुम अपने खेल पर ध्यान दो और बाहर की बातों को नजरअंदाज करो. आज दुर्भाग्य से तुम अच्छा नहीं कर पाए, लेकिन ये खेल का हिस्सा है, हर दिन अच्छा नहीं हो सकता.” एक अनुभवी खिलाड़ी की यह सीख उस उम्र के क्रिकेटर के लिए बेहद अहम मानी जा रही है, जिसके सामने अभी लंबा करियर पड़ा है.
क्यों है वैभव सूर्यवंशी पर सबकी नजर
जैसे ही वैभव सूर्यवंशी को श्रीलंका में होने वाली ट्राई सीरीज के लिए इंडिया ए टीम में जगह मिली, क्रिकेट प्रेमी उन्हें भारत की जर्सी में खेलते देखने के लिए बेताब हो उठे. उनके चयन ने क्रिकेट जगत में हलचल मचा दी और इसी वजह से इस सीरीज का सीधा प्रसारण तक किया गया. हाल यह है कि वैभव जहां भी कदम रखते हैं, हर किसी की निगाहें उन्हीं पर टिक जाती हैं. इंडियन प्रीमियर लीग 2026 में रिकॉर्ड तोड़ प्रदर्शन के बाद से तो दुनिया भर के क्रिकेट जानकार उनकी चर्चा कर रहे हैं.
कौन हैं अनुरा टेनेकून
जिन्होंने वैभव को यह नसीहत दी, वे टेनेकून श्रीलंका के शुरुआती दौर के सबसे बेहतरीन बल्लेबाजों में गिने जाते हैं. जिस समय श्रीलंका को टेस्ट का दर्जा तक नहीं मिला था, तब उन्होंने 1975 और 1979 के वनडे वर्ल्ड कप में टीम की कप्तानी संभाली थी. इन टूर्नामेंट के चार मैचों में उन्होंने 137 रन बनाए, जिसमें न्यूजीलैंड के खिलाफ जड़ा गया एक अर्धशतक भी शामिल है. फर्स्ट क्लास क्रिकेट में उनका रिकॉर्ड और मजबूत रहा. उन्होंने 61 फर्स्ट क्लास मैच खेले और 3,481 रन जुटाए, जिसमें पांच शतक और 19 अर्धशतक उनके नाम दर्ज हैं. क्रिकेट से जुड़ाव यहीं नहीं रुका, 2000 के दशक की शुरुआत में वे श्रीलंका क्रिकेट बोर्ड (एसएलसी) के मुख्य कार्यकारी की जिम्मेदारी भी निभा चुके हैं.













