बेल्जियम और नीदरलैंड की संयुक्त मेजबानी में 15 अगस्त से 30 अगस्त तक आयोजित होने वाले FIH हॉकी विश्व कप 2026 के लिए भारतीय दल की नई जर्सी का अनावरण कर दिया गया है। हॉकी इंडिया द्वारा पुरुष और महिला दोनों टीमों के लिए लॉन्च की गई इस नई किट का रंग केसरिया यानी ऑरेंज रखा गया है। हालांकि, पारंपरिक नीले रंग की जगह ऑरेंज जर्सी सामने आते ही खेल जगत में चर्चाएं और बहस शुरू हो गई। पूर्व भारतीय हॉकी कप्तान वीरेन रासक्विन्हा ने इस बदलाव पर असंतोष व्यक्त करते हुए सवाल उठाया कि आखिर दशकों से भारतीय हॉकी की मुख्य पहचान रहे नीले रंग को बदलने की क्या आवश्यकता पड़ी। इस बढ़ते विवाद के बीच हॉकी इंडिया के अध्यक्ष दिलीप टिर्की ने जर्सी का रंग बदलने के पीछे के वैज्ञानिक और व्यावहारिक कारणों का विस्तार से खुलासा किया है।
ब्लू टर्फ पर विजिबिलिटी और खिलाड़ियों की पहचान बनी मुख्य वजह
जर्सी का रंग बदलने पर उठ रहे सवालों का जवाब देते हुए हॉकी इंडिया के अध्यक्ष दिलीप टिर्की ने स्पष्ट किया कि यह फैसला अचानक या बिना किसी कारण के नहीं लिया गया है। उन्होंने बताया कि आगामी अंतरराष्ट्रीय मुकाबलों में मैदान का टर्फ नीले रंग का होता है। जब खिलाड़ी भी नीले रंग की पोशाक पहनकर खेलते हैं तो नीली पृष्ठभूमि में सहकर्मियों को तुरंत पहचानने में समस्या आती है। दिलीप टिर्की ने बताया, "मैदान का टर्फ और प्लेइंग किट दोनों नीले होने की वजह से खिलाड़ियों को एक-दूसरे को पहचानने और विजिबिलिटी में दिक्कत हो रही थी।" इसी वजह से सपोर्ट स्टाफ और खिलाड़ियों की तरफ से किट के रंग में बदलाव का प्रस्ताव आया था।
दिलीप टिर्की के अनुसार किट का रंग बदलने के लिए दो मुख्य विकल्पों पर विचार किया गया था, जिनमें पहला विकल्प पीला और दूसरा विकल्प ऑरेंज था। विस्तृत चर्चा के बाद ऑरेंज रंग को अंतिम रूप से चुना गया क्योंकि यह भारत के राष्ट्रीय ध्वज के तीन प्रमुख रंगों में से एक है। उन्होंने यह भी भरोसा दिलाया कि यदि विश्व कप समाप्त होने के बाद खिलाड़ियों को यह नया रंग पसंद नहीं आता है या वे इसमें सहज महसूस नहीं करते हैं, तो संगठन इस बात की समीक्षा करेगा कि इसे भविष्य में और बेहतर कैसे बनाया जा सकता है।
भारतीय हॉकी इतिहास में पहले भी हो चुके हैं जर्सी के रंग में बदलाव
दिलीप टिर्की ने इस बात पर जोर दिया कि भारतीय राष्ट्रीय टीम के लिए पोशाक का रंग बदला जाना कोई पहली घटना नहीं है। इससे पहले भी कई महत्वपूर्ण अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में भारतीय टीम अलग-अलग रंगों की किट पहनकर मैदान में उतर चुकी है। उदाहरण के लिए, साल 2014 के FIH हॉकी विश्व कप के दौरान भारतीय दल ने पीले रंग की जर्सी पहनी थी। इसके बाद साल 2018 के FIH हॉकी विश्व कप में टीम के लिए स्काई ब्लू यानी हल्के नीले रंग की पोशाक तैयार की गई थी। इस प्रकार, समय-समय पर मैदान की परिस्थितियों और विजिबिलिटी को ध्यान में रखते हुए किट के शेड और रंग में परिवर्तन किए जाते रहे हैं।
19 अगस्त को वेल्स के खिलाफ मुकाबले से अभियान की शुरुआत
FIH हॉकी विश्व कप 2026 का बिगुल 15 अगस्त को बजेगा और यह प्रतिष्ठित प्रतियोगिता 30 अगस्त तक बेल्जियम तथा नीदरलैंड के विभिन्न मैदानों पर खेली जाएगी। भारतीय हॉकी टीम इस टूर्नामेंट में अपने सफर की शुरुआत 19 अगस्त को वेल्स की टीम के खिलाफ होने वाले मुकाबले से करेगी। हॉकी इंडिया ने इस मेगा इवेंट के लिए अपनी तैयारियों को अंतिम रूप दे दिया है और नए केसरिया कलेवर में उतरी भारतीय टीम से प्रशंसकों को उत्कृष्ट प्रदर्शन की उम्मीदें हैं। संगठन का मानना है कि नई किट से मैदान पर खिलाड़ियों के बीच तालमेल और विजिबिलिटी में सुधार होगा जिससे टीम को अपनी रणनीति को बेहतर ढंग से लागू करने में मदद मिलेगी।



















