अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट मुकाबले में कोई भी टीम अपनी सबसे मजबूत एकादश के साथ मैदान पर उतरना पसंद करती है, लेकिन भारतीय टीम के हालिया प्रयोगों ने खेल प्रेमियों को हैरान कर दिया है। जसप्रीत बुमराह के बाद राष्ट्रीय सेटअप में सबसे अनुभवी और असरदार तेज गेंदबाजों में गिने जाने वाले मोहम्मद सिराज स्क्वॉड का हिस्सा होने के बावजूद लगातार मुकाबलों से बाहर बैठे हैं। तिरुवनंतपुरम के बाद जब टीम दूसरे वनडे मुकाबले के लिए गुवाहाटी पहुंची, तब यह संभावना जताई जा रही थी कि प्रबंधन सिराज को अंतिम एकादश में शामिल करेगा। इसके उलट प्रबंधन ने आकिब नबी को अंतरराष्ट्रीय पदार्पण का मौका दिया, जबकि सिराज एक बार फिर डगआउट में साथी खिलाड़ियों के लिए पानी ढोने तक सीमित नजर आए।
मैदान पर गेंदबाजों की धुलाई और डगआउट में बैठे सिराज
वेस्टइंडीज के खिलाफ चल रही सीमित ओवरों की इस श्रृंखला में भारतीय तेज गेंदबाजी आक्रमण बेहद कमजोर साबित हुआ है। श्रृंखला के शुरुआती मुकाबले में कैरेबियाई बल्लेबाजों ने 296 रन बनाए थे। इसके बाद गुवाहाटी में खेले गए दूसरे एकदिवसीय मुकाबले में मेहमान टीम के बल्लेबाजों ने भारतीय तेज गेंदबाजों के खिलाफ जमकर रन बटोरे और स्कोरबोर्ड पर 405 रनों का विशाल स्कोर खड़ा कर दिया। इस दौरान गुरनूर बरार ने अपने कोटे में 96 रन खर्चे, प्रसिद्ध कृष्णा ने केवल 5 ओवरों की गेंदबाजी में 45 रन दिए और पदार्पण कर रहे आकिब नबी ने 8.5 ओवरों में 84 रन लुटा डाले। जब मैदान पर गेंदबाज लगातार रन लुटा रहे थे, तब मोहम्मद सिराज डगआउट में काला चश्मा लगाए इस पूरे घटनाक्रम को देखते रहे।
फिटनेस की स्थिति अथवा प्रबंधन के साथ तल्खी
तेज गेंदबाजी के इस लचर प्रदर्शन के बाद चयन और रणनीति को लेकर तीखे सवाल खड़े हो रहे हैं। यदि सिराज पूरी तरह फिट नहीं हैं, तो उन्हें राष्ट्रीय टीम के डगआउट में रखने के स्थान पर सेंटर ऑफ एक्सीलेंस में रिहैबिलिटेशन के लिए भेजा जाना चाहिए था। वहीं यदि वह पूरी तरह मैच फिट हैं, तो उन्हें अभ्यास सत्रों में भी बेहद सीमित गेंदबाजी क्यों कराई जा रही है। सिराज अचानक टीम प्रबंधन की पहली पसंद से बाहर कैसे हो गए, यह गुत्थी अभी तक अनसुलझी है।
श्रीलंका दौरे का बयान और धीमी गेंदबाजी का असर
सिराज के बाहर बैठने की जड़ें हाल ही में संपन्न हुए श्रीलंका दौरे से जुड़ी मानी जा रही हैं। गॉल टेस्ट में मिली जीत के उपरांत दिए एक साक्षात्कार में सिराज ने कहा था कि वह पिच के मिजाज को देखते हुए गेंदबाजी में पूरी ताकत नहीं झोंक रहे थे। उनके इस वक्तव्य पर कई पूर्व खिलाड़ियों और क्रिकेट विश्लेषकों ने कड़ी आपत्ति जताई थी, जिनका तर्क था कि एक स्ट्राइक गेंदबाज का कर्तव्य मैदान पर अपनी पूरी ऊर्जा लगाना है। इसके अतिरिक्त कोलंबो में सिराज ने 125 किमी/घंटा से भी कम रफ्तार से गेंदबाजी की थी, जिससे टीम का शीर्ष प्रबंधन नाखुश था। खेल के जानकारों का मानना है कि यदि पूरी तरह फिट होने के बावजूद सिराज को मैदान पर नहीं उतारा जा रहा है, तो संभवतः प्रबंधन अनुशासन और रवैये को लेकर कड़ा संदेश देना चाहता है। हालांकि इस खींचतान का सीधा असर मैदान पर टीम के गेंदबाजी संतुलन और नतीजों पर पड़ता दिख रहा है।



















