क्रिकेट के इतिहास में कुछ ऐसी तारीखें और मुकाबले दर्ज हैं, जिनके नतीजे से ज्यादा मैदान पर घटा वह वाकया लोगों के जेहन में हमेशा के लिए बस जाता है। जब दो दिग्गज शैलियों और पीढ़ियों के प्रतीक आमने-सामने हों, तो मैदान का रोमांच चरम पर पहुंच जाता है। आज से दो दशक पहले एंटीगा के मैदान पर एक ऐसा ही वाकया पेश आया था, जिसने खेल के नियमों, अंपायरिंग की सीमाओं और खिलाड़ियों के गुस्से को लेकर दुनिया भर में बहस छेड़ दी थी। उस घटना की गूंज आज भी क्रिकेट प्रेमियों के बीच पूरी शिद्दत से सुनाई देती है।
साल 2006 के एंटीगा टेस्ट की वो सुलगती दोपहर
साल 2006 का एंटीगा टेस्ट मुकाबला भारतीय टीम की आक्रामक बल्लेबाजी और एक भयंकर विवाद के कारण हमेशा याद रखा जाता है। मैदान पर शांतचित्त और संतुलित नजर आने वाले कैरेबियन कप्तान ब्रायन लारा उस दिन अपना आपा इस कदर खो बैठे थे कि उन्होंने मैच को बीच में ही रोककर अपनी पूरी टीम को पवेलियन वापस ले जाने की चेतावनी दे दी थी। इस पूरे घटनाक्रम के केंद्र में भारतीय क्रिकेट के उभरते हुए सितारे महेंद्र सिंह धोनी और वेस्टइंडीज के स्पिनर डेव मोहम्मद थे, जिनके बीच का वह मुकाबला क्रिकेट की लोककथाओं का हिस्सा बन चुका है।
डेव मोहम्मद पर धोनी का आक्रामक प्रहार
उस दौर में महज 24 साल की उम्र वाले महेंद्र सिंह धोनी अपनी ताबड़तोड़ और बेखौफ़ बल्लेबाजी के लिए पूरी दुनिया में जाने जाते थे। भारतीय पारी के दौरान उन्होंने कैरेबियन स्पिनर डेव मोहम्मद को अपने तरकश के तीरों से निशाना बनाया और उनकी गेंदों पर लगातार तीन गगनचुंबी छक्के जड़कर स्टेडियम में तहलका मचा दिया। पूरा मैदान धोनी के इस विध्वंसक रूप को देखकर अवाक था। लेकिन धोनी यहीं पर रुकने के मूड में नहीं थे। उन्होंने अगली ही गेंद पर एक बार फिर बड़ा शॉट लगाने का जोखिम उठाया, जिसके बाद गेंद हवा में ऊंची उठ गई और डीप मिड-विकेट बाउंड्री की तरफ तेजी से बढ़ गई। वहां तैनात डेरेन गंगा ने पीछे की ओर दौड़ते हुए एक बेहद शानदार और कठिन कैच लपक लिया।
अंपायरों के असमंजस से बढ़ा तनाव
मैदान पर हुए घटनाक्रम के बाद धोनी को लगा कि वे आउट हो चुके हैं और उन्होंने बिना किसी विलंब के पवेलियन की तरफ अपने कदम बढ़ा दिए। लेकिन तभी मुकाबले में असली मोड़ आया जब मैदानी अंपायर असद रऊफ और साइमन टौफेल ने धोनी को बीच रास्ते में ही रुकने का इशारा कर दिया। दोनों अंपायरों के मन में यह गंभीर संदेह था कि क्या कैच पूरा करते वक्त डेरेन गंगा का जूता या शरीर का कोई हिस्सा बाउंड्री लाइन को छू गया था या नहीं। उस समय आधुनिक तकनीक और रीप्ले आज की तरह इतने उन्नत नहीं थे और तीसरे अंपायर के पास उपलब्ध टीवी फुटेज भी पूरी तरह से स्पष्ट तस्वीरें पेश करने में नाकाम साबित हो रही थी। लंबे समय तक फुटेज खंगालने के बाद भी जब कोई पुख्ता और अकाट्य सबूत हाथ नहीं लगा, तो अंपायरों ने पारंपरिक नियम का सहारा लेते हुए बेनिफिट ऑफ डाउट बल्लेबाज को देने का मन बना लिया।
ब्रायन लारा का मैदान पर भड़काऊ रुख
अंपायरों की तरफ से धोनी को नॉट-आउट करार दिए जाने का इशारा मिलते ही वेस्टइंडीज के कप्तान ब्रायन लारा का गुस्सा सातवें आसमान पर पहुंच गया। लारा का साफ तौर पर यह तर्क था कि जब खुद फील्डर डेरेन गंगा मैदान पर यह स्वीकार कर रहे हैं कि उन्होंने पूरी सफाई के साथ कैच लपका है, तो अंपायरों को खिलाड़ी के बयान पर भरोसा करना चाहिए। लारा गुस्से से इतने आगबबूला हो गए कि वे अंपायर असद रऊफ के बेहद करीब जा पहुंचे और उनके साथ तीखी बहस करने लगे। उन्होंने सरेआम धमकी दे डाली कि यदि धोनी को मैदान से वापस नहीं बुलाया गया, तो वे अपनी पूरी टीम को लेकर मैदान छोड़ देंगे और मुकाबला अनिश्चितकाल के लिए रुक जाएगा। इस अप्रत्याशित तनातनी के चलते खेल कई लंबे मिनटों तक ठप रहा।
राहुल द्रविड़ की समझदारी से टला बड़ा संकट
मैदान पर बिगड़ते हालात और बढ़ते तनाव को भांपते हुए भारतीय कप्तान राहुल द्रविड़ ने अनुकरणीय खेल भावना का परिचय दिया। उन्होंने बीच बचाव करते हुए क्रीज पर मौजूद धोनी से बातचीत की और पूरी भारतीय टीम ने आपसी सहमति से विवाद को और न बढ़ाने का बुद्धिमत्तापूर्ण फैसला लिया। धोनी ने महान बल्लेबाज लारा के उग्र गुस्से और खेल की गरिमा का सम्मान करते हुए खुद ही स्वेच्छा से पवेलियन लौटने का निर्णय लिया, भले ही तकनीकी और कानूनी तौर पर उन्हें आउट नहीं दिया गया था। द्रविड़ और धोनी के इस सूझबूझ भरे कदम ने अंततः लारा के गुस्से को शांत किया और रुका हुआ मैच दोबारा सुचारू रूप से शुरू हो सका। यह यादगार वाकया आज भी क्रिकेट के पन्नों में लारा के आक्रामक नेतृत्व और धोनी की खेल भावना के अनूठे मेल के रूप में दर्ज है।



















