इंडियन प्रीमियर लीग के आगामी सीजन को लेकर चेन्नई सुपर किंग्स ने अपने क्रिकेट ढांचे में एक बड़ा रणनीतिक बदलाव किया है। फ्रेंचाइजी ने भारत के पूर्व तेज गेंदबाज ज़हीर ख़ान को अपना नया मुख्य कोच नियुक्त किया है। पिछले कई सालों से टीम के रणनीतिक थिंक टैंक का मजबूत स्तंभ रहे लंबे कोचिंग कार्यकाल की जगह अब ज़हीर ख़ान संभालेंगे। टीम प्रबंधन जब नए हेड कोच की तलाश में जुटा था, तब कई घरेलू और विदेशी दिग्गजों के नाम सामने आ रहे थे। उन सभी चर्चाओं और बड़े नामों को पीछे छोड़ते हुए फ्रेंचाइजी ने अंततः ज़हीर ख़ान के नाम पर मुहर लगा दी। इस प्रतिष्ठित पद पर उनकी नियुक्ति के पीछे चेन्नई सुपर किंग्स के पूर्व कप्तान महेंद्र सिंह धोनी का गहरा विश्वास और दूरगामी सोच सबसे प्रमुख कारण बनकर सामने आई है।
टीम में बदलाव के दौर के बीच भारतीय रणनीतिकार पर दांव
चेन्नई सुपर किंग्स का टीम प्रबंधन और विशेष रूप से महेंद्र सिंह धोनी एक ऐसा भारतीय मार्गदर्शक चाहते थे जो घरेलू क्रिकेट के स्तर पर युवा प्रतिभाओं की नब्ज अच्छी तरह समझता हो। मौजूदा समय में टीम एक बड़े बदलाव के दौर से गुजर रही है, जहां भविष्य के लिए नए और युवा खिलाड़ियों का एक मजबूत समूह तैयार करना सबसे बड़ी प्राथमिकता बन चुका है। ऐसे समय में टीम को एक ऐसे व्यक्ति की जरूरत थी जिसकी खेल को लेकर समझ असाधारण हो और जो चतुर रणनीतिकार के तौर पर अपनी पहचान रखता हो। धोनी का मानना रहा कि ज़हीर ख़ान से बेहतर क्रिकेटिंग समझ इस काम के लिए किसी अन्य के पास नहीं हो सकती। पूर्व में अन्य बड़ी टी20 फ्रेंचाइजी के साथ काम करने का ज़हीर का लंबा रणनीतिक अनुभव अब चेन्नई के लिए एक बेहद मजबूत सहारा साबित होगा।
अंतरराष्ट्रीय मैदान से शुरू हुई थी जुगलबंदी
महेंद्र सिंह धोनी और ज़हीर ख़ान के बीच का रिश्ता केवल एक कप्तान और तेज गेंदबाज तक सीमित नहीं रहा है। भारतीय क्रिकेट के सबसे सफल दौर, विशेषकर 2011 के विश्व कप अभियान में इन दोनों की साझेदारी देखने लायक थी। उस टूर्नामेंट में ज़हीर ख़ान भारत के सबसे सफल गेंदबाज बनकर उभरे थे और पूरे अभियान में उन्होंने अहम मौकों पर टीम को सफलता दिलाई। अंतरराष्ट्रीय मुकाबलों के दौरान जब भी भारतीय टीम किसी दबाव या संकट की स्थिति में फंसती थी, धोनी बिना किसी हिचकिचाहट के गेंद ज़हीर के हाथों में थमा दिया करते थे। ज़हीर भी अपने कप्तान के उस भरोसे को कभी टूटने नहीं देते थे और अपनी सटीक योजना से मैच का रुख पलट देते थे। खेल के दिनों में बनी वही आपसी समझ और गहरा सम्मान आज भी दोनों के बीच कायम है।
मैच का रुख मोड़ने वाले पुराने किस्से
दोनों खिलाड़ियों के बीच की ऑन-फील्ड समझ को याद करने के लिए 2011 के विश्व कप का इंग्लैंड के खिलाफ मुकाबला एक बेहतरीन उदाहरण है। उस मैच में विपक्षी बल्लेबाज एंड्रू स्ट्रॉस भारतीय गेंदबाजों पर लगातार हावी हो रहे थे और तेजी से रन बना रहे थे। ऐसे नाजुक मोड़ पर धोनी ने गेंद ज़हीर ख़ान को सौंपी और उन्हें अपनी रणनीति के अनुसार फील्डिंग सजाने की पूरी छूट दे दी। ज़हीर ने अपनी चतुर गेंदबाजी योजना से एंड्रू स्ट्रॉस और इयान बेल को लगातार गेंदों पर पवेलियन भेजकर पूरे मैच का समीकरण ही बदल दिया था।
इसी तरह टेस्ट क्रिकेट के मैदान पर भी दोनों के बीच एक अनूठा तालमेल देखने को मिलता था। विकेट के पीछे खड़े धोनी अक्सर ज़हीर को उनके उपनाम 'जैक' से पुकारते थे। जब भी कोई नया बल्लेबाज क्रीज पर उतरता, धोनी विकेट के पीछे से निर्देश देते थे कि बल्लेबाज के पैर ठीक से नहीं चल रहे हैं, इसलिए गेंद को थोड़ा आगे टप्पा खिलाया जाए। ज़हीर बिना किसी संकोच के अपने कप्तान की इस सांकेतिक सलाह पर अमल करते थे और अगली ही गेंद पर बल्लेबाज चकमा खा जाता था। धोनी अक्सर इस बात को दोहराते थे कि ज़हीर भारतीय गेंदबाजी आक्रमण के वास्तविक अगुआ हैं, जिन्हें रणनीति सिखाने की आवश्यकता नहीं पड़ती, बल्कि वे स्वयं आगे बढ़कर कप्तान को उपयोगी सलाह देते हैं।
डगआउट में दिखेगी शांत और आक्रामक सोच का संतुलन
मैदान के बाहर भी धोनी और ज़हीर की आपसी समझ हमेशा मजबूत रही है। धोनी की शांत और गंभीर नेतृत्व शैली को ज़हीर का आक्रामक और तार्किक नजरिया संतुलित करता आया है। जब चेन्नई सुपर किंग्स के शीर्ष पद के लिए विचार-विमर्श चल रहा था, तब धोनी ने ज़हीर के नाम की सबसे पुरजोर वकालत की। एक-दूसरे के विचारों को बिना कहे भांप लेने की क्षमता ही इस जोड़ी की सबसे बड़ी ताकत रही है। नए हेड कोच के रूप में ज़हीर ख़ान के सामने भी बड़ी चुनौतियां होंगी, क्योंकि चेन्नई सुपर किंग्स को एक बार फिर से खिताब की दौड़ में शीर्ष पर बनाए रखना आसान काम नहीं है। पीली जर्सी के प्रशंसकों के लिए डगआउट में धोनी और ज़हीर को एक साथ रणनीति बनाते देखना एक रोमांचक अनुभव साबित होने वाला है।



















