आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के क्षेत्र में स्पेशियल इंटेलिजेंस यानी त्रिआयामी समझ को स्वचालित करने की होड़ बहुत तेजी से बढ़ रही है। इस तकनीकी दायरे में यान लेकन की अगुवाई वाली एएमआई लैब्स और फेई-फेई ली की वर्ल्ड लैब्स सबसे प्रमुख नामों के रूप में उभरी हैं। दोनों ही कंपनियों ने उद्योग जगत में जबर्दस्त चर्चा बटोरी है और भारी-भरकम पूंजी भी जुटाई है, परंतु जब बात यह आती है कि वे वास्तव में मुनाफा कैसे कमाएंगी या उनका प्राथमिक कारोबारी मॉडल क्या होगा, तो तस्वीर बहुत धुंधली नजर आती है। बाजार में भारी उत्साह के बावजूद इन स्टार्टअप्स के वास्तविक उत्पाद और व्यावसायिक लक्ष्य अब भी रहस्य के घेरे में हैं।
गोपनीयता की सख्त दीवार और कंपनियों का रुख
वर्ल्ड मॉडल तकनीक का दायरा रोबोटिक्स, इंटरैक्टिव वीडियो और जटिल स्वायत्त ड्राइविंग प्रणालियों तक फैला हुआ है। इसके बावजूद कंपनियां यह स्पष्ट करने से लगातार बच रही हैं कि वे अपने शोध को बाजार में किस रूप में उतारेंगी। हाल ही में ऑल इन सम्मेलन के दौरान आयोजित एक पैनल चर्चा में जब एएमआई लैब्स के सह-संस्थापक और वर्ल्ड मॉडल्स के उपाध्यक्ष माइकल रबात से कंपनी के विशिष्ट कार्यों के बारे में पूछा गया, तो उन्होंने कोई विस्तृत जानकारी देने से साफ इनकार कर दिया। माइकल रबात ने कहा,
“जब हम इस बारे में बात करने के लिए तैयार होंगे, तब चर्चा करेंगे।”
बाद में ईमेल के जरिए अपनी बात स्पष्ट करते हुए उन्होंने बताया कि संस्था फिलहाल शोध और निर्माण के शुरुआती चरण में है, इसलिए वे उत्पाद की योजनाओं अथवा समयसीमा को लेकर सार्वजनिक तौर पर कुछ भी साझा नहीं कर रहे हैं। एएमआई लैब्स को बने अभी एक साल से भी कम समय हुआ है, इसलिए उसकी यह खामोशी समझ में आती है। हालांकि, यह गोपनीयता केवल एक कंपनी तक सीमित नहीं है, बल्कि इस पूरे तकनीकी क्षेत्र की पहचान बन चुकी है। उदाहरण के लिए, वर्ल्ड लैब्स का मार्बल इस क्षेत्र का सबसे विकसित उत्पाद माना जाता है। इसके प्रदर्शनों में वीडियो गेम के लिए अन्वेषण योग्य परिवेश तैयार करने, दृश्य प्रभाव यानी सीजीआई बनाने और सरल मीडिया निर्माण की क्षमताएं दिखाई गई हैं। रोबोटिक्स के क्षेत्र में भी इसके उपयोग संभव हैं, लेकिन पूरा ढांचा फिलहाल केवल तकनीकी क्षमताओं को दर्शाने तक सीमित प्रतीत होता है।
डेटा प्रदाताओं को भी नहीं मिल रही पूरी जानकारी
इस क्षेत्र में पसरी खामोशी का दायरा केवल बाहरी दुनिया तक सीमित नहीं है, बल्कि कंपनियों के साथ काम करने वाले प्रमुख भागीदारों और डेटा आपूर्तिकर्ताओं तक फैला हुआ है। वर्ल्ड मॉडल उद्योग के लिए डेटा मुहैया कराने वाली कंपनी फिज़िकल के मुख्य कार्यकारी अधिकारी एलेक्स डी विगान ने बताया कि उनका डेटा ग्राहकों के काम आ रहा है, लेकिन वे खुद इस बात से अनजान हैं कि वास्तव में क्या बनाया जा रहा है। एलेक्स डी विगान ने स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा,
“काश वे हमें और बताते, अगर हमें पता होता कि वे किस दिशा में काम कर रहे हैं तो हम अधिक उपयोगी डेटा तैयार कर सकते थे।”
यह अनिश्चितता कुछ हद तक वर्ल्ड मॉडल तकनीक की बहुमुखी प्रकृति की वजह से भी है। इसका सबसे सरल रूप दुनिया का एक त्रिआयामी और नौवहन योग्य नक्शा हो सकता है, जैसा कि सेल्फ-ड्राइविंग कारों को नियंत्रित करने वाले एल्गोरिदम में देखा जाता है। जो तकनीक वेमो को सड़कों के जटिल ट्रैफिक में सही रास्ता खोजने में मदद करती है, वही मॉडलिंग किसी इंसानी रोबोट को बक्से उठाने या कुछ मिनट के सामान्य वीडियो को एक विशाल वर्चुअल दुनिया में बदलने की क्षमता भी दे सकती है। एएमआई लैब्स ने भी विनिर्माण, बायोमेडिसिन, रोबोटिक्स और यहां तक कि नाबिया के साथ साझेदारी करके चिकित्सकों के लिए विशेष सॉफ्टवेयर तक अपने कदम बढ़ाए हैं। निश्चित रूप से कंपनी इन सभी क्षेत्रों में एक साथ काम नहीं करेगी, लेकिन वर्तमान में किसी एक दिशा को प्राथमिकता मिलती नहीं दिख रही है।
डार्क फॉरेस्ट जैसी प्रतिस्पर्धी रणनीति
विशेषज्ञों का मानना है कि वर्ल्ड मॉडल तकनीक के आधार पर कई बेहद सफल और बड़े व्यवसाय खड़े किए जा सकते हैं। जब तक निवेशकों से आसान शर्तों पर फंड मिलता रहता है, तब तक कंपनियों पर किसी एकल उत्पाद पर तुरंत ध्यान केंद्रित करने का दबाव भी नहीं होता। वास्तव में, अपनी योजनाओं को छिपाए रखने की एक बहुत मजबूत रणनीतिक वजह भी है। यदि कोई प्रमुख लैब यह घोषणा कर दे कि उसने अगली पीढ़ी का कोई विशेष मानवीय रोबोट या हॉलीवुड स्तर की रेंडरिंग प्रणाली बना ली है, तो कई अन्य तकनीकी कंपनियां तुरंत उसी दिशा में अपने संसाधन झोंक देंगी।
ऐसी स्थिति में उस स्टार्टअप को न केवल प्रतिद्वंद्वी वर्ल्ड मॉडल कंपनियों और नए तकनीकी समूहों से मुकाबला करना पड़ेगा, बल्कि ओपनएआई और एंथ्रॉपिक जैसी दिग्गज ताकतें भी उस क्षेत्र में कूद पड़ेंगी। आसान फंडिंग का एक नकारात्मक पहलू यह भी है कि वही पूंजी प्रतिस्पर्धियों को भी आसानी से मिल जाती है। इसलिए जब तक व्यावसायिक सफलता का रास्ता पूरी तरह साफ न हो जाए, तब तक अपनी योजनाओं को सार्वजनिक करने से बचना ही समझदारी माना जाता है। यह स्थिति वैज्ञानिक कथा लेखक लियू सिक्सीन की उस परिकल्पना से मेल खाती है जिसे डार्क फॉरेस्ट परिदृश्य कहा जाता है, जिसमें जंगल में अन्य शिकारियों की मौजूदगी का अंदाजा न होने पर खुद को पूरी तरह शांत और अदृश्य रखना ही सबसे सुरक्षित उपाय होता है।


















