पर्सनल कंप्यूटर की दुनिया में मोबाइल और लैपटॉप के बीच का तालमेल लंबे समय से एक बड़ी चुनौती रहा है। इसी खाई को पाटने के लिए गूगल ने आधिकारिक तौर पर गूगलबुक नाम से लैपटॉप की एक बिल्कुल नई श्रेणी सामने रखी है। इस पहल की पहली झलक मई के महीने में दिखाई गई थी, जिसके बाद अब न्यूयॉर्क शहर में आयोजित एक विशेष मीडिया कार्यक्रम के दौरान इस ऑपरेटिंग सिस्टम की विस्तृत खूबियों से पर्दा उठाया गया है। एंड्रॉयड की कार्यप्रणाली की तर्ज पर ही गूगल ने विभिन्न हार्डवेयर निर्माताओं को अपनी मशीनें तैयार करने की अनुमति दी है, बशर्ते वे कंपनी द्वारा तय किए गए कड़े तकनीकी मानकों पर पूरी तरह खरे उतरते हों।
पांच प्रमुख निर्माताओं ने उतारे पहले मॉडल
इस नए मानक के ऐलान के साथ ही बाजार में पांच प्रमुख कंप्यूटर निर्माताओं ने अपने गूगलबुक मॉडल पेश कर दिए हैं। इनमें एचपी, डेल, लेनोवो, एसर और आसुस की ओर से एक-एक मॉडल शामिल है। फॉर्म फैक्टर के मामले में एसर की मशीन टू-इन-वन डिजाइन के साथ टैबलेट और लैपटॉप दोनों तरह से इस्तेमाल की जा सकती है, जबकि बाकी चारों कंपनियों ने पारंपरिक क्लैमशेल डिजाइन चुना है। इन सभी मशीनों को शक्ति देने के लिए क्वालकॉम का स्नैपड्रैगन एक्स एलीट चिप या फिर इंटेल का कोर अल्ट्रा 3 प्रोसेसर लगाया गया है। चिपसेट निर्माता मीडियाटेक ने भी अपने डाइमेंसिटी सीएक्स सी10 मैक्स चिप के साथ इस प्लेटफॉर्म का समर्थन किया है, हालांकि शुरुआती पांच मॉडलों में से किसी में भी अभी इसका इस्तेमाल नहीं हुआ है।
इन नए लैपटॉप के लिए प्री-ऑर्डर शुरू हो चुके हैं और ये 4 अक्टूबर से स्टोर्स में बिक्री के लिए उपलब्ध होंगे। इनकी शुरुआती कीमत 899 डॉलर तय की गई है। खरीदारों को लुभाने के लिए हर डिवाइस के साथ पूरे एक साल के लिए 5 टेराबाइट स्टोरेज वाली गूगल एआई प्रो सेवा मुफ्त दी जा रही है।
हार्डवेयर के लिए तय किए गए कड़े नियम
गूगल ने स्पष्ट किया है कि हर गूगलबुक को कुछ अनिवार्य पैमानों को पूरा करना होगा ताकि डिवाइस का अनुभव प्रीमियम बना रहे। निर्माण सामग्री के तौर पर एल्युमिनियम, मैग्नीशियम या कार्बन फाइबर जैसे हल्के मगर मजबूत पदार्थों का चयन अनिवार्य किया गया है। आंतरिक क्षमता की बात करें तो कम से कम 16 जीबी रैम और न्यूनतम 45 टॉप्स (टेरा ऑपरेशंस पर सेकंड) की क्षमता वाला न्यूरल प्रोसेसिंग इंजन होना जरूरी है। डिस्प्ले में टचस्क्रीन अनिवार्य है, जो एलसीडी या ओएलईडी पैनल पर आधारित हो सकती है। इसके अतिरिक्त बैकलाइट वाला कीबोर्ड, हैप्टिक ट्रैकपैड, डॉल्बी एटमॉस समर्थित स्पीकर्स, बैकग्राउंड शोर को दूर करने वाले स्टूडियो क्वालिटी माइक्रोफोन और कम से कम 14 घंटे की बैटरी लाइफ हर मॉडल में देना अनिवार्य है। लंबे इस्तेमाल को ध्यान में रखते हुए इन सभी मशीनों को 10 साल तक नियमित सॉफ्टवेयर अपडेट देने की प्रतिबद्धता जताई गई है।
डिजाइन पहचान के रूप में हर डिवाइस के बाहरी हिस्से पर एक विशेष ग्लोबार एलईडी स्ट्रिप दी गई है, जो दूर से ही इसे गूगलबुक के रूप में दर्शाती है। यह एलईडी स्ट्रिप मूल क्रोमबुक पिक्सेल की याद दिलाती है। हालांकि गूगल के मेड बाय गूगल पिक्सेल हार्डवेयर डिवीजन की तरफ से खुद का कोई गूगलबुक आएगा या नहीं, इस पर कंपनी ने अभी चुप्पी साध रखी है। ऐप डेवलपर्स अपनी ऐप्लिकेशंस के खास एक्शन के हिसाब से इस ग्लोबार की लाइटिंग सेट कर सकेंगे। साथ ही ग्राहकों के लिए एक गुप्त ईस्टर एग ऐप भी रखा गया है जिसके जरिए वे लाइट के रंग और एनीमेशन को अपनी पसंद से बदल सकते हैं। हालिया पिक्सेल फोन में पेश किए गए हाईलाइट फीचर की तरह, जब भी यूजर जेमिनी से बातचीत करेगा तो यह ग्लोबार चमकने लगेगा।
क्रोमओएस और एंड्रॉयड का अनूठा संगम
एंड्रॉयड इकोसिस्टम के प्रेसिडेंट समीर सामत ने कार्यक्रम में कहा कि पारंपरिक लैपटॉप कई दशकों पहले मोबाइल क्रांति से पूर्व डिजाइन किए गए थे, इसलिए उन्हें नए सिरे से तैयार करना कई वर्षों की परियोजना है। उन्होंने जोर देकर कहा कि पहला कदम एंड्रॉयड समुदाय पर ध्यान केंद्रित करना है क्योंकि आज ऐसा कोई लैपटॉप नहीं है जो एंड्रॉयड फोन के साथ सहज रूप से मिलकर काम कर सके।
गूगलबुक वस्तुतः क्रोमओएस और मोबाइल केंद्रित एंड्रॉयड ऑपरेटिंग सिस्टम का एक अनूठा संगम है। गूगल का कहना है कि बजट श्रेणी और स्कूलों की जरूरतों को पूरा करने के लिए क्रोमओएस बाजार में पहले की तरह बना रहेगा। गूगलबुक कोई सामान्य मोबाइल इंटरफेस को बड़ा करके दिखाया गया रूप नहीं है, बल्कि यह एक्स86 और एआरएम दोनों चिप आर्किटेक्चर के लिए विशेष रूप से तैयार किया गया एक स्वतंत्र ऑपरेटिंग सिस्टम है।
तीन स्तरों में बांटी गईं ऐप्लिकेशंस
गूगलबुक पर ऐप्स को तीन श्रेणियों में विभाजित किया गया है। जब कोई यूजर अपने एंड्रॉयड फोन से इस लैपटॉप का सेटअप करता है, तो वाई-फाई नेटवर्क, पासवर्ड, फोन सेटिंग्स, मैसेज, कॉन्टैक्ट्स और तस्वीरें बिना किसी रुकावट के लैपटॉप पर स्थानांतरित हो जाते हैं। फोन में मौजूद सभी ऐप्स अपने आप इंस्टॉल नहीं होते क्योंकि फेसबुक जैसी कुछ सेवाओं के लिए गूगल का मानना है कि वेब अनुभव ज्यादा बेहतर है, हालांकि जरूरत पड़ने पर यूजर फेसबुक का मोबाइल ऐप भी डाउनलोड कर सकते हैं।
दूसरी श्रेणी उन ऐप्स की है जिन्हें डेस्कटॉप स्क्रीन के बड़े आकार और बेहतर लेआउट के लिए अनुकूलित किया गया है। तीसरी और सबसे उन्नत श्रेणी उन ऐप्स की है जो पूरी तरह से डेस्कटॉप के लिए तैयार किए गए हैं, जैसे क्रोम ब्राउजर का डेस्कटॉप संस्करण। वर्तमान में कैपकट, एडोब फोटोशॉप, नोटेबिलिटी और फैंटेस्टिकल जैसी करीब 20 ऐप्स इस श्रेणी में शामिल हैं। उम्मीद जताई जा रही है कि आने वाले समय में विंडोज और मैकओएस के लिए बनने वाले पेशेवर सॉफ्टवेयर भी इस प्लेटफॉर्म पर लाए जाएंगे।
गेमिंग और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की भूमिका
गेमिंग के शौकीनों के लिए गूगल प्ले स्टोर पर 20,000 से अधिक गेम उपलब्ध कराए जा रहे हैं, जिनमें मोबाइल, टैबलेट और लैपटॉप के बीच क्रॉस-डिवाइस प्रोग्रेस की सुविधा मिलती है। शीर्ष 100 लोकप्रिय गेम्स में से करीब 50 को कीबोर्ड, ट्रैकपैड और टचस्क्रीन के अनुकूल बनाया गया है। चूंकि बिना अलग ग्राफिक्स कार्ड के भारी एएए गेम्स सीधे डाउनलोड करके चलाना संभव नहीं है, इसलिए गूगल पूरे एक साल के लिए एनवीडिया की जीफोर्स नाउ क्लाउड गेमिंग सेवा की सदस्यता मुफ्त दे रहा है, जिसे इस प्लेटफॉर्म के लिए विशेष रूप से ऑप्टिमाइज किया गया है।
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस को इस सिस्टम के केंद्र में रखा गया है। एंड्रॉयड 17 की भांति यूजर जेमिनी को साधारण प्रॉम्प्ट देकर स्क्रीन पर अपनी पसंद के डेस्कटॉप विजेट्स तैयार करवा सकते हैं। सिस्टम का सबसे चर्चित फीचर मैजिक पॉइंटर है। स्क्रीन पर किसी भी चीज के ऊपर माउस कर्सर हिलाने पर जेमिनी तुरंत संदर्भ के अनुसार सुझाव देता है। उदाहरण के लिए, यदि किसी इनविटेशन मैसेज पर कर्सर हिलाया जाए तो वह तुरंत एक टैप में गूगल कैलेंडर में इवेंट जोड़ने का विकल्प देता है। किसी फोटो या वीडियो में दिख रहे कुत्ते की नस्ल जाननी हो या किसी संदिग्ध ईमेल के फिशिंग होने की जांच करनी हो, कर्सर हिलाकर तुरंत जेमिनी से पूछा जा सकता है।
बोलकर लिखने की सुविधा को बेहतर बनाने के लिए गूगल पिक्सेल 11 स्मार्टफोन से रैम्बलर तकनीक को इसमें शामिल किया गया है। यह आवाज को तुरंत टेक्स्ट में बदलता है और बोलते समय निकलने वाली अनावश्यक आवाजों को अपने आप हटा देता है। यूजर इस टूल को वाक्य की शैली बदलने, बुलेट पॉइंट्स या इमोजी जोड़ने और कई भाषाओं को मिलाने का निर्देश भी दे सकते हैं। कीबोर्ड पर दिए गए क्विक इंसर्ट बटन के जरिए रैम्बलर को किसी भी टेक्स्ट फील्ड में सक्रिय किया जा सकता है।
स्मार्टफोन कनेक्टिविटी के तहत फाइल्स ऐप में संदर्भ-आधारित सर्च की सुविधा है, जिससे केवल वस्तु का नाम टाइप करके फोन और लैपटॉप दोनों की तस्वीरें खोजी जा सकती हैं। इसके अलावा कंटिन्यू ऑन फीचर के जरिए फोन पर चल रहे काम को लैपटॉप पर वहीं से आगे बढ़ाया जा सकता है, जबकि ऐप-कास्टिंग फीचर डोरडैश जैसे मोबाइल केंद्रित ऐप्स को सीधे लैपटॉप की स्क्रीन पर स्ट्रीम करने की सुविधा देता है। आईफोन यूजर्स के लिए लिंक टू आईओएस ऐप दिया गया है जिसके जरिए मैसेज और कुछ नोटिफिकेशन देखे जा सकते हैं, लेकिन दोनों ऑपरेटिंग सिस्टम की सीमाओं के चलते उन्हें सीमित सुविधाएं ही मिल सकेंगी।



















