राजस्थान के बाड़मेर में स्थित मेडिकल कॉलेज जिला अस्पताल से एक गंभीर घटना सामने आई है, जहां बीती रात आपातकालीन वार्ड में कुछ युवकों ने जमकर हंगामा किया. मरीज के साथ अस्पताल पहुंचे इन युवकों ने न सिर्फ अस्पताल परिसर में तोड़फोड़ की, बल्कि ड्यूटी पर तैनात डॉक्टरों और नर्सिंग स्टाफ के साथ भी अभद्र व्यवहार किया. इस अचानक हुई घटना के बाद से पूरे अस्पताल में तैनात चिकित्सा कर्मियों और कर्मचारियों के बीच खौफ और असुरक्षा का माहौल बना हुआ है. शुरुआती जानकारी के अनुसार, एक गुस्से से लाल युवक ने आवेश में आकर इमरजेंसी वार्ड के मुख्य दरवाजे को ही तोड़ डाला और वहां मौजूद मेडिकल टीम को धमकाया.
घटना के संबंध में विस्तार से जानकारी देते हुए ड्यूटी पर तैनात डॉक्टर रमेश कटारिया ने बताया कि बीती रात करीब 3 बजे के बाद दो से तीन युवक एक मरीज को लेकर आपातकालीन वार्ड में दाखिल हुए थे. मरीज के तीमारदारों का कहना था कि उसे सांस लेने में भारी तकलीफ हो रही है. अस्पताल के डॉक्टरों ने बिना किसी देरी के मरीज का तुरंत इलाज शुरू कर दिया और उसकी स्थिति को परखने के लिए कई जरूरी मेडिकल जांचें भी करवाईं. डॉक्टर कटारिया के मुताबिक, जब जांच रिपोर्ट सामने आई तो उसमें मरीज के सभी प्रमुख हेल्थ पैरामीटर बिल्कुल सामान्य पाए गए, जिसका मतलब था कि मरीज को कोई गंभीर या तत्काल खतरे वाली स्थिति नहीं थी.
इसके बाद विवाद तब शुरू हुआ जब मरीज के साथ आए युवकों ने डॉक्टरों से जिद पकड़ ली कि वे तुरंत इस मरीज को किसी अन्य बड़े अस्पताल में रेफर कर दें. चूँकि चिकित्सकीय जांच में मरीज की हालत स्थिर और सामान्य पाई गई थी, इसलिए डॉक्टरों ने उन्हें प्यार से समझाया और फिलहाल किसी भी तरह के रेफरल से साफ इंकार कर दिया. डॉक्टर के इतना कहते ही युवकों में से एक शख्स बेकाबू हो गया और गुस्से में आकर उसने आपातकालीन वार्ड के गेट पर तोड़फोड़ शुरू कर दी. स्थिति इतनी बिगड़ गई कि आरोपियों ने वहां मौजूद डॉक्टर और नर्सिंग स्टाफ के साथ गाली-गलौज और बदसलूकी भी की, जिससे अस्पताल का माहौल तनावपूर्ण हो गया.
घटना की गंभीरता को देखते हुए तुरंत पुलिस को इसकी सूचना दी गई, जिसके बाद आरोपी युवक मौके से भाग खड़े हुए. अस्पताल के अधीक्षक डॉ. हनुमान राम चौधरी ने इस पूरे मामले की पुष्टि करते हुए बताया कि ड्यूटी पर तैनात डॉक्टर और नर्सिंग स्टाफ ने उन्हें इस घटना की पूरी जानकारी दी थी. खबर मिलते ही पुलिस को बुलाया गया, जिसके आते ही आरोपी वहाँ से फरार हो गए. हालाँकि, अस्पताल प्रशासन की तरफ से इस मामले में अभी तक पुलिस में कोई औपचारिक लिखित शिकायत दर्ज नहीं कराई गई है. इस घटना के बाद एक बार फिर सरकारी अस्पतालों की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े होने लगे हैं.
अस्पताल के डॉक्टरों और अन्य चिकित्सा कर्मियों का कहना है कि वे दिन-रात अपनी जान जोखिम में डालकर और बिना थके मरीजों की सेवा में जुटे रहते हैं, लेकिन इस तरह की हिंसक वारदतों से उनका मनोबल बुरी तरह प्रभावित होता है. इस घटना से आक्रोशित डॉक्टरों और नर्सिंग स्टाफ ने प्रशासन से मांग की है कि अस्पताल परिसर में सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए जाएँ ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोका जा सके. इसके अलावा, ड्यूटी पर तैनात कर्मचारियों से मारपीट और अस्पताल में तोड़फोड़ करने वाले उपद्रवी तत्वों के खिलाफ सख्त से सख्त कानूनी कार्रवाई किए जाने की भी जोर-शोर से मांग उठाई जा रही है.



















