बिहार के पश्चिम चम्पारण जिले में स्थित बगहा 02 प्रखंड के कदमहिया गांव की एक महिला कृषक ने खेती और उद्यमिता के क्षेत्र में अपनी एक अलग ही मिसाल पेश की है। इस गांव की निवासी सुमन देवी और उनके पति सत्येंद्र सिंह ने पारंपरिक खेती से हटकर कुछ ऐसा अलग किया है, जिससे आज वे आर्थिक रूप से बेहद मजबूत हो रहे हैं। यह दंपत्ति मशरूम की खेती करने के साथ-साथ उसकी प्रोसेसिंग करके उससे उच्च गुणवत्ता वाला मशरूम पाउडर तैयार कर रहा है। अपनी मेहनत और सूझबूझ के दम पर वे इस अनोखे बिजनेस के जरिए हर साल करीब सात लाख रुपये की कमाई कर रहे हैं, जो आसपास के इलाकों के किसानों के लिए भी एक बड़ा उदाहरण बन चुका है।
मशरूम की खेती से आगे बढ़कर प्रोसेसिंग का नया कदम
सत्येंद्र सिंह और सुमन देवी पिछले करीब चार वर्षों से ओएस्टर मशरूम की फार्मिंग का काम पूरी लगन के साथ कर रहे हैं। शुरुआत के तीन वर्षों तक उन्होंने केवल ताजे मशरूम के उत्पादन और उसकी सीधी बिक्री पर ही पूरा ध्यान केंद्रित रखा। लेकिन समय के साथ जब बाजार की नब्ज को उन्होंने गहराई से समझा, तो चौथे साल में उन्होंने मशरूम को बेचने के बजाय उसकी प्रोसेसिंग करके पाउडर बनाने का अभिनव फैसला लिया। इस पूरे काम की सबसे खास बात यह रही कि इसके लिए उन्हें किसी भी तरह के भारी-भरकम बाहरी निवेश की कोई आवश्यकता नहीं पड़ी। थोड़ी सी अतिरिक्त मेहनत के साथ लैब टेस्ट की सभी औपचारिकताएं पूरी की गईं और फूड लाइसेंस प्राप्त करके इस नए वेंचर की शुरुआत कर दी गई।
लागत से कई गुना ज्यादा मुनाफे का गणित
बाजार में मशरूम के पाउडर की कीमत बहुत अच्छी मिलती है। खुले बाजार में एक किलो मशरूम के चूर्ण का भाव करीब 700 रुपये प्रति किलो तक चल रहा है। लागत के लिहाज से देखा जाए तो मशरूम की सामान्य फार्मिंग में जो खर्च आता है, उसी शुरुआती लागत में ही इस पाउडर तैयार करने के काम को भी आसानी से आगे बढ़ाया जा सकता है। ऐसे में यदि कोई भी किसान भाई इस व्यवसाय को अपनाता है, तो उसकी आमदनी का दायरा कई गुना तक बढ़ सकता है। सत्येंद्र बताते हैं कि उन्होंने अपने इस खास मशरूम चूर्ण की ब्रांडिंग रुद्र नेचुरल के नाम से की है, जिससे बाजार में इसकी पहचान और विश्वसनीयता दोनों तेजी से बढ़ रही हैं।
उत्पादन प्रक्रिया को समझें तो एक किलो मशरूम का पाउडर तैयार करने के लिए लगभग पांच किलो तक साबुत ताजे मशरूम की जरूरत पड़ती है। स्पॉन और उर्वरक से भरे हुए 100 रुपये की कीमत वाले एक बैग से अमूमन पांच किलो तक मशरूम की हार्वेस्टिंग हो जाती है। यदि इस मशरूम को सीधे ही साबुत बेचा जाए, तो यह 100 रुपये प्रति किलो की दर से बिकता है। इस तरह 100 रुपये के एक बैग से कुल 500 रुपये की कमाई होती है। लेकिन जब इसी पांच किलो मशरूम की प्रोसेसिंग करके चूर्ण तैयार कर लिया जाता है, तो एक किलो पाउडर से सीधे 700 रुपये तक की आमदनी हासिल हो जाती है, जो मुनाफे को और अधिक बढ़ा देती है।
बढ़ती मांग और शानदार सालाना टर्नओवर
उत्पादन के मामले में सुमन देवी हर महीने लगभग पांच क्विंटल तक मशरूम की हार्वेस्टिंग करती हैं। इस कुल उत्पादन में से करीब 30 से 35 किलो मशरूम का इस्तेमाल पाउडर या चूर्ण बनाने के लिए किया जाता है, जबकि बाकी बचे हुए हिस्से को बाजार में साबुत ही बेच दिया जाता है। वर्तमान समय में बड़े-बड़े मॉल्स, नामी रेस्तरां और होटलों में इस मशरूम और इसके पाउडर की मांग बहुत ज्यादा बनी हुई है। यही वजह है कि खरीदार 700 रुपये प्रति किलो की दर से पाउडर और 100 रुपये प्रति किलो की दर से साबुत मशरूम को बहुत ही आसानी से हाथों-हाथ खरीद लेते हैं। इसी अनूठी बिजनेस रणनीति के बूते सुमन देवी और उनके पति मशरूम के इस कारोबार से सालाना लगभग 7 लाख रुपये तक का शानदार कारोबार सफलतापवूक कर रहे हैं।



















