बांग्लादेश के खिलाफ ऑस्ट्रेलिया की पारी और 51 रनों की शानदार जीत के बावजूद देश के पूर्व सलामी बल्लेबाज जस्टिन लैंगर का गुस्सा कम नहीं हुआ है। उन्होंने ऐसे टेस्ट मैचों की बढ़ती संख्या पर गहरी चिंता जताई है जो महज दो दिनों के भीतर ही समाप्त हो जाते हैं। हालिया मुकाबला समाप्त होने के बाद उन्होंने इस तरह के मुकाबलों को पूरी तरह से अस्वीकार्य करार दिया है। सीरीज के इस दूसरे मुकाबले में कंगारू टीम ने अपने बेहतरीन प्रदर्शन के दम पर दो मैचों की श्रृंखला को 1-1 से बराबरी पर ला दिया, लेकिन मैच का इतनी जल्दी खत्म होना क्रिकेट जगत में चर्चा का विषय बन गया है।
गेंदबाजी का शानदार प्रदर्शन और सीरीज की बराबरी
इस मुकाबले में ऑस्ट्रेलिया की ओर से तेज गेंदबाज मिचेल स्टार्क ने बेहद घातक गेंदबाजी का मुज़ाहिरा पेश किया। उन्होंने मैच की दोनों पारियों को मिलाकर कुल 10 विकेट अपने नाम किए। स्टार्क ने पहली पारी में 6 और दूसरी पारी में 4 बल्लेबाजों को पवेलियन की राह दिखाई। इस शानदार जीत की बदौलत दुनिया की शीर्ष रैंकिंग वाली टीम ऑस्ट्रेलिया ने दो मैचों की सीरीज को 1-1 से बराबर करने में कामयाबी हासिल की। हालांकि, यह मुकाबला ऑस्ट्रेलिया के पिछले सात टेस्ट मैचों में से तीसरा ऐसा मैच बन गया जो रिकॉर्ड दो दिनों के भीतर ही खत्म हो गया।
दर्शकों और वित्तीय व्यवस्था पर असर
इस पूरे मामले पर खुलकर बात करते हुए 105 टेस्ट मैच खेल चुके जस्टिन लैंगर ने सेन रेडियो पर अपनी बात रखी। उन्होंने दो-दिवसीय टेस्ट मैचों को अस्वीकार्य बताते हुए कहा कि यह खेल के हित में बिल्कुल नहीं है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि बीता हुआ साल उन तमाम दर्शकों और छोटे बच्चों के लिए बेहद निराशाजनक रहा है जो टेलीविजन पर अपने चहेते खिलाड़ियों को खेलते हुए देखते हैं, रेडियो पर कमेंट्री सुनते हैं या फिर खुद स्टेडियम में मैच का लुत्फ उठाने पहुंचते हैं। उन्होंने आर्थिक नुकसान का जिक्र करते हुए कहा कि क्रिकेट ऑस्ट्रेलिया के लिए भी यह एक बड़ी आपदा की तरह है, क्योंकि बोर्ड को मिलने वाले राजस्व का एक हिस्सा जमीनी स्तर पर क्रिकेट के विकास और निवेश में खर्च होता है।
बल्लेबाजी तकनीक में गिरावट पर चिंता
पिच या क्यूरेटर को दोष देने की प्रवृत्ति पर निशाना साधते हुए लैंगर ने कहा कि लोग अक्सर यह कहकर बात टाल देते हैं कि सब कुछ पिच की वजह से है या गेंद थोड़ी बहुत हिल रही है। बांग्लादेश की टीम अपनी दूसरी पारी में महज 95 रन पर सिमट गई, जो उनके पहले पारी के खराब स्कोर से केवल 31 रन ही बेहतर था। इसके पीछे की असली वजह बताते हुए उन्होंने कहा कि समस्या पिच की परिस्थितियों में नहीं बल्कि आधुनिक बल्लेबाजों की बुनियादी तकनीकों में आ रही भारी गिरावट में है। उन्होंने बताया कि इस मैच में भी लगभग जितनी बार बल्लेबाज आउट हुए, उनका अगला पैर क्रीज की फ्रंट लाइन से आगे बिल्कुल नहीं बढ़ा, जो सीधे तौर पर कमजोर फुटवर्क पैटर्न को दर्शाता है।
युवा खिलाड़ियों को बुनियादी बातें सिखाने की जरूरत
कोचिंग के अपने अनुभव को साझा करते हुए पूर्व दिग्गज ने कहा कि वह इन दिनों युवा खिलाड़ियों को कोचिंग दे रहे हैं और हाल ही में इंग्लैंड से लौटे हैं। उनके मुताबिक द हंड्रेड टूर्नामेंट की टीमों में शामिल कई ऐसे युवा बल्लेबाज हैं जो भविष्य में टेस्ट क्रिकेट खेलना चाहते हैं। जब उनके साथ खेल की बुनियादी तकनीकों और छोटी-छोटी बारीियों पर चर्चा की जाती है, तो उनकी प्रतिक्रिया ऐसी होती है मानो उन्हें कोई बिल्कुल नया जादू सिखाया जा रहा हो। उन्होंने साफ किया कि जब तक बल्लेबाज अपनी तकनीक और बुनियादी फुटवर्क को मजबूत नहीं करेंगे, तब तक इस तरह के जल्दी खत्म होने वाले मुकाबले क्रिकेट की खूबसूरती को प्रभावित करते रहेंगे।


















