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एनआईए अदालत ने अल-हिंद ISIS मामले में सैयद फासिउर रहमान को सुनाई 7 साल की सजाअपराध
30 अग॰ 2026, 1:06 pm (32 दिन पहले)· 3

एनआईए अदालत ने अल-हिंद ISIS मामले में सैयद फासिउर रहमान को सुनाई 7 साल की सजा

बेंगलुरु के अल-हिंद ISIS मॉड्यूल केस में एनआईए की विशेष अदालत ने अभियुक्त सैयद फासिउर रहमान को दोषी ठहराते हुए 7 साल के कठोर कारावास और 48 हजार रुपये जुर्माने का आदेश दिया है।

बेंगलुरु के चर्चित अल-हिंद आतंकी साजिश मामले में राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) की विशेष अदालत ने एक महत्वपूर्ण निर्णय सुनाया है। अदालत ने इस मामले के प्रमुख अभियुक्तों में से एक, सैयद फासिउर रहमान उर्फ सैयद फसीह उर रहमान, को दोषी पाते हुए 7 साल की कठोर कारावास की सजा निर्धारित की है। इस फैसले के साथ ही कानून प्रवर्तन एजेंसियों द्वारा प्रतिबंधित आतंकवादी संगठनों के नेटवर्क को ध्वस्त करने की दिशा में एक बड़ी सफलता मानी जा रही है।

सजा और जुर्माने का पूरा ब्योरा

विशेष एनआईए अदालत द्वारा सुनाए गए इस आदेश में कारावास की सजा के साथ-साथ दोषी सैयद फासिउर रहमान पर 48 हजार रुपये का आर्थिक जुर्माना भी लगाया गया है। अदालत ने अपने फैसले में आरोपी की गतिविधियों को गंभीर माना, जो आतंकी संगठन ISIS और Daesh के एजेंडे को आगे बढ़ाने से जुड़ी हुई थीं। सुनवाई के दौरान जांच एजेंसी द्वारा प्रस्तुत किए गए सबूतों और गवाहों के बयानों के आधार पर अदालत ने अभियुक्त को दोषी करार देते हुए यह सजा सुनाई।

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जांच एजेंसी की कार्रवाई और मामले का इतिहास

इस पूरे मामले की शुरुआत 10 जनवरी 2020 को हुई थी, जब कर्नाटक पुलिस ने बेंगलुरु में आतंकी गतिविधियों की साजिश के सिलसिले में पहली प्राथमिकी दर्ज की थी। मामले की संवेदनशीलता और अंतरराष्ट्रीय आतंकी संगठनों से जुड़ाव के इनपुट मिलने के बाद राष्ट्रीय जांच एजेंसी ने 23 जनवरी 2020 को इस केस का अधिग्रहण किया और नए सिरे से मामला दर्ज कर सघन जांच शुरू की। जांच एजेंसी ने अब तक की अपनी विस्तृत पड़ताल के बाद कुल 20 आरोपियों के खिलाफ अदालत में 3 अलग-अलग चार्जशीट दाखिल की हैं। इस मामले में अदालत का ट्रायल अक्टूबर 2025 में आधिकारिक तौर पर शुरू हुआ था। इससे पहले, 14 जुलाई 2026 को इसी मामले से जुड़े एक अन्य अभियुक्त हनीफ खान को दोषी ठहराया जा चुका है, जिसने मुकदमे की प्रक्रिया के दौरान अपना अपराध स्वीकार कर लिया था।

साजिश का मास्टरमाइंड और बैठकों का दौर

एनआईए की जांच रिपोर्ट के अनुसार, इस पूरे अल-हिंद आतंकी मॉड्यूल का मुख्य साजिशकर्ता और मास्टरमाइंड मेहबूब पाशा था। जांच एजेंसी ने पाया कि मेहबूब पाशा ने बेंगलुरु स्थित गुरप्पनापाल्या क्षेत्र में अपने निजी आवास पर कई गुप्त बैठकें आयोजित की थीं। इन बैठकों में कट्टरपंथी विचारधारा का प्रचार-प्रसार करने के साथ-साथ लक्षित हत्याओं की योजनाएं तैयार की गई थीं। जांच के मुताबिक, इन साजिशों का मुख्य उद्देश्य देश में सांप्रदायिक दंगे भड़काना, शांति भंग करना और प्रतिबंधित संगठन ISIS के खतरनाक एजेंडे को भारत में विस्तार देना था।

जंगल कैंप ट्रेनिंग और सामान की खरीदारी

जांच एजेंसी द्वारा एकत्र किए गए प्रमाणों से यह स्पष्ट हुआ है कि दोषी सैयद फासिउर रहमान मेहबूब पाशा द्वारा बुलाई गई इन साजिशी बैठकों में नियमित रूप से शामिल होता था। उसने संगठन के सदस्यों को व्यावहारिक प्रशिक्षण देने के उद्देश्य से एक प्रसिद्ध रिटेल आउटलेट डेकाथलॉन के शोरूम से टेंट और चाकू खरीदे थे। इन सामग्रियों का उपयोग अल-हिंद समूह के सदस्यों के लिए जंगल में ट्रेनिंग कैंप आयोजित करने के लिए किया जाना था। इस पूरी आतंकी योजना का अंतिम लक्ष्य भारत के भीतर ISIS अथवा Daesh का एक प्रांतीय ढांचा यानी 'विलायत' स्थापित करना था। एनआईए ने अदालत को सूचित किया है कि इस केस में आगे की जांच अभी जारी है, और एजेंसी उस मुख्य ऑनलाइन हैंडलर की पहचान करने में जुटी है जिसने इस पूरे मॉड्यूल की योजना बनाई थी।

सवाल-जवाब

अल-हिंद ISIS मामले में किस आरोपी को सजा सुनाई गई है?
विशेष एनआईए अदालत ने आरोपी सैयद फासिउर रहमान उर्फ सैयद फसीह उर रहमान को दोषी ठहराते हुए 7 साल की जेल की सजा सुनाई है।
अदालत ने आरोपी पर कितना जुर्माना लगाया है?
अदालत ने दोषी सैयद फासिउर रहमान पर 48,000 रुपये का आर्थिक जुर्माना लगाया है।
इस आतंकी साजिश का मुख्य मास्टरमाइंड कौन था?
एनआईए जांच के अनुसार बेंगलुरु के गुरप्पनापाल्या निवासी मुख्य आरोपी मेहबूब पाशा इस पूरी साजिश का मास्टरमाइंड था।
सैयद फासिउर रहमान की इस साजिश में क्या भूमिका थी?
रहमान ने साजिशी बैठकों में भाग लिया था और डेकाथलॉन शोरूम से जंगल कैंप ट्रेनिंग के लिए टेंट और चाकू खरीदे थे।
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