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केरल में जज के नाबालिग बेटे की मर्सिडीज ने स्कूटर सवार को कुचला, थाने में हेकड़ी दिखाने का आरोपअपराध
26 अक्तू॰ 2026, 12:16 am (2 घंटे पहले)· 2

केरल में जज के नाबालिग बेटे की मर्सिडीज ने स्कूटर सवार को कुचला, थाने में हेकड़ी दिखाने का आरोप

केरल में एक 17 वर्षीय नाबालिग द्वारा चलाई जा रही तेज रफ्तार मर्सिडीज कार ने 54 वर्षीय स्कूटर सवार को कुचल दिया, जिससे उनकी मौके पर ही मौत हो गई।

नई दिल्ली के बजाय तिरुवनंतपुरम से जुड़े इस दर्दनाक हादसे में 54 वर्षीय जयबालकृष्णन अपनी छोटी सी दुकान बंद कर दिनभर की थकान के बाद स्कूटर से घर लौट रहे थे। उन्हें इस बात का बिल्कुल भी अंदाजा नहीं था कि पीछे से आ रही एक तेज रफ्तार मर्सिडीज उनकी जिंदगी का सफर हमेशा के लिए खत्म कर देगी। कार की रफ्तार इतनी ज्यादा बेकाबू थी कि टक्कर इतनी जोरदार हुई कि स्कूटर के परखच्चे उड़ गए और सड़क पर चारों तरफ मलबा बिखर गया। इस खतरनाक स्टंटनुमा ड्राइविंग के पीछे कोई पेशेवर या वयस्क ड्राइवर नहीं, बल्कि एक जज का 17 साल का नाबालिग बेटा था, जिसके पास न तो ड्राइविंग लाइसेंस था और न ही सड़क पर वाहन चलाने की कोई समझ। आधी रात के इस थ्रिल ने एक पल में किसी की हंसती-खेलती जिंदगी को हमेशा के लिए शांत कर दिया।

कानून के दायरे और वीआईपी ट्रीटमेंट पर उठे गंभीर सवाल

इस पूरी घटना का सबसे हैरान करने वाला पहलू यह रहा कि इतनी भीषण टक्कर के बाद भी जब पुलिस हरकत में आई, तो आरोपी नाबालिग को जूवेनाइल जस्टिस एक्ट के प्रावधानों के तहत तुरंत जमानत मिल गई। हालांकि पुलिस ने आरोपी के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की धारा 106 के तहत लापरवाही से मौत का मामला दर्ज किया था, लेकिन इस त्वरित राहत से पीड़ित परिवार बेहद गुस्से में है। पीड़ित परिजनों का सीधा आरोप है कि जब उन्होंने थाने के भीतर संबंधित जज से यह सवाल किया कि आखिर उन्होंने अपने नाबालिग बेटे को गाड़ी चाबी क्यों सौंपी थी, तो उन्हें न्याय मिलने के बजाय الटे दुर्व्यवहार का सामना करना पड़ा। अब यह पीड़ित परिवार हर हाल में कानून की लड़ाई लड़ने और अपने प्रिय के लिए इंसाफ पाने की जिद पर अड़ा हुआ है।

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राजनीतिक हलचल और गृह मंत्री का कड़ा रुख

जैसे ही यह मामला तूल पकड़ता गया और जनता के बीच नाराजगी फैली, केरल के गृह मंत्री रमेश चेन्निथला ने इस पर कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए स्पष्ट संदेश दिया कि देश के कानून के समक्ष हर नागरिक पूरी तरह समान है। उन्होंने दो टूक शब्दों में कहा कि सड़क पर गाड़ी चढ़ाकर किसी की जान लेना किसी साधारण दुर्घटना की श्रेणी में नहीं आता, बल्कि यह हत्या से कम नहीं है। उन्होंने चेतावनी दी कि चाहे कोई कितना भी रसूखदार या ताकतवर क्यों न हो, इस गंभीर अपराध में शामिल किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा। अब सबकी निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि क्या इस मर्सिडीज के असली मालिक यानी उस जज साहब पर भी कोई प्रशासनिक या कानूनी कार्रवाई होती है या फिर यह फाइलें सरकारी दफ्तरों में ही दबकर रह जाएंगी।

सवाल-जवाब

यह हादसा कहां और कब हुआ?
यह हादसा केरल में आधी रात के समय हुआ जब पीड़ित अपनी दुकान बंद करके घर लौट रहा था।
मर्सिडीज कार कौन चला रहा था?
कार को एक जज का 17 साल का नाबालिग बेटा चला रहा था जिसके पास लाइसेंस नहीं था।
हादसे के बाद आरोपी का क्या हुआ?
पुलिस ने मामला दर्ज किया लेकिन नाबालिग होने के कारण उसे जूवेनाइल जस्टिस एक्ट के तहत तुरंत जमानत मिल गई।
पीड़ित परिवार का पुलिस थाने में क्या अनुभव रहा?
परिवार का आरोप है कि थाने में जज से सवाल पूछने पर उन्हें बुरा बर्ताव सहना पड़ा।
इस मामले पर केरल के गृह मंत्री ने क्या कहा?
गृह मंत्री रमेश चेन्निथला ने कहा कि किसी को भी बख्शा नहीं जाएगा क्योंकि कानून के आगे सब बराबर हैं।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 5

Pooja Bhatt@pooja-bhatt·10 मिनट पहले

एक बेकसूर इंसान की जान जाने के बाद भी ऐसी रसूखदारी देखना बेहद डरावना है। जब कानून के रखवाले ही बच्चों को बिना लाइसेंस गाड़ियां थमाएंगे और थाने में धौंस जमाएंगे, तो आम आदमी की सुरक्षा की उम्मीद किससे करें?

Ananya Iyer@ananya-iyer·28 मिनट पहले

कानून सबके लिए बराबर होना चाहिए, चाहे पिता जज हों या कोई आम इंसान। एक बेकसूर की जान चली गई और आरोपी को तुरंत जमानत मिल गई, यह देखकर बहुत गुस्सा आता है। इंसाफ मिलना ही चाहिए।

Riya Menon@riya-menon·27 मिनट पहले

अन्नाय, बिल्कुल सही कहा आपने! उस 17 साल के लड़के को गाड़ी की चाबी देने वाले पिता पर भी उतनी ही कार्रवाई होनी चाहिए।

Karan Malhotra@karan-malhotra·49 मिनट पहले

कानून सबके लिए बराबर होना चाहिए, फिर चाहे जज का बेटा हो या आम आदमी। थाने में ऐसी हेकड़ी बर्दाश्त नहीं होनी चाहिए।

Divya Reddy@divya-reddy·49 मिनट पहले

करन जी, बिल्कुल सही बात है। पर क्या उस जज पर भी कोई कार्रवाई होगी जिसकी गाड़ी उस नाबालिग चला रहा था?

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