नई दिल्ली के बजाय तिरुवनंतपुरम से जुड़े इस दर्दनाक हादसे में 54 वर्षीय जयबालकृष्णन अपनी छोटी सी दुकान बंद कर दिनभर की थकान के बाद स्कूटर से घर लौट रहे थे। उन्हें इस बात का बिल्कुल भी अंदाजा नहीं था कि पीछे से आ रही एक तेज रफ्तार मर्सिडीज उनकी जिंदगी का सफर हमेशा के लिए खत्म कर देगी। कार की रफ्तार इतनी ज्यादा बेकाबू थी कि टक्कर इतनी जोरदार हुई कि स्कूटर के परखच्चे उड़ गए और सड़क पर चारों तरफ मलबा बिखर गया। इस खतरनाक स्टंटनुमा ड्राइविंग के पीछे कोई पेशेवर या वयस्क ड्राइवर नहीं, बल्कि एक जज का 17 साल का नाबालिग बेटा था, जिसके पास न तो ड्राइविंग लाइसेंस था और न ही सड़क पर वाहन चलाने की कोई समझ। आधी रात के इस थ्रिल ने एक पल में किसी की हंसती-खेलती जिंदगी को हमेशा के लिए शांत कर दिया।
कानून के दायरे और वीआईपी ट्रीटमेंट पर उठे गंभीर सवाल
इस पूरी घटना का सबसे हैरान करने वाला पहलू यह रहा कि इतनी भीषण टक्कर के बाद भी जब पुलिस हरकत में आई, तो आरोपी नाबालिग को जूवेनाइल जस्टिस एक्ट के प्रावधानों के तहत तुरंत जमानत मिल गई। हालांकि पुलिस ने आरोपी के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की धारा 106 के तहत लापरवाही से मौत का मामला दर्ज किया था, लेकिन इस त्वरित राहत से पीड़ित परिवार बेहद गुस्से में है। पीड़ित परिजनों का सीधा आरोप है कि जब उन्होंने थाने के भीतर संबंधित जज से यह सवाल किया कि आखिर उन्होंने अपने नाबालिग बेटे को गाड़ी चाबी क्यों सौंपी थी, तो उन्हें न्याय मिलने के बजाय الटे दुर्व्यवहार का सामना करना पड़ा। अब यह पीड़ित परिवार हर हाल में कानून की लड़ाई लड़ने और अपने प्रिय के लिए इंसाफ पाने की जिद पर अड़ा हुआ है।
राजनीतिक हलचल और गृह मंत्री का कड़ा रुख
जैसे ही यह मामला तूल पकड़ता गया और जनता के बीच नाराजगी फैली, केरल के गृह मंत्री रमेश चेन्निथला ने इस पर कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए स्पष्ट संदेश दिया कि देश के कानून के समक्ष हर नागरिक पूरी तरह समान है। उन्होंने दो टूक शब्दों में कहा कि सड़क पर गाड़ी चढ़ाकर किसी की जान लेना किसी साधारण दुर्घटना की श्रेणी में नहीं आता, बल्कि यह हत्या से कम नहीं है। उन्होंने चेतावनी दी कि चाहे कोई कितना भी रसूखदार या ताकतवर क्यों न हो, इस गंभीर अपराध में शामिल किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा। अब सबकी निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि क्या इस मर्सिडीज के असली मालिक यानी उस जज साहब पर भी कोई प्रशासनिक या कानूनी कार्रवाई होती है या फिर यह फाइलें सरकारी दफ्तरों में ही दबकर रह जाएंगी।
























