राजस्थान के नागौर में बेहिसाब ब्याज वसूली और बंधक रखे जेवरात न लौटाने के एक संगीन मामले ने हर किसी को झकझोर कर रख दिया है। कोतवाली पुलिस स्टेशन के तहत आने वाली व्यास कॉलोनी के बाशिंदे 54 वर्षीय प्रेमप्रकाश बिहानी, जो स्वर्गीय मांगीलाल के बेटे हैं, सूदखोरों की कथित प्रताड़ना के चलते गहरे संकट में घिर गए। दबाव इतना भीषण था कि उन्होंने बीते महीने अपनी जीवनलीला समाप्त करने की कोशिश की। सेहत में थोड़ा सुधार दिखने के बाद अब जाकर थाने में औपचारिक शिकायत दर्ज कराई गई है, जिस पर पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता के सेक्शन 318(4) और 316(2) में एफआईआर दर्ज कर तफ्तीश आगे बढ़ाई है।
पुराने कारोबार में नुकसान के बाद खड़ा हुआ नया संकट
पीड़ित प्रेमप्रकाश बिहानी के मुताबिक, किसी जमाने में वह पान-मेथी का बड़ा व्यापार संचालित करते थे। वक्त का पहिया ऐसा घूमा कि उस काम में उनको भारी घाटा झेलना पड़ा, जिसके चलते पुश्तैनी जायदाद, जमीन और मकान तक बेचने की नौबत आ गई। पाई-पाई के मोहताज होने के बाद परिवार की गुजर-बसर चलाने और नए सिरे से फास्ट फूड का स्टॉल जमाने के लिए उन्होंने शहर के कुछ स्थानीय साहूकारों से हाथ फैलाए। इस दौरान उन्होंने कुल मिलाकर करीब 15 से 16 लाख रुपयों का कर्ज उठाया था। इस राशि में लक्ष्मण गौड़ के 11 लाख, अर्जुन गौड़ के 8.50 लाख, आकाश तिवारी के 1.50 लाख, निखिल कच्छावा के 4 लाख और पवन सोनी के 9 लाख रुपये शामिल थे।
गिरवी सोने पर नजर और मूल रकम में बेतहाशा इजाफा
कर्ज जुटाने के क्रम में पीड़ित ने निखिल कच्छावा को अमानत के तौर पर ब्लैंक चेक सौंपे थे। वहीं पवन सोनी से ली गई रकम के एवज में लगभग 6 तोला स्वर्ण आभूषण बंधक रखे गए थे, जिनमें सोने का नेकलेस, गले की चेन, सात चूड़ियां, मंगलसूत्र, पेंडेंट, कान के झुमके तथा ब्रेसलेट जैसे जेवर शामिल थे। प्रेमप्रकाश का कहना है कि पवन सोनी से लिए 9 लाख में से 6 लाख रुपये वह वापस लौटा भी चुके थे। लेकिन जब सर्राफा बाजार में सोने के भाव आसमान छूने लगे, तो आरोपियों का इरादा बदल गया और उन्होंने गहने वापस देने से साफ मना कर दिया। उल्टे चक्रवृद्धि ब्याज और मनमाने जुर्माने जोड़कर 16 लाख की रकम को सीधे 50 से 60 लाख रुपये तक पहुंचा दिया गया और दस गुना वसूली के लिए दबाव बनाया जाने लगा।
कचहरी बुलाकर कोरे पन्नों पर दस्तखत कराने का आरोप
पीड़ित का कहना है कि इस गिरोह में शामिल राजेश सांखला और लोकेश सांखला ने उन्हें किसी बहाने से कचहरी परिसर बुलाया। वहां धोखे में रखकर और बिना पढ़ने का मौका दिए उनसे खाली कागजों पर जबरन हस्ताक्षर करवा लिए गए। इसके उपरांत मोबाइल पर लगातार कॉल कर जान से मारने और आशियाने को हथिया लेने की चेतावनियां दी जाने लगीं। इन धमकियों की वजह से पीड़ित का घर की दहलीज लांघना तक मुहाल हो गया था और वह हर पल खौफ के साए में जीने लगे।
अस्पताल में उपचार और पुलिस की कानूनी कार्रवाई
लगातार मानसिक दबाव और जिल्लत के चलते 23 अगस्त को पीड़ित ने खौफनाक कदम उठाते हुए आत्महत्या की कोशिश की। गंभीर हालत में परिजन तुरंत उन्हें लेकर जोधपुर के एक अस्पताल पहुंचे, जहां डॉक्टरों की देखरेख में उनका लंबा इलाज चला। अवसाद की चपेट में होने के चलते वह निरंतर दवाइयों पर हैं। इसी इलाज और भागदौड़ की वजह से पुलिस में तत्काल रपट नहीं लिखवाई जा सकी। आखिरकार 25 सितंबर को जब वह थोड़ा संभले, तो सीधे थाने पहुंचकर अपनी पीड़ा पुलिस के सामने रखी। कोतवाली थाने के प्रभारी नंदलाल रिणवा के मुताबिक, पीड़ित ने ली गई उधारी समय-समय पर चुकाई थी, मगर आरोपियों ने 10 से 20 प्रतिशत तक का अत्यधिक ब्याज वसूला। थानेदार के अनुसार एएसआई रामकैलाश को जांच का जिम्मा सौंपा गया है और लक्ष्मण गौड़, अर्जुन गौड़, निखिल कच्छावा, पवन सोनी, राजेश सांखला, लोकेश सांखला तथा आकाश तिवारी के खिलाफ सबूत जुटाकर जल्द गिरफ्तारी अमल में लाई जाएगी।



















