सोशल मीडिया की चकाचौंध के पर्दे के पीछे किस तरह देश की सुरक्षा को चुनौती दी जा रही थी, इसका एक खौफनाक सच सामने आया है। राष्ट्रीय जांच एजेंसी ने एक बेहद संवेदनशील मामले में बड़ी कार्रवाई करते हुए विजयवाड़ा की विशेष अदालत में नौ आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल कर दी है। जांच में यह बात सामने आई है कि सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स का इस्तेमाल करके युवाओं का ब्रेनवॉश किया जा रहा था और उन्हें प्रतिबंधित संगठनों की विचारधारा से जोड़ा जा रहा था। इस पूरे प्रकरण ने सुरक्षा एजेंसियों को भी चौंका दिया है, क्योंकि साजिश सिर्फ विचारों को प्रभावित करने तक सीमित नहीं थी, बल्कि इसके तार एक बड़े आतंकवादी षड्यंत्र से जुड़े हुए थे।
आईएसआईएस की विचारधारा और इंस्टाग्राम का दुरुपयोग
जांच के दौरान जो तथ्य हाथ लगे हैं, वे बताते हैं कि आरोपी प्रतिबंधित संगठन आईएसआईएस के समर्थक थे और देश के भीतर अपनी जड़ें मजबूत करने की कोशिश कर रहे थे। इसके लिए उन्होंने इंस्टाग्राम जैसे लोकप्रिय माध्यमों को अपना हथियार बनाया और उन युवाओं को विशेष रूप से निशाना बनाया जो आसानी से प्रभावित हो जाते थे। इन सभी का मुख्य उद्देश्य भारत में हिंसक गतिविधियों को अंजाम देना और देश की संप्रभुता को गंभीर रूप से आहत करना था। युवाओं को बहला-फुसलाकर उन्हें कट्टरपंथी विचारधारा में धकेला जा रहा था ताकि वे भविष्य में देश विरोधी गतिविधियों का हिस्सा बन सकें।
हथियार, विस्फोटक और गुप्त संवाद के लिए नया ऐप
साजिश का दायरा केवल वर्चुअल दुनिया तक ही सीमित नहीं था, बल्कि इसे मैदानी स्तर पर उतारने की पूरी तैयारी चल रही थी। पकड़े गए आरोपियों ने अपनी बातचीत को एजेंसियों की नजरों से छिपाने के लिए एक विशेष सिक्योर कम्युनिकेशन एप्लिकेशन भी विकसित किया था और उसका परीक्षण किया था। इसके अलावा, योजना के तहत युवाओं को हथियार चलाने और विस्फोटक बनाने का प्रशिक्षण देने की भी रूपरेखा तैयार की गई थी। इन गंभीर अपराधों को देखते हुए राष्ट्रीय जांच एजेंसी ने आरोपियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता और सख्त गैरकानूनी गतिविधियां निवारण अधिनियम यानी यूएपीए की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज किया है।
जांच का दायरा और अब तक हुई गिरफ्तारियां
इस पूरे मामले की शुरुआत तेईस मार्च दो हजार छब्बीस को विजयवाड़ा के विजयवाड़ा-द्वितीय टाउन पुलिस स्टेशन में दर्ज एफआईआर संख्या अट्ठानवे के साथ हुई थी। मामले की गंभीरता को भांपते हुए बाद में इसकी कमान केंद्रीय एजेंसी को सौंप दी गई और इसे आरसी-शून्य एक/दो हजार छब्बीस/एनआईए/वीएसकेपी के रूप में दर्ज किया गया। एजेंसी के अनुसार इस नेटवर्क से जुड़े अब तक कुल ग्यारह लोगों और एक बाल अपचारी को पकड़ा जा चुका है। इस पूरे षड्यंत्र में शामिल अन्य संदिग्ध चेहरों की तलाश और उनकी संलिप्तता की पुष्टि के लिए देश के विभिन्न ठिकानों पर लगातार दबिश दी जा रही है।



















