महाराष्ट्र के छत्रपति संभाजीनगर स्थित वालुज क्षेत्र की खावड्या पहाड़ियों पर हुई तीन लोगों की दुखद मौत के मामले में पुलिस की छानबीन अब अपने अंतिम दौर में पहुंच गई है। शुरुआती दिनों में इस पूरी घटना को लेकर कई तरह की अफवाहें और अनसुलझे सवाल तैर रहे थे, जिससे इलाके में तरह-तरह के कयास लगाए जा रहे थे। हालांकि, एमआईडीसी वालुज पुलिस द्वारा मृतक चंदगुडे परिवार के निकट संबंधियों के बयान दर्ज किए जाने के बाद अब किसी आपराधिक साजिश या बाहरी व्यक्ति के शामिल होने की आशंका पूरी तरह से खत्म हो गई है। पुलिस अधिकारियों के अनुसार परिवार के किसी भी सदस्य ने किसी के खिलाफ कोई शिकायत दर्ज नहीं कराई है, जिससे मामले में किसी नए मोड़ की संभावना ना के बराबर रह गई है।
पुलिस की विस्तृत पूछताछ और परिवार में आंतरिक अनबन
इस बहुचर्चित मामले की तह तक पहुंचने के लिए एमआईडीसी वालुज पुलिस ने बेहद गहनता से जांच प्रक्रिया को आगे बढ़ाया। वरिष्ठ पुलिस निरीक्षक रामेश्वर गाडे के नेतृत्व में पुलिस टीम ने मृतक दंपत्ति मुरलीधर चंदगुडे और संगीता चंदगुडे के पारिवारिक पृष्ठभूमि की पड़ताल की। इस दौरान पुलिस ने दोनों पक्षों के परिजनों से लंबी पूछताछ की, जिसमें मुरलीधर और संगीता की तीन-तीन बहनों के विस्तृत बयान दर्ज किए गए। इन बयानों के विश्लेषण से यह स्पष्ट रूप से सामने आया कि चंदगुडे परिवार के भीतर लंबे समय से आपसी मनमुटाव और मतभेद चल रहे थे।
पुलिस अधिकारियों ने बताया कि दोनों ही पक्षों के परिजनों ने एक-दूसरे पर कोई भी आरोप लगाने या औपचारिक शिकायत दर्ज कराने से पूरी तरह इंकार कर दिया है। रिश्तेदारों का कहना है कि उस दिन पहाड़ी पर वास्तव में क्या परिस्थितियां बनीं और घटना का असली कारण क्या था, यह सिर्फ वही तीनों मृत व्यक्ति जानते थे जो अब इस दुनिया में नहीं हैं। परिजनों द्वारा किसी के खिलाफ संदेह न जताए जाने के कारण पुलिस अब उपलब्ध बयानों और परिस्थितियों के आधार पर ही जांच को अंतिम रूप दे रही है।
कल्याणी का दावा: आत्महत्या नहीं बल्कि एक दर्दनाक हादसा
मामले में सबसे महत्वपूर्ण और नया पहलू मृतक संगीता की छोटी बहन कल्याणी के बयान से सामने आया है। जहां शुरुआती चर्चाओं में इस घटना को सामूहिक आत्महत्या के रूप में देखा जा रहा था, वहीं कल्याणी ने अपने बयान में एक बिल्कुल अलग परिदृश्य पेश किया है। कल्याणी का दावा है कि खावड्या पहाड़ियों पर हुई यह घटना कोई आत्महत्या नहीं, बल्कि एक अचानक हुआ भयानक हादसा थी। उनके अनुसार, परिवार का बेटा कुणाल अपने माता-पिता के बीच जारी मतभेदों को सुलझाने और उन्हें दोबारा एक साथ लाने के लिए बेहद गंभीर प्रयास कर रहा था।
कल्याणी के मुताबिक, कुणाल अपने माता-पिता को भावनात्मक रूप से समझाने और आपसी कड़वाहट को दूर करने के इरादे से ही उस दिन खावड्या पहाड़ी पर गया था। वहां उसके पिता मुरलीधर भी बातचीत करने और मामला सुलझाने के लिए पहुंचे थे। कल्याणी का कहना है कि पहाड़ी की ढलान पर बातचीत के दौरान अचानक किसी का पैर फिसल गया या संतुलन बिगड़ गया। इसके बाद एक-दूसरे को गिरने से बचाने की हड़बड़ी और कोशिश में तीनों लोग हादसे का शिकार हो गए। हालांकि, पुलिस प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि यह केवल संगीता की बहन कल्याणी का व्यक्तिगत दावा है और इसे आधिकारिक जांच निष्कर्ष के रूप में नहीं लिया जा रहा है।
पिछले साल की गलतफहमी और अफवाहों का सच
घटना के तुरंत बाद स्थानीय स्तर पर ऐसी अफवाहें भी फैली थीं कि कुणाल पहले से ही तनाव में था और आत्महत्या के इरादे से पहाड़ी पर गया था। लेकिन उसकी मौसी कल्याणी ने इन तमाम चर्चाओं का खंडन करते हुए पिछले साल घटी एक घटना का उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि पिछले वर्ष कुणाल कुछ समय के लिए मानसिक शांति की तलाश में अपने घर से निकला था। उस समय उसने अपनी मां संगीता को मोबाइल पर मैसेज भेजकर सूचित भी किया था कि वह पूरी तरह सुरक्षित है और थोड़ा समय अकेले बिताना चाहता है।
उस समय संगीता अपने बेटे का मैसेज तुरंत नहीं देख पाई थीं, जिससे वह अत्यधिक घबरा गईं और अनहोनी की आशंका में तुरंत चिकल्थाना पुलिस स्टेशन पहुंच गईं। हालांकि, उसी रात लगभग 11 बजे चिकल्थाना पुलिस स्टेशन में पूरी स्थिति साफ हो गई और यह बात सामने आई कि पूरा मामला केवल एक गलतफहमी के कारण हुआ था। कल्याणी ने कहा कि उस पुरानी घटना को मौजूदा हादसे से जोड़कर गलत कयास लगाए जा रहे थे, जबकि कुणाल का इरादा हमेशा अपने परिवार को जोड़ने का ही था।
पुलिस जांच का अंतिम निष्कर्ष और वर्तमान स्थिति
एमआईडीसी वालुज पुलिस स्टेशन के वरिष्ठ पुलिस निरीक्षक रामेश्वर गाडे और उनकी जांच टीम ने चंदगुडे परिवार के करीबी लोगों, रिश्तेदारों और पड़ोसियों के बयान दर्ज करने का काम पूरा कर लिया है। चूंकि परिवार की तरफ से किसी भी व्यक्ति या संदिग्ध पर कोई एफआईआर या शिकायत दर्ज नहीं कराई गई है, इसलिए पुलिस जांच में कोई आपराधिक साजिश या बाहरी तत्व का हस्तक्षेप सामने नहीं आया है। शुरुआती जांच में उठे तमाम संदेह और सस्पेंस अब धीरे-धीरे शांत हो चुके हैं।
पुलिस का मानना है कि यह पूरा मामला पारिवारिक अनबन और मौके पर बने विषम हालात के इर्द-गिर्द ही सीमित है। किसी नए साक्ष्य या शिकायत के अभाव में पुलिस अपनी जांच रिपोर्ट तैयार कर मामले को औपचारिक रूप से बंद करने की प्रक्रिया में जुटी है। इस तरह खावड्या पहाड़ियों पर तीन लोगों की मौत का यह मामला पारिवारिक त्रासदी के रूप में सामने आया है, जिसमें अब किसी नए मोड़ की संभावना समाप्त हो चुकी है।



















