असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने पर्यावरण-अनुकूल और टिकाऊ गतिशीलता को बढ़ावा देने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाते हुए बांस से तैयार की गई नई साइकिल का अनावरण किया है। इस अनूठी पहल का मुख्य उद्देश्य राज्य में बांस पर आधारित नवाचारों को प्रोत्साहित करना और आधुनिक उपयोग के लिए इस प्राकृतिक संसाधन की क्षमता को सबके सामने लाना है।
ब्रह्मपुत्र रिवरफ्रंट पर मिलेगी टेस्ट राइड की सुविधा
मुख्यमंत्री ने घोषणा की कि इस बांस निर्मित साइकिल को आगामी दो अक्टूबर से गुवाहाटी के ब्रह्मपुत्र रिवरफ्रंट पर आम जनता के प्रदर्शन के लिए रखा जाएगा। इस पहल के तहत साइकिल प्रेमियों और आम आगंतुकों को आमंत्रित किया गया है ताकि वे इस नए उत्पाद का खुद अनुभव कर सकें और इसके डिजाइन तथा निर्माण प्रक्रिया से रूबरू हो सकें। अधिकारियों का मानना है कि इस सार्वजनिक प्रदर्शन से लोगों को इस बात की बेहतर समझ मिलेगी कि कैसे बांस का उपयोग आधुनिक और टिकाऊ उत्पादों के निर्माण में किया जा सकता है।
प्रधानमंत्री के विजन को आगे बढ़ाने का प्रयास
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर अपनी बात रखते हुए मुख्यमंत्री ने इस बात पर जोर दिया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा बांस को घास की श्रेणी में शामिल करने के ऐतिहासिक सुधार ने राज्य में आजीविका और हरित उद्योगों के लिए नए रास्ते खोले हैं। उन्होंने कहा कि आज सरकार उसी विजन को आगे बढ़ाते हुए इस बांस से बनी साइकिल को जनता के सामने लेकर आई है। इस नीतिगत बदलाव के बाद से पूर्वोत्तर क्षेत्र में बांस आधारित अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं, जिससे स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर सृजित हो रहे हैं।
बांस आधारित अर्थव्यवस्था को मिलेगा नया विस्तार
असम और पूरे पूर्वोत्तर भारत में बांस पारंपरिक रूप से हस्तशिल्प, फर्नीचर निर्माण और विभिन्न प्रकार के निर्माण कार्यों में बड़े पैमाने पर उपयोग किया जाता रहा है। राज्य सरकार लगातार ऐसे उद्यमों और नवाचारों को समर्थन दे रही है जो इस संसाधन के मूल्य में वृद्धि कर सकें। इस नई साइकिल के माध्यम से सरकार यह साबित करना चाहती है कि स्थानीय रूप से प्रचुर मात्रा में उपलब्ध इस सामग्री का उपयोग आधुनिक और पर्यावरण के अनुकूल उत्पादों को तैयार करने के लिए प्रभावी ढंग से किया जा सकता है।



















