तमिलनाडु के 69 वर्षीय शातिर ठग बिंग्सन जॉन के लंबे आपराधिक सफर पर विराम लगाते हुए रायपुर पुलिस की एंटी-क्राइम एंड साइबर यूनिट ने उसे ओडिशा की राजधानी भुवनेश्वर से गिरफ्तार कर लिया है। आरोपी पर देश के विभिन्न राज्यों में फैले लगभग 300 से अधिक लग्जरी और प्रीमियम होटलों को अपनी योजनाबद्ध धोखाधड़ी का शिकार बनाने का संगीन आरोप है। जुलाई 2026 के शुरुआती दिनों में हुई इस नाटकीय गिरफ्तारी के साथ ही 1990 से चले आ रहे एक ऐसे अनोखे अपराध चक्र का पर्दाफाश हुआ है, जिसमें आरोपी फर्जी दस्तावेजों, बदलती पहचान और बेहतरीन अंग्रेजी भाषा के बल पर लगातार पांच सितारा परिसरों को चूना लगाता रहा। रायपुर स्थित प्रसिद्ध हयात होटल में अंजाम दी गई हालिया वारदात के बाद सक्रिय हुई पुलिस टीम ने 72 घंटे के भीतर तकनीकी निगरानी के जरिए आरोपी का सुराग लगा लिया और चोरी हुए कीमती लैपटॉप के साथ उसे दबोच लिया। पूछताछ के दौरान आरोपी ने स्वीकार किया कि तिहाड़ जेल में रहने के दौरान वह अंतरराष्ट्रीय अपराधी चार्ल्स शोभराज के तौर-तरीकों से बेहद प्रभावित हुआ था, जिसके बाद उसने फर्जी पहचान और आत्मविश्वास को ही अपना मुख्य हथियार बना लिया।
रायपुर के हयात होटल में हुई ठगी और चोरी का पूरा घटनाक्रम
घटनाक्रम का पूरा ब्योरा देते हुए तेलीबांधा थाना पुलिस ने बताया कि बिंग्सन जॉन ने 25 जून 2026 को रायपुर के प्रीमियम हयात होटल में प्रवेश किया था। होटल प्रबंधन के समक्ष उसने खुद को एक बड़ा अंतरराष्ट्रीय इवेंट ऑर्गनाइजर बताकर कमरे की बुकिंग कराई और चेक-इन की कागजी प्रक्रिया पूरी की थी। अपने परिष्कृत व्यवहार, आकर्षक पहनावे और फर्राटेदार अंग्रेजी के कारण वह होटल कर्मचारियों का विश्वास जीतने में पूरी तरह सफल रहा। दो दिनों तक होटल के आलीशान कमरे में ठहरने, महंगे खान-पान का आनंद लेने और अन्य सेवाओं का लुत्फ उठाने के बाद 27 जून 2026 की सुबह आरोपी अपने दो बैगों के साथ बिना चेक-आउट किए चुपचाप परिसर से रफूचक्कर हो गया। उसके अचानक गायब होने के बाद जब काउंटर पर जांच की गई तो 63,755 रुपये का होटल बिल अनपेक्षित पाया गया।
यह मामला केवल अनपेक्षित होटल बिल तक ही सीमित नहीं रहा। आरोपी ने होटल परिसर में अपने प्रवास के दौरान व्यावसायिक आवश्यकता का हवाला देकर प्रबंधन से लगभग 1.48 लाख रुपये की कीमत का एक प्रीमियम लैपटॉप अस्थायी इस्तेमाल के लिए मांगा था। चेक-आउट किए बिना भागते समय वह इस महंगे लैपटॉप को भी अपने साथ ले उड़ा। घटना का खुलासा होने के बाद हयात होटल के सुरक्षा प्रभारी सूरज सिंह ने तत्काल तेलीबांधा थाने में लिखित शिकायत दर्ज कराई। पुलिस ने मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए भारतीय न्याय संहिता की संबंधित आपराधिक धाराओं के तहत एफआईआर दर्ज कर आगे की जांच शुरू कर दी।
72 घंटे का साइबर सर्विलांस और भुवनेश्वर से गिरफ्तारी
सुरक्षा प्रभारी की लिखित शिकायत मिलते ही रायपुर पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों ने एंटी-क्राइम एंड साइबर यूनिट की एक विशेष जांच टीम का गठन किया। जांच अधिकारियों ने सबसे पहले हयात होटल के चेक-इन रजिस्टर, आरोपी द्वारा जमा किए गए फर्जी पहचान पत्रों और उसके द्वारा इस्तेमाल किए गए मोबाइल नंबरों का तकनीकी विश्लेषण शुरू किया। सीसीटीवी फुटेज और साइबर सर्विलांस डेटा की मदद से आरोपी की लोकेशन का पता लगाया गया। जांच में यह स्पष्ट हुआ कि आरोपी रायपुर से निकलकर पड़ोसी राज्य ओडिशा की ओर भागा है और भुवनेश्वर में छिपा हुआ है।
तकनीकी साक्ष्यों और लोकेशन ट्रेसिंग के आधार पर रायपुर पुलिस की टीम ने बिना समय गंवाए भुवनेश्वर में दबिश दी। घटना की एफआईआर दर्ज होने के महज 72 घंटे के भीतर पुलिस ने बिंग्सन जॉन को उसके गुप्त ठिकाने से धर दबोचा। तलाशी के दौरान पुलिस ने उसके कब्जे से हयात होटल से चोरी किया गया 1.48 लाख रुपये मूल्य का लैपटॉप भी बरामद कर लिया। प्राथमिक पूछताछ में आरोपी ने हयात होटल की वारदात में अपनी संलिप्तता स्वीकार कर ली। इसके बाद पुलिस टीम आरोपी को ट्रांजिट रिमांड पर रायपुर ले आई, जहां उसे स्थानीय अदालत में पेश कर न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया।
चार्ल्स शोभराज का प्रभाव और ठगी के तरीके का विकास
पुलिस हिरासत में हुई गहन पूछताछ के दौरान बिंग्सन जॉन ने अपनी जीवन शैली और आपराधिक मानसिकता से जुड़े कई चौंकाने वाले खुलासे किए। आरोपी ने बताया कि 1990 के दशक की शुरुआत में उसकी मंगेतर की असमय मौत हो गई थी। इस व्यक्तिगत त्रासदी के बाद उसने कभी शादी न करने का फैसला किया और अपराध की राह चुन ली। तिहाड़ जेल में अपनी सजा काटने के दौरान उसकी मुलाकात कई शातिर अपराधियों से हुई, जहां उसने कुख्यात अंतरराष्ट्रीय ठग चार्ल्स शोभराज के कारनामों के बारे में सुना। शोभराज के व्यक्तित्व, उच्च आत्मविश्वास और लोगों को प्रभावित करने की कला से सीख लेकर उसने होटल उद्योग को निशाना बनाने की योजना बनाई।
बिंग्सन जॉन की कार्यशैली बेहद सुनियोजित होती थी। वह हर शहर में एक नई फर्जी पहचान के साथ दाखिल होता था। कभी वह खुद को विदेशी पर्यटकों का गाइड बताता, कभी अंग्रेजी का शिक्षक, कभी योगा इंस्ट्रक्टर तो कभी कॉरपोरेट इवेंट ऑर्गनाइजर के रूप में पेश करता था। उसका शांत व्यवहार, प्रभावशली बात करने का अंदाज और परिधान ऐसे होते थे कि कोई भी होटल कर्मचारी उस पर संदेह नहीं करता था। वह कर्मचारियों को बेहतर नौकरी दिलाने का लालच देकर उनका भरोसा गहरा कर लेता था। पूछताछ के दौरान उसने मजाकिया लहजे में जेल को अपना 'होम स्टे' और देश के 300 से अधिक लग्जरी होटलों को अपना 'टूरिस्ट डेस्टिनेशन' करार दिया।
36 सालों का आपराधिक रिकॉर्ड और 15 वर्ष की जेल यात्रा
बिंग्सन जॉन का पुलिस रिकॉर्ड खंगालने पर पता चला कि उसका आपराधिक इतिहास करीब साढ़े तीन दशक पुराना है। पुलिस दस्तावेजों के अनुसार, उसकी पहली गिरफ्तारी वर्ष 1996 में हुई थी। इसके बाद से अब तक वह अपने जीवन के लगभग 15 वर्ष देश की विभिन्न जेलों में गुजार चुका है, जिनमें दिल्ली की कुख्यात तिहाड़ जेल भी शामिल है। उसके खिलाफ देश के कम से कम नौ राज्यों में धोखाधड़ी और चोरी के दर्जनों आपराधिक मामले दर्ज हैं। इन राज्यों में दिल्ली, मुंबई, गोवा, केरल, कर्नाटक, तेलंगाना, झारखंड, पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु शामिल हैं।
इससे पूर्व वर्ष 2022 में भी केरल पुलिस ने उसे एक नामी फाइव-स्टार होटल का भारी-भरकम बिल चुकाए बिना भागने के आरोप में गिरफ्तार किया था। जेल से छूटने के बाद वह पुनः अपनी पुरानी आदतों की ओर लौट जाता था और नए शहरों के महंगे होटलों को निशाना बनाने लगता था। रायपुर पुलिस अब देश भर के विभिन्न राज्यों की पुलिस से संपर्क स्थापित कर बिंग्सन जॉन के खिलाफ दर्ज पुराने मामलों का पूरा रिकॉर्ड जुटा रही है। जांच अधिकारियों का मानना है कि न्यायिक प्रक्रिया आगे बढ़ने के साथ उसके 36 साल लंबे आपराधिक नेटवर्क से जुड़े कई अन्य अनसुलझे मामलों की पर्त भी खुल सकती है।


















