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जैविक खेती में देश का नंबर वन राज्य बनने की राह पर मेघालय, विधानसभा में मुख्यमंत्री कोनराड संगमा ने दी खाद कालाबाजारी पर चेतावनीमेघालय
27 अग॰ 2026, 3:39 pm (1 घंटे पहले)· 4

जैविक खेती में देश का नंबर वन राज्य बनने की राह पर मेघालय, विधानसभा में मुख्यमंत्री कोनराड संगमा ने दी खाद कालाबाजारी पर चेतावनी

मेघालय को देश का सबसे बड़ा जैविक खेती वाला राज्य बनाने के लिए सरकार ने रासायनिक खादों पर निर्भरता घटाने और बायो-फर्टिलाइजर को बढ़ावा देने की योजना बनाई है। मुख्यमंत्री कोनराड संगमा ने विधानसभा में स्पष्ट किया कि खाद की कालाबाजारी रोकने के लिए 1,432 औचक निरीक्षण किए गए हैं।

मेघालय देश में सबसे बड़े जैविक खेती वाले राज्य के रूप में उभरने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। राज्य सरकार का मुख्य उद्देश्य रासायनिक उर्वरकों पर किसानों की निर्भरता को पूरी तरह खत्म करना और बायो-फर्टिलाइजर के इस्तेमाल को बढ़ावा देना है। गुरुवार को राज्य विधानसभा के सत्र के दौरान मुख्यमंत्री कोनराड के संगमा ने यह स्पष्ट किया कि सरकार की प्राथमिकता कृषि क्षेत्र को पूरी तरह रसायन मुक्त बनाने की है। विधानसभा कार्यवाही के दौरान सरकार ने एक व्यापक रणनीति पेश की, जिसमें रियायती दरों पर मिलने वाले खाद की कालाबाजारी रोकने, सख्त निगरानी रखने और पड़ोसी क्षेत्रों में इसकी तस्करी पर लगाम लगाने के उपाय शामिल हैं।

उर्वरक की कीमतें, सब्सिडी और विधानसभा में उठा मुद्दा

विधानसभा में यह चर्चा उस समय शुरू हुई जब वॉइस ऑफ द पीपुल पार्टी (वीपीपी) के अध्यक्ष और नोंगक्रेम से विधायक अर्डेंट मिलर बसाईआवामोइत ने किसानों से जुड़ी एक गंभीर समस्या उठाई। बसाईआवामोइत ने आरोप लगाया कि राज्य में किसानों को सिंगल सुपर फास्फेट (एसएसपी) खाद का एक बैग 900 रुपये की ऊंची कीमत पर खरीदने के लिए मजबूर किया जा रहा है। इस मुद्दे पर स्थिति साफ करते हुए मुख्यमंत्री कोनराड के संगमा ने खाद पर मिलने वाली सब्सिडी और उसके तय सरकारी दामों का पूरा ब्योरा सदन के सामने रखा।

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मुख्यमंत्री ने बताया कि सरकार सिंगल सुपर फास्फेट (एसएसपी) पर 25 प्रतिशत की सब्सिडी देती है, जिसके बाद किसानों के लिए इसका रियायती मूल्य 800 रुपये प्रति बैग तय होता है। यदि सरकार इस पर सब्सिडी न दे, तो खुले बाजार में एसएसपी खाद की कीमत लगभग 1,200 रुपये प्रति बैग होगी। इसके अलावा, यूरिया खाद पर भारी सब्सिडी दी जाती है और किसानों को यह 266 रुपये प्रति बैग की दर से उपलब्ध कराई जाती है। मुख्यमंत्री संगमा ने स्वीकार किया कि चूंकि रासायनिक खाद की आपूर्ति सीमित और नियंत्रित रखी जाती है ताकि इसके अत्यधिक उपयोग को हतोत्साहित किया जा सके, इसलिए कभी-कभी कुछ असामाजिक तत्व इसका फायदा उठाने की कोशिश करते हैं। हालांकि, सरकार ऐसी गतिविधियों को रोकने के लिए लगातार निगरानी रख रही है।

डिजिटल ट्रैकिंग और 1,432 औचक निरीक्षणों की कार्रवाई

खाद वितरण प्रणाली में पारदर्शिता और निगरानी के तंत्र पर जानकारी देते हुए राज्य के कृषि मंत्री तिमोथी डी शिरा ने विधानसभा को बताया कि राज्यभर में खाद की खुदरा दुकानों पर कड़ी नजर रखी जा रही है। इस काम के लिए 129 निरीक्षकों की तैनाती की गई है जो लगातार दुकानों का निरीक्षण करते हैं। सभी खाद विक्रेताओं के लिए यह अनिवार्य किया गया है कि वे अपनी दुकानों पर सरकार द्वारा अधिसूचित आधिकारिक दरों की सूची प्रदर्शित करें और केवल उन्हीं तय दरों पर खाद की बिक्री करें।

कृषि मंत्री ने बताया कि खाद की हर बिक्री का रिकॉर्ड तुरंत इंटीग्रेटेड फर्टिलाइजर मैनेजमेंट सिस्टम (iFMS) पोर्टल पर अपलोड करना जरूरी है। इस डिजिटल ट्रैकिंग सिस्टम की मदद से अधिकारी खाद की एक-एक किलोग्राम की बिक्री पर नजर रख सकते हैं। कृषि मंत्री ने कहा कि यदि 1 किलोग्राम खाद भी अवैध तरीके से या कालाबाजारी में बेची जाती है, तो उसे तुरंत पकड़ा जा सकता है। इसके साथ ही कृषि निदेशक और बागवानी निदेशक को भी किसी भी समय दुकानों का औचक निरीक्षण करने के विशेष अधिकार दिए गए हैं।

कृषि मंत्री के वक्तव्य का समर्थन करते हुए मुख्यमंत्री कोनराड के संगमा ने सदन को सूचित किया कि प्रशासनिक टीमों ने अब तक राज्य के विभिन्न हिस्सों में 1,432 औचक निरीक्षण किए हैं। मुख्यमंत्री ने कड़ी चेतावनी दी कि यदि कोई भी विक्रेता तय दर से अधिक कीमत वसूलता है, कालाबाजारी करता है या खाद का अवैध भंडारण करता पाया जाता है, तो उसका व्यापारिक लाइसेंस तुरंत रद्द कर दिया जाएगा और उसके खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी। कृषि मंत्री शिरा ने किसानों से भी अपील की कि यदि कोई दुकानदार अधिसूचित दरों से अधिक पैसे मांगता है, तो वे इसकी शिकायत राज्य सरकार के शिकायत निवारण पोर्टल 'सीएम कनेक्ट' पर जरूर दर्ज कराएं।

अंतरराज्यीय व सीमा पार तस्करी पर रोक और गारो हिल्स की प्राकृतिक खेती

राज्य के भीतर खुदरा बिक्री की सख्त निगरानी के साथ-साथ मेघालय सरकार रियायती खाद को राज्य से बाहर भेजे जाने से रोकने के लिए भी कड़े कदम उठा रही है। कृषि विभाग यह सुनिश्चित कर रहा है कि खाद की खेप पड़ोसी भारतीय राज्यों या अंतरराष्ट्रीय सीमा पार करके बांग्लादेश न भेजी जा सके। इसके लिए कृषि निदेशालय द्वारा विशेष परमिट जारी किए जाते हैं और परिवहन पर निर्धारित डिजिटल पोर्टल के जरिए नजर रखी जाती है।

कृषि मंत्री तिमोथी डी शिरा ने बताया कि गारो हिल्स क्षेत्र में रासायनिक उर्वरकों की खपत काफी कम है और इसका उपयोग मुख्य रूप से मैदानी इलाकों तक ही सीमित है। गारो हिल्स के अधिकांश किसान आज भी पारंपरिक और प्राकृतिक खेती के तरीकों को अपना रहे हैं। सरकार ने राज्य के उन क्षेत्रों की स्पष्ट पहचान की है जहां नियंत्रित मात्रा में रासायनिक खाद के उपयोग की अनुमति है, जबकि अन्य संवेदनशील क्षेत्रों में पाबंदियां लगाई गई हैं ताकि पूरे राज्य को पूर्ण जैविक खेती की ओर ले जाया जा सके।

मृदा परीक्षण और अंतरराष्ट्रीय जैविक प्रमाणन मानक

मुख्यमंत्री कोनराड के संगमा ने जोर देकर कहा कि मेघालय का कृषि मॉडल दुनिया भर में अपनाई जाने वाली वैज्ञानिक तकनीकों और मृदा परीक्षण पर आधारित है। मिट्टी की जांच के जरिए जैविक खाद के इस्तेमाल को बढ़ावा दिया जा रहा है और राज्य में पैदा होने वाले कृषि उत्पादों के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर के जैविक प्रमाणन की व्यवस्था की जा रही है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्राकृतिक संसाधनों और पारंपरिक कृषि पद्धतियों के बल पर मेघालय देश का सबसे बड़ा जैविक खेती वाला राज्य बनने के लिए पूरी तरह तैयार है। जैविक खेती की इस परिवर्तनकारी यात्रा से न केवल पर्यावरण और मिट्टी की सेहत सुधरेगी, बल्कि किसानों को उनके उत्पादों का बेहतर बाजार मूल्य भी मिल सकेगा।

सवाल-जवाब

जैविक खेती को लेकर मेघालय सरकार का क्या लक्ष्य है?
मेघालय का लक्ष्य देश में सबसे बड़े जैविक खेती क्षेत्र वाला राज्य बनना है, जिसके लिए रासायनिक खादों की जगह बायो-फर्टिलाइजर को बढ़ावा दिया जा रहा है।
मेघालय में यूरिया और एसएसपी खाद की रियायती दरें क्या हैं?
राज्य में रियायती यूरिया 266 रुपये प्रति बैग और सिंगल सुपर फास्फेट (एसएसपी) 25 प्रतिशत सब्सिडी के बाद 800 रुपये प्रति बैग की दर पर उपलब्ध कराया जाता है।
खाद की कालाबाजारी रोकने के लिए सरकार बिक्री को कैसे ट्रैक कर रही है?
खाद की हर बिक्री का विवरण 'इंटीग्रेटेड फर्टिलाइजर मैनेजमेंट सिस्टम' (iFMS) पोर्टल पर अपलोड किया जाता है, जिससे 1 किलोग्राम खाद की बिक्री पर भी नजर रखी जा सकती है।
कालाबाजारी रोकने के लिए अधिकारियों द्वारा कितने औचक निरीक्षण किए गए हैं?
नियमों का उल्लंघन रोकने और विक्रेताओं की जांच के लिए अब तक 1,432 औचक निरीक्षण किए जा चुके हैं।
यदि कोई दुकानदार खाद के अधिक दाम वसूलता है तो किसान कहाँ शिकायत दर्ज करा सकते हैं?
किसान तय सरकारी दरों से अधिक कीमत मांगने वाले खुदरा विक्रेताओं की शिकायत 'सीएम कनेक्ट' ग्रीवेंस रिड्रेसल पोर्टल के माध्यम से दर्ज करा सकते हैं।
गारो हिल्स क्षेत्र में रासायनिक खाद के उपयोग की क्या स्थिति है?
गारो हिल्स में रासायनिक खाद की खपत काफी कम है और यह मुख्यतः मैदानी इलाकों तक सीमित है। वहां के अधिकांश किसान पारंपरिक प्राकृतिक खेती करते हैं।
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टिप्पणियाँ 2

Karan Malhotra@karan-malhotra·22 मिनट पहले

मेघालय विधानसभा में खाद कालाबाजारी रोकने के लिए 1,432 औचक निरीक्षण और डिजिटल ट्रैकिंग (iFMS पोर्टल) का उठाया गया कदम प्रशासनिक और कानूनी निगरानी के लिहाज से एक मजबूत पहल है। हालांकि, यह देखना अहम होगा कि क्या यह प्रवर्तन तंत्र तस्करी और मुनाफाखोरी करने वाले संगठित सिंडिकेट्स पर कानूनी शिकंजा कसने में पूरी तरह कामयाब हो पाता है या नहीं।

Arjun Mehta@arjun-mehta·22 मिनट पहले

मेघालय में रासायनिक खादों की आपूर्ति को जानबूझकर सीमित रखना और बायो-फर्टिलाइजर को प्राथमिकता देना एक बड़ा नीतिगत बदलाव है। इससे जहाँ राज्य का जैविक खेती की ओर बढ़ने का लक्ष्य मजबूत होता है, वहीं यह जोखिम भी पैदा होता है कि नियंत्रित आपूर्ति से कृत्रिम किल्लत और तस्करी बढ़ सकती है। iFMS पोर्टल और 1,432 औचक निरीक्षण जैसी डिजिटल व मैदानी निगरानी यह तय करने के लिए कसौटी होंगी कि सब्सिडी का लाभ सीधे किसानों तक पहुँचे और बिचौलिए इसका फायदा न उठा सकें।

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