क्रिप्टो बाजार में लंबे समय से जारी गिरावट के बीच अब उम्मीद की एक किरण दिखने लगी है। एनालिटिक्स फर्म ग्लासनोड की बुधवार को आई एक रिपोर्ट में कहा गया है कि बिटकॉइन (BTC) में हाल की रिकवरी दरअसल एक बॉटम बनने यानी बाजार का निचला स्तर तैयार होने की शुरुआती अवस्था हो सकती है। रिपोर्ट का तर्क है कि जैसे जैसे बड़े आर्थिक आंकड़े बेहतर हो रहे हैं, वैसे वैसे निवेशकों का भरोसा भी लौट रहा है और यही भरोसा कीमतों को नीचे से सहारा दे रहा है।
इस भरोसे की सबसे बड़ी वजह अमेरिका से आए महंगाई के नरम आंकड़े रहे। जून की महंगाई का डेटा उम्मीद से हल्का रहने के बाद बिटकॉइन ने अमेरिका और यूरोप के शेयर बाजारों से भी बेहतर प्रदर्शन किया। यानी जिस खबर पर शेयर बाजार सामान्य रूप से उछले, उसी खबर पर बिटकॉइन कहीं ज्यादा तेजी से चढ़ा।
महंगाई के एक आंकड़े पर इतनी तेजी क्यों
ग्लासनोड के मुताबिक बाजार का महंगाई के महज एक आंकड़े पर इतनी तेजी से चढ़ जाना अपने आप में एक बड़ा संकेत है। रिपोर्ट में लिखा गया, "यही संवेदनशीलता असली इशारा है। जो बाजार सिर्फ एक महंगाई के आंकड़े पर उछलने को इतना बेताब हो, वह ऐसा बाजार है जहां बेचने वाले थक चुके हैं और खरीदार बस किसी एक बहाने का इंतजार कर रहे हैं।" सीधे शब्दों में कहें तो बिकवाली का दम काफी हद तक निकल चुका है और खरीदारी लौटने के लिए बस एक ट्रिगर की जरूरत है।
कीमतें किन स्तरों के बीच
रिपोर्ट में एक अहम तकनीकी बात की ओर ध्यान दिलाया गया है। बिटकॉइन इस समय सभी निवेशकों की औसत ऑनचेन लागत यानी कॉस्ट बेसिस से ऊपर चल रहा है, लेकिन शॉर्ट टर्म होल्डर (STH) की करीब 69,000 डॉलर वाली लागत से नीचे बना हुआ है। इसका मतलब यह हुआ कि पुराने और औसत निवेशक फिलहाल मुनाफे के दायरे में हैं, पर हाल में खरीदने वाले अब भी नुकसान की स्थिति में हैं।
ग्लासनोड ने यह भी बताया कि लंबी अवधि के निवेशकों (लॉन्ग टर्म होल्डर्स) ने मुनाफावसूली लगभग बंद कर दी है। हाल में जो बिकवाली हुई है, वह बढ़ते हुए नुकसान पर हुई है। यह पैटर्न आम तौर पर किसी लंबे मंदी के दौर के आखिरी चरण की निशानी माना जाता है, जब कमजोर हाथ बाजार से निकल चुके होते हैं।
जून की गिरावट में खरीदारों ने संभाला
दिलचस्प बात यह रही कि जून की गिरावट के दौरान जो जबरदस्त बिकवाली हुई, उसका ज्यादातर हिस्सा खरीदारों ने खप लिया। ग्लासनोड का एक्युमुलेशन ट्रेंड स्कोर बताता है कि जब बिटकॉइन अपने हालिया निचले स्तरों के आसपास कारोबार कर रहा था, तब छोटे और बड़े दोनों तरह के वॉलेट्स में जमकर खरीदारी हो रही थी। बाद में जैसे ही कीमतें स्थिर हुईं, यह खरीदारी की रफ्तार कुछ धीमी पड़ गई।
संस्थागत पैसा लौट रहा, पर सधे कदमों से
बड़े संस्थागत निवेशकों की गतिविधियों में भी सुधार के संकेत हैं। अमेरिका के स्पॉट बिटकॉइन ETF से पैसा निकलने की रफ्तार जून की भारी निकासी के मुकाबले काफी घट गई है, जो इस बात का इशारा है कि बिकवाली का दबाव अब स्थिर होने लगा है।
आंकड़ों में देखें तो मंगलवार को बिटकॉइन फंड्स में शुद्ध रूप से 18.1 करोड़ डॉलर (181 मिलियन डॉलर) का निवेश आया, जिसने एक दिन पहले हुई 42.4 करोड़ डॉलर (424 मिलियन डॉलर) की निकासी की कुछ हद तक भरपाई कर दी। हालांकि यह एक छोटी सी रिकवरी भर है और इसे अब तक मजबूत खरीदारी का साथ नहीं मिला है, जिससे साफ है कि संस्थाएं अभी भी सावधानी बरत रही हैं। रिपोर्ट में कहा गया, "जब तक निवेश लौटकर टिकता नहीं, तब तक यह ऐसा बाजार बना रहेगा जहां संस्थाओं ने भागना तो बंद कर दिया है, पर खरीदना शुरू नहीं किया है।"
डेरिवेटिव बाजार में मंदी वाला रुख कमजोर
डेरिवेटिव बाजार में भी ट्रेडर धीरे धीरे मंदी वाले दांव से पीछे हट रहे हैं। ऑप्शंस का पुट टू कॉल रेशियो इस साल के अपने सबसे निचले स्तर पर आ गया है, जिसका मतलब है कि गिरावट से बचाव यानी डाउनसाइड प्रोटेक्शन की मांग घट गई है।
लेकिन ग्लासनोड ने एक चेतावनी भी दी। रिपोर्ट के मुताबिक भले ही मंदी वाले दांव हटाए जा रहे हों, पर इस रिकवरी को स्पॉट बाजार की मजबूत मांग का सहारा नहीं मिल रहा। रिपोर्ट में लिखा गया, "इस अनवाइंडिंग ने जो चीज पैदा नहीं की है, वह है असली खरीदारी। फ्यूचर्स और ऑप्शंस ट्रेडर्स का अपनी पोजिशन बदलना और असल में स्पॉट बाजार में पैसा आना, ये दोनों एक बात नहीं हैं, और यही कमी पूरी रिकवरी पर सबसे बड़ा सवालिया निशान है।"
अभी कहां हैं कीमतें
खबर लिखे जाने तक बिटकॉइन 64,660 डॉलर पर कारोबार कर रहा था, जो पिछले 24 घंटों में 0.4 फीसदी की मामूली गिरावट दर्शाता है। बुधवार को बिटकॉइन 64,500 डॉलर के ऊपर एक दायरे में सिमटा रहा, जो घटती तेजी और बढ़ती मुनाफावसूली की ओर इशारा करता है, क्योंकि इन स्तरों पर बेचने वाले फिर सक्रिय हो रहे हैं। तकनीकी रूप से बिटकॉइन के लिए करीब 65,160 डॉलर का जोन एक अहम रुकावट (रेजिस्टेंस) बना हुआ है, और अमेरिका के उम्मीद से नरम महंगाई आंकड़ों ने पूरे क्रिप्टो बाजार में जोखिम लेने की भावना को थोड़ा बेहतर किया है।
बाकी क्रिप्टो में हलचल
बिटकॉइन के अलावा दूसरी बड़ी क्रिप्टोकरेंसी में भी हरकत दिखी। रिपल (XRP) बुधवार को दोबारा हासिल किए गए 1.10 डॉलर के सपोर्ट के ऊपर टिका रहा और उसने अपनी तेजी को आगे बढ़ाया। यह उछाल अमेरिका के जून के प्रोड्यूसर प्राइस इंडेक्स (PPI) आंकड़ों के बाद आया, जिनसे पता चला कि दुनिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था में कीमतों का दबाव ठंडा पड़ रहा है। वहीं चेनलिंक (LINK) की कीमत भी बुधवार को थोड़ी ऊपर चढ़ी और उसने पिछले दिन की 5 फीसदी की बढ़त को बरकरार रखा। LINK में खुदरा सट्टा मांग बढ़ रही है और पिछले 24 घंटों में इसका फ्यूचर्स ओपन इंटरेस्ट 6 फीसदी बढ़ गया।
कुल मिलाकर तस्वीर यह है कि पिछले दिन की मैक्रो आंकड़ों से आई तेजी के बाद बुधवार को क्रिप्टो बाजार ने एक ठहराव लिया। बिकवाली का दबाव थमने और मंदी वाले दांव घटने से हालात सुधरे जरूर हैं, लेकिन जब तक स्पॉट बाजार में असली पैसा नहीं लौटता, तब तक इस रिकवरी की मजबूती पर सवाल बना रहेगा।











