क्रिप्टोकरेंसी बाजार में ऑन-चेन बिटकॉइन ट्रांजेक्शन की गतिविधि इस साल के अपने उच्चतम स्तर पर पहुंच गई है। इस अचानक आई तेजी का मुख्य कारण कोल्डकार्ड हार्डवेयर वॉलेट को निशाना बनाकर किया गया एक बड़ा सुरक्षा हमला है। विश्लेषण फर्म के33 की एक रिपोर्ट के अनुसार, पिछले सप्ताह के दौरान कुल 890,000 BTC को ऑन-चेन पर ट्रांसफर किया गया, जो इस वर्ष का एक नया रिकॉर्ड है। इस सुरक्षा सेंधमारी की वजह से लगभग 7,300 अलग-अलग वॉलेट एड्रेस से अनुमानित 1,596 BTC की चोरी हुई, जिसने निवेशकों को अपने फंड सुरक्षित स्थानों पर स्थानांतरित करने के लिए मजबूर कर दिया।
कोल्डकार्ड वॉलेट में खामी और हार्डवेयर सुरक्षा पर उठते सवाल
जांच रिपोर्ट में यह बात सामने आई है कि यह सुरक्षा हमला कोल्डकार्ड हार्डवेयर वॉलेट के सेटअप प्रक्रिया के दौरान आई एक फर्मवेयर खराबी का फायदा उठाकर किया गया था। वॉलेट सेटअप करते समय पर्याप्त रैंडमनेस यानी यादृच्छिक संख्याएं उत्पन्न न हो पाने के कारण सीक्रेट सीड फ्रेज का अनुमान लगाना हमलावरों के लिए आसान हो गया था। इस तकनीकी कमजोरी का फायदा उठाकर हैकर्स ने दूर बैठे ही प्राइवेट की का पुनर्निर्माण कर लिया और प्रभावित वॉलेट्स से बिटकॉइन चुरा लिए।
हालांकि यह तकनीकी खामी विशेष रूप से केवल कोल्डकार्ड वॉलेट्स तक ही सीमित थी, लेकिन के33 का मानना है कि इसका असर पूरे हार्डवेयर वॉलेट उद्योग पर पड़ रहा है। इस घटना के बाद लेजर और ट्रेजर जैसे अन्य प्रमुख हार्डवेयर वॉलेट्स की सुरक्षा को लेकर भी निवेशकों के मन में चिंताएं बढ़ गई हैं। सुरक्षा की तलाश में कई क्रिप्टो निवेशक अब मल्टीसिग्नेचर व्यवस्थाओं या बड़े केंद्रीकृत कस्टोडियन संस्थानों की तरफ रुख करने पर विचार कर रहे हैं।
ऑन-चेन गतिविधि और बाजार का मिजाज
ऑन-चेन गतिविधि में हुई इस भारी बढ़ोतरी का सीधा संबंध बाजार के तनावपूर्ण दौर से जोड़ा जा रहा है। ऐतिहासिक आंकड़ों के विश्लेषण से पता चलता है कि ऑन-चेन पर बिटकॉइन की सक्रिय आपूर्ति में आने वाला उछाल अक्सर बाजार के स्थानीय शीर्ष यानी टॉप या निचले स्तर यानी बॉटम के आसपास दिखाई देता है। जब बाजार में गिरावट होती है, तो इस तरह की गतिविधि घबराहट में की जाने वाली बिक्री यानी पैनिक सेलिंग को दर्शाती है। वहीं दूसरी ओर, जब बाजार मजबूत स्थिति में होता है, तो यह उछाल मुनाफा वसूली यानी प्रॉफिट टेकिंग और छूटने के डर यानी फोमो को उजागर करता है। वर्तमान समय में बिटकॉइन 64,170 डॉलर पर कारोबार कर रहा है, जिसमें पिछले 24 घंटों में 1 प्रतिशत की मामूली बढ़त दर्ज की गई है।
स्ट्रेटजी का वित्तीय रिजर्व और बाजार में प्रदर्शन
संस्थागत मोर्चे पर के33 ने अपनी रिपोर्ट में स्पष्ट किया है कि स्ट्रेटजी कंपनी पर तत्काल अपने बिटकॉइन बेचने का कोई दबाव या जोखिम नहीं है। कंपनी ने अपने अमेरिकी डॉलर रिजर्व को फिर से मजबूत करते हुए लगभग 4 अरब डॉलर तक पहुंचा दिया है। इस नकद भंडार के बल पर कंपनी के पास नवंबर 2028 तक अपने लाभांश दायित्वों को आसानी से पूरा करने के लिए पर्याप्त तरलता मौजूद है।
29 मई के बाद से स्ट्रेटजी ने अपने अमेरिकी डॉलर रिजर्व के लिए 3.13 अरब डॉलर जुटाए हैं। इस फंडिंग का एक बड़ा हिस्सा कंपनी के एट-द-मार्केट यानी ATM प्रोग्राम के जरिए आया, जिसके तहत लगभग 34.55 मिलियन शेयर बेचकर 3.45 अरब डॉलर जुटाए गए थे। इसके अलावा, कंपनी ने जुलाई और अगस्त के महीनों में 5,226 BTC की बिक्री भी की, जिससे प्राप्त 320.7 मिलियन डॉलर का उपयोग रिजर्व को सहारा देने और अपने STRC शेयरों की बायबैक फंडिंग के लिए किया गया। इन कदमों के चलते STRC का शेयर मध्य जून के बाद पहली बार 90 डॉलर के पार निकल गया, जो कंपनी के वित्तीय रुख के बाद बाजार में आए सुधार का संकेत देता है।
पूंजी आवंटन मॉडल की चुनौतियां और जोखिम
इसके बावजूद के33 ने चेतावनी दी है कि बिटकॉइन में आने वाली बड़ी गिरावट के दौरान स्ट्रेटजी का मूल पूंजी आवंटन मॉडल जोखिम में पड़ सकता है। रिपोर्ट में कहा गया है कि स्ट्रेटजी की प्रतिभूतियों की मांग आमतौर पर तब सबसे ज्यादा होती है जब बिटकॉइन की कीमतें पहले से ही अच्छा प्रदर्शन कर रही होती हैं। इस माहौल में कंपनी बाजार के ऊंचे स्तरों पर पूंजी जुटाकर और अधिक बिटकॉइन खरीदने के लिए प्रोत्साहित होती है। हालांकि, बाजार की मंदी के दौर में स्थिति उलट सकती है, जहां कंपनी को अपने MSTR या STRC के मूल्यों को समर्थन देने के लिए बिटकॉइन बेचने पर मजबूर होना पड़ सकता है। के33 का मानना है कि यह पूंजी आवंटन का एक बेहद प्रतिकूल चक्र है जो खराब औसत खरीद और बिक्री कीमतों का कारण बनता है।



















