डिसेंट्रलाइज्ड फाइनेंस (DeFi) की दुनिया में सक्रिय लेंडिंग प्रोटोकॉल मॉर्फो को लेकर स्टैंडर्ड चार्टर्ड ने बड़ा भरोसा जताया है। बैंक का कहना है कि इसका नेटिव टोकन MORPHO साल 2030 के आखिर तक $60 तक पहुंच सकता है। यह अनुमान बैंक की एक ताजा रिसर्च नोट में सामने आया है, जिसके साथ बैंक ने इस तेजी से बढ़ते DeFi प्रोटोकॉल पर औपचारिक रूप से कवरेज शुरू की है। किसी बड़े पारंपरिक बैंक का किसी DeFi टोकन पर इस तरह लंबी अवधि का लक्ष्य तय करना अपने आप में एक बड़ी बात मानी जा रही है।
यह अनुमान बैंक के ग्लोबल हेड ऑफ डिजिटल एसेट्स रिसर्च जेफ्री केंड्रिक ने दिया है। उन्होंने टोकन के लिए साल दर साल का एक टारगेट तय किया है। केंड्रिक के मुताबिक MORPHO साल 2026 के अंत तक $3.50, 2027 में $11, 2028 में $22, 2029 में $40 और फिर 2030 में $60 तक पहुंच सकता है। खास बात यह है कि बैंक के डिजिटल एसेट मॉडल के हिसाब से यह टोकन इसी दौरान बिटकॉइन और एथेरियम, दोनों से बेहतर प्रदर्शन करेगा।
बैंक इतना भरोसा क्यों जता रहा है
केंड्रिक ने अपनी रिपोर्ट में लिखा, "हम मॉर्फो को लेकर बुलिश हैं, जो आवे के बाद दूसरा सबसे बड़ा डिसेंट्रलाइज्ड फाइनेंस (DeFi) लेंडिंग प्रोटोकॉल है।" उनका मानना है कि यही मजबूत स्थिति प्रोटोकॉल को उस मौके का फायदा उठाने के लिए तैयार करती है, जब पारंपरिक फाइनेंस और ऑनचेन फाइनेंस एक-दूसरे के करीब आ रहे हैं।
केंड्रिक ने प्रोटोकॉल के आकार और उसकी मजबूत आर्थिक स्थिति को भरोसे की बड़ी वजह बताया। उन्होंने लिखा, "सबसे बड़े DeFi लेंडिंग प्रोटोकॉल में से एक होने और अपनी आरामदायक आर्थिक स्थिति को देखते हुए (इसने अभी $175 मिलियन की VC फंडिंग जुटाई है), हमें लगता है कि मॉर्फो DeFi में लगाई जा रही एसेट्स के बढ़ते आधार के साथ खुद को बढ़ा सकता है।"
कई गुना बढ़ने वाला बाजार
यह पूरा दांव इस बात पर टिका है कि आने वाले सालों में DeFi में कितना पैसा आता है। स्टैंडर्ड चार्टर्ड का अनुमान है कि 2030 तक DeFi में लगाई गई कुल एसेट्स 37 गुना बढ़ जाएंगी। बैंक का तर्क है कि मॉर्फो के लेंडिंग मार्केट और उसका वॉल्ट ढांचा इसे इस बड़े उछाल के साथ आगे बढ़ने का पूरा मौका देते हैं।
प्रोटोकॉल के मौजूदा आंकड़े पहले से ही काफी बड़े हैं। मॉर्फो मार्केट्स के पास इस समय करीब $5.5 बिलियन का डिपॉजिट है, जबकि मॉर्फो वॉल्ट्स करीब $4.3 बिलियन संभाल रहा है। रिपोर्ट में एक खास बात यह बताई गई कि प्रोटोकॉल फिलहाल 0% टेक रेट पर काम करता है, यानी वॉल्ट ढांचे से होने वाली पूरी लेंडिंग इनकम जमाकर्ताओं के पास ही रहती है और प्लेटफॉर्म उसमें से कोई हिस्सा नहीं लेता। यही खूबी इसे निवेशकों के लिए और आकर्षक बनाती है।
असली चाबी संस्थागत निवेशकों के हाथ में
इतने भरोसे के बावजूद केंड्रिक ने साफ कहा कि मॉर्फो की लंबी अवधि की दिशा एक ही बात से तय होगी, वह है वॉल्ट्स कारोबार में संस्थागत पूंजी को खींच पाने की उसकी क्षमता। असली बड़ा पैमाना यहीं छिपा है।
उन्होंने फायरब्लॉक्स, एंकरेज और टॉरस जैसे कस्टडी प्रोवाइडर्स के साथ प्रोटोकॉल की साझेदारी की ओर इशारा किया, साथ ही स्टेकहाउस फाइनेंशियल जैसे वॉल्ट क्यूरेटर का भी जिक्र किया। माना जा रहा है कि टोकनाइज्ड एसेट्स और पारंपरिक फाइनेंस की पूंजी को ब्लॉकचेन पर लाने में इन्हीं जुड़ावों की बड़ी भूमिका होगी, और बैंक इसी पुल को मॉर्फो की ग्रोथ का इंजन मानता है।
हाल में जुटाई गई $175 मिलियन की वेंचर फंडिंग का जिक्र यहां फिर आया। स्टैंडर्ड चार्टर्ड ने इस फंडिंग को सिर्फ नकदी का सहारा नहीं, बल्कि प्रोटोकॉल के लिए एक अतिरिक्त सहूलियत बताया, जिससे वह अपने संस्थागत ग्राहकों के लिए सेवाएं और आगे बढ़ा सकता है।
अभी कहां है टोकन
खबर लिखे जाने तक MORPHO $2 से थोड़ा ऊपर कारोबार कर रहा था और पिछले 24 घंटे में इसमें 8% की तेजी थी। इसका मतलब है कि आज की कीमत और दशक के आखिर के लिए बैंक के तय किए $60 के लक्ष्य के बीच अभी बहुत लंबा फासला है।
बाजार का बड़ा माहौल
मॉर्फो को लेकर यह भरोसा ऐसे समय आया है जब पूरा क्रिप्टो बाजार दबाव में है। लाइव आंकड़ों के मुताबिक बिटकॉइन करीब $60,698 पर है, जो पिछले बंद भाव $58,559 से 3.65% ऊपर है, फिर भी यह लंबी अवधि के गिरावट वाले रुझान में बना हुआ है और अपने 52-हफ्ते के दायरे के निचले सिरे $58,046 के आसपास आ चुका है। रफ्तार के संकेत अभी कमजोर हैं और 14-दिन का RSI 40 पर है। संस्थागत निवेशकों की सतर्कता भी साफ दिखी है, क्योंकि जून में अमेरिका के स्पॉट बिटकॉइन ETF से रिकॉर्ड $4.5 बिलियन की निकासी हुई, जो किसी एक महीने में सबसे बड़ी थी। ऐसे सतर्क माहौल में किसी DeFi टोकन पर कई साल का यह तेजी वाला अनुमान अलग ही चमक के साथ सामने आता है।













