अमेरिकी ट्रेजरी विभाग ने Guiding and Establishing National Innovation for US Stablecoins यानी जीनियस एक्ट के अहम प्रावधानों को लागू करने के लिए एक नया नियम फ्रेमवर्क तैयार किया है और इस पर आम जनता से राय मांगी है। इस कानून का मुख्य उद्देश्य डिजिटल मुद्रा बाजार में स्पष्टता लाना और स्टेबलकॉइन की कार्यप्रणाली को एक कानूनी दायरे में बांधना है। नए प्रस्तावित नियमों के मुताबिक, केवल उन्हीं चुनिंदा जारीकर्ताओं को अमेरिकी ग्राहकों को स्टेबलकॉइन पेश करने की अनुमति दी जाएगी जिनके पास उचित लाइसेंस होगा।
इस नई व्यवस्था के तहत, सभी संबंधित कंपनियों और जारीकर्ताओं को आगामी 18 जनवरी, 2027 की प्रभावी तिथि से पहले एक वैध संघीय या राज्य लाइसेंस हासिल करना अनिवार्य होगा। इसके बिना बाजार में काम करना संभव नहीं होगा। नियमों का यह प्रस्ताव विदेशी स्टेबलकॉइन जारीकर्ताओं पर भी कड़े प्रतिबंध लगाता है। हालांकि, विभाग ने स्पष्ट किया है कि जो विदेशी जारीकर्ता जीनियस एक्ट की धारा 18 के तहत तय मानकों को पूरा करेंगे, उन्हें अमेरिका में पेमेंट स्टेबलकॉइन जारी करने की छूट मिल सकती है, बशर्ते वे अन्य सभी जरूरी शर्तों का पालन करें। इसके लिए OCC यानी ऑफिस ऑफ द कंप्ट्रोलर ऑफ द करेंसी के पास पंजीकरण कराना भी आवश्यक होगा।
अमेरिका के ट्रेजरी सचिव Scott Bessent ने इन प्रस्तावित नियमों के बारे में जानकारी देते हुए बताया कि इनका मकसद व्यवसायों को स्पष्ट नियामकीय माहौल देना है, जिससे डिजिटल क्षेत्र में इनोवेशन को बढ़ावा मिले और वैश्विक बाजारों में अमेरिकी डॉलर की मजबूत स्थिति बरकरार रहे। उन्होंने कहा कि ट्रेजरी ऐसे सभी पक्षों से सुझावों का स्वागत करती है जो अमेरिका में तकनीक को आगे बढ़ाने और इस देश को दुनिया की क्रिप्टो राजधानी बनाए रखने में मदद करना चाहते हैं।
ट्रेजरी के इस नए प्रस्ताव में इस बात को भी बेहद बारीकी से परिभाषित किया गया है कि आखिर अमेरिकी नागरिकों को पेमेंट स्टेबलकॉइन बेचना या ऑफर करना किस गतिविधि के दायरे में आएगा। इसके तहत अमेरिकी ग्राहकों से सीधे संपर्क साधना, विज्ञापनों के जरिए स्टेबलकॉइन उपलब्ध होने का दावा करना, किसी अमेरिकी ग्राहक के बिना मांगे भेजे गए संदेश का जवाब देना और देश के किसी व्यक्ति के साथ बिक्री का अनुबंध करना शामिल है।
अवैध तरीकों से अमेरिकी प्रतिबंधों से बचने की कोशिश करने वालों पर भी नकेल कसने की तैयारी है। यदि कोई डिजिटल एसेट सर्विस प्रदाता किसी खरीदार को अमेरिकी प्रतिबंधों और लोकेशन का पता लगाने वाले तंत्र को बायपास करने या ब्लॉक किए गए लेन-देन से बचने के तरीके बताता है, तो उसे अमेरिका में स्टेबलकॉइन बेचने का दोषी माना जा सकता है। इसके अलावा, ट्रेजरी इस बात पर भी विचार कर रही है कि क्या बिना किसी प्रतिफल के मिलने वाले पेमेंट स्टेबलकॉइन के एयरड्रॉप्स को भी ऑफर की श्रेणी में रखा जाना चाहिए या नहीं।
हालांकि, इस प्रस्ताव में कुछ विशेष लेन-देन को इन प्रतिबंधों से छूट दी गई है। इनमें व्यक्तिगत क्षमता से काम कर रहे दो लोगों के बीच सीधे ट्रांसफर, किसी व्यक्ति के अमेरिकी और विदेशी खातों के बीच मूल कंपनी के जरिए होने वाले ट्रांसफर, तथा सेल्फ-कस्टडी के लिए उपयोग होने वाले हार्डवेयर या सॉफ्टवेयर वॉलेट के माध्यम से किए जाने वाले लेन-देन शामिल हैं।
यदि कोई व्यक्ति या संस्था इन नियमों का उल्लंघन कर अवैध रूप से स्टेबलकॉइन जारी करने की प्रक्रिया में शामिल पाई जाती है, तो उसे भारी कानूनी कार्रवाई का सामना करना पड़ सकता है। ऐसे मामलों में प्रति उल्लंघन 10 लाख डॉलर तक का जुर्माना, पांच साल तक की कैद या ये दोनों सजाएं एक साथ सुनाई जा सकती हैं।
फेडरल रजिस्टर में इस एनपीआरएम के जारी होने के ठीक 60 दिनों के भीतर जनता और संबंधित हितधारकों को अपने सुझाव और टिप्पणियां दर्ज करानी होंगी, जिसके बाद अंतिम नियमों पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।



















