कमोडिटी फ्यूचर्स ट्रेडिंग कमीशन यानी सीएफटीसी ने डिजिटल एसेट बाजार में औपचारिक निगरानी व्यवस्था तैयार करने के लिए ठोस कदम उठाया है। संसद में समग्र कानूनी प्रारूप को मंजूरी न मिलने के बावजूद नियामक ने अपने मौजूदा अधिकारों के सहारे नियमों को लागू करने की योजना सार्वजनिक की है। एजेंसी ने दो नई व्यवस्थाओं, रेगुलेशन सीटीएक्स और रेगुलेशन सीएएम, के तहत जनसाधारण और बाजार विशेषज्ञों से 60 दिनों के भीतर सुझाव आमंत्रित किए हैं। इस प्रस्तावित ढांचे का मकसद ट्रेडिंग मंचों पर हेरफेर को रोकना और पारदर्शी दिशानिर्देश उपलब्ध कराना है।
कानूनी गतिरोध के बीच प्रशासनिक पहल
अमेरिकी सीनेट में सितंबर के दौरान क्लेरिटी एक्ट आगे नहीं बढ़ पाया था। उस विधायी प्रयास का उद्देश्य सीएफटीसी और प्रतिभूति विनिमय आयोग यानी एसईसी के बीच डिजिटल परिसंपत्तियों के अधिकार क्षेत्र की सीमाओं को स्पष्ट करना था। कानून के अटक जाने के बाद दोनों नियामक संस्थाओं को अपने स्तर पर प्रशासनिक विकल्पों की तलाश करनी पड़ी।
एजेंसी के चेयरमैन माइकल सेलिग ने स्पष्ट किया कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने संसद की सहायता के साथ अथवा उसके बिना क्रिप्टो बाजार के लिए नियामक ढांचा स्थापित करने की प्रतिबद्धता जताई थी। उसी दिशा में आगे बढ़ते हुए आयोग अपने वर्तमान वैधानिक प्रावधानों का उपयोग कर रहा है। चेयरमैन ने साफ किया कि इस प्रस्ताव के जरिए प्रत्येक टोकन या प्लेटफॉर्म के लिए संघीय पंजीकरण अनिवार्य नहीं बनाया जा रहा, क्योंकि ऐसा पूर्ण अधिकार केवल संसद के पारित कानून से ही मिल सकता है। नए नियमों का लक्ष्य सभी को एक ही सांचे में ढालने के बजाय संस्थाओं को स्पष्ट संघीय विकल्प देना है।
तीन स्तरों में विभाजित होगी निगरानी प्रणाली
प्रस्तावित व्यवस्था को तीन अलग-अलग श्रेणियों में बांटा गया है। सामान्य स्पॉट एक्सचेंज, जहां टोकन की तत्काल खरीद-फरोख्त होती है, मुख्य रूप से राज्यों के मनी ट्रांसमिशन कानूनों के दायरे में ही कार्य करते रहेंगे। इन प्लेटफॉर्मों पर अनिवार्य रूप से संघीय पंजीकरण का दबाव नहीं डाला जाएगा।
दूसरी ओर, जो एक्सचेंज लीवरेज्ड ट्रेडिंग या वित्तपोषित सौदों की सुविधा देते हैं, वे सीधे सीएफटीसी की निगरानी परिधि में आएंगे। इसके अलावा परपेचुअल कॉन्ट्रैक्ट्स और अन्य डेरिवेटिव वित्तीय उत्पादों का संचालन करने वाले प्लेटफॉर्म पूरी तरह आयोग के क्षेत्राधिकार में रहेंगे। इस वर्गीकरण के आधार पर ट्रेडिंग कंपनियां अपनी सेवाओं और उत्पादों के स्वरूप के अनुसार या तो राज्य स्तरीय लाइसेंस चुन सकती हैं अथवा संघीय पंजीकरण का मार्ग अपना सकती हैं।
संकट से सबक और बचावकारी नियमन पर जोर
नियामकीय दृष्टिकोण में यह बदलाव पूर्व में हुए बड़े संकटों के अनुभवों पर आधारित है। चेयरमैन सेलिग ने एफटीएक्स के पतन का हवाला देते हुए कहा कि धोखाधड़ी और गड़बड़ियों को रोकने के लिए पूर्व-निवारक नियमों की सख्त दरकार है।
पारंपरिक रूप से वित्तीय एजेंसियां घपला सामने आने के बाद दंडात्मक कार्रवाई करती रही हैं। इसके विपरीत नई व्यवस्था का जोर ऐसे नियम पहले से तैयार करने पर है, जिससे अनुचित व्यापारिक प्रथाओं और धोखाधड़ी पर शुरुआत में ही लगाम कसी जा सके। आयोग ने इसके लिए एडवांस नोटिस ऑफ प्रपोज्ड रूलमेकिंग प्रकाशित कर साठ दिनों की समयसीमा तय की है ताकि उद्योग से जुड़े सभी पक्ष अपने सुझाव दर्ज करा सकें।
डिजिटल बाजार की हलचल और परिसंपत्तियों की स्थिति
नियामकीय घटनाक्रम के बीच व्यापक डिजिटल एसेट बाजार में मिली-जुली गतिशीलता देखी जा रही है। प्रमुख क्रिप्टोकरेंसी बिटकॉइन $86,000 के स्तर से ऊपर एक सीमित दायरे में मजबूती बनाए हुए है। संस्थागत पूंजी के निरंतर प्रवाह ने इसे सहारा दिया है, जहां स्पॉट ईटीएफ में लगातार तीन हफ्तों से शुद्ध निवेश दर्ज हुआ है। सितंबर के मध्य से बिटकॉइन ने तीन सप्ताह के दौरान 12% से अधिक की तेजी दर्ज की थी।
वहीं ऑल्टकॉइन बाजार में सकारात्मक रुझान दिखाई दे रहा है। एथेरियम मजबूत होकर $2,700 से ऊपर पहुंच गया है, जबकि एक्सआरपी $1.52 के स्तर के आसपास स्थिर बना हुआ है। लाइव मार्केट आंकड़ों के अनुसार, एक्सआरपी का भाव $1.50 पर बना हुआ है, जो पिछले बंद भाव $1.52 के मुकाबले 1.28% नीचे है। इसका 52 हफ्तों का दायरा $0.9884 से $1.94 के बीच रहा है, जबकि ट्रेडिंग वॉल्यूम 20 दिनों के औसत का 0.48 गुना दर्ज किया गया। तकनीकी संकेतकों में 14 दिवसीय आरएसआई 56 पर है, एमएसीडी 0.04 पर सिग्नल रेखा 0.04 के करीब हिस्टोग्राम -0.01 दर्शाता है, और 50 दिवसीय ईएमए $1.39 तथा 200 दिवसीय ईएमए $1.39 के साथ गोल्डन क्रॉस के बाद दीर्घकालिक मजबूती के संकेत दे रहा है। 20 दिवसीय बोलिंजर बैंड्स $1.33 से $1.63 के दायरे में हैं और धुरी बिंदु $1.50 पर स्थित है, जहां पहला समर्थन $1.49 और पहला प्रतिरोध $1.51 के स्तर पर है। इसके साथ ही आर्टिफिशियल सुपरइंटेलिजेंस अलायंस, वर्चुअल्स प्रोटोकॉल और नियर प्रोटोकॉल जैसे एआई टोकनों में पूंजी का उल्लेखनीय प्रवाह देखा गया, जिससे विकेंद्रीकृत वित्त यानी डेफी टोकनों से निकलकर निवेशक कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित परियोजनाओं की ओर रुख करते दिखे।





















