वैश्विक वित्तीय बाजारों में सप्ताह के पहले कारोबारी दिन इक्विटी सूचकांकों में जोरदार बढ़त दर्ज की गई। अमेरिकी शेयर बाजारों में खरीदारी का व्यापक दायरा देखने को मिला, जिसके दम पर नैस्डैक ने अपने सर्वकालिक उच्च स्तर का नया रिकॉर्ड बनाया, जबकि एसएंडपी 500 अपने पिछले उच्चतम स्तर से महज 0.3 प्रतिशत नीचे रह गया। यह तेजी तब देखने को मिली जब लंबी अवधि की बॉन्ड यील्ड में लगातार इजाफा दर्ज किया जा रहा है। आमतौर पर बढ़ती यील्ड शेयर बाजारों के लिए दबाव का कारण बनती है, लेकिन इस बार विभिन्न क्षेत्रों की व्यापक भागीदारी ने बाजार को सहारा दिया। विश्लेषकों का मानना है कि यह उछाल किसी पारंपरिक जोखिम-सहिष्णु रुझान या महंगाई से राहत का नतीजा नहीं था, बल्कि उन क्षेत्रों की वापसी थी जो लंबे समय से किनारे पड़े हुए थे।
शेयर बाजार में सेक्टरों का मिला-जुला रुख
सत्र के दौरान शेयरों में खरीदारी अंत तक बनी रही और प्रमुख सूचकांक दिन के उच्च स्तर के काफी करीब बंद हुए। हालांकि, बाजार की आंतरिक संरचना काफी असामान्य रही। इस रैली का नेतृत्व केवल तकनीकी शेयरों ने नहीं किया, बल्कि मैटेरियल्स, कम्युनिकेशन सर्विसेज, एनर्जी और बैंकिंग सेक्टर भी सबसे बेहतर प्रदर्शन करने वालों में शामिल रहे। इसके साथ ही डिफेंसिव सेक्टर जैसे हेल्थकेयर और कंज्यूमर स्टेपल्स में भी मजबूती देखी गई। दूसरी ओर, इंडस्ट्रियल्स और रियल एस्टेट सेक्टर इस तेजी में पिछड़ते नजर आए। इससे साफ संकेत मिलता है कि बाजार में चुनिंदा खरीदारी के बजाय व्यापक स्तर पर पोजीशन बनाई जा रही हैं, जहां पहले शांत रहे सेक्टरों में निवेशकों ने नए सिरे से पूंजी लगाई है।
विदेशी मुद्रा बाजार में डॉलर का दबदबा
अमेरिकी फिक्स्ड इनकम बाजार में चल रही बिकवाली की वजह से सरकारी बॉन्ड यील्ड कई वर्षों के उच्चतम स्तर के आसपास बनी हुई है। इस स्थिति ने अमेरिकी डॉलर को मजबूत आधार प्रदान किया है। भले ही अक्टूबर में अमेरिकी फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों में बढ़ोतरी की संभावनाएं कम हो रही हैं, लेकिन भू-राजनीतिक अनिश्चितताओं के बीच डॉलर अपनी तेजी बनाए रखने में सफल रहा है। एशियाई कारोबारी सत्र में ऑस्ट्रेलियाई डॉलर बनाम अमेरिकी डॉलर (AUD/USD) में हल्की गिरावट दर्ज की गई, जिससे पिछले सप्ताह दो महीने के निचले स्तर से शुरू हुई दो दिवसीय रिकवरी थम गई। हालांकि, रिजर्व बैंक ऑफ ऑस्ट्रेलिया (RBA) द्वारा चालू महीने में एक और दर वृद्धि की उम्मीदें ऑस्ट्रेलियाई मुद्रा को कुछ सहारा दे सकती हैं।
येन और सोने की चाल पर असर
यूरोपीय कारोबारी सुबह में अमेरिकी डॉलर बनाम जापानी येन (USD/JPY) एक बार फिर 158.00 के स्तर के पार निकल गया। बैंक ऑफ जापान (BoJ) की सख्त मौद्रिक नीति संबंधी अपेक्षाओं और मुद्रा बाजार में संभावित हस्तक्षेप के जोखिमों के बावजूद जापानी येन को कोई खास गति नहीं मिल पा रही है। मजबूत डॉलर और ऊंची अमेरिकी यील्ड के चलते यह जोड़ी लगातार मजबूत बनी हुई है। दूसरी ओर, सोने की कीमतों में यूरोपीय सत्र की शुरुआत तक हल्की इंट्राडे गिरावट जारी रही। कीमती धातु मंगलवार को दो महीने के निचले स्तर पर पहुंचकर 4,100 डॉलर प्रति औंस के आंकड़े से ऊपर टिके रहने में कामयाब रही। मजबूत डॉलर ने सोने की मांग को सीमित किया है, लेकिन फेड द्वारा ब्याज दरों में बढ़ोतरी की घटती आशंकाओं ने गैर-उपज वाले सर्राफा को अतिरिक्त गिरावट से बचाया है।
यूरोपीय राजनीति और केंद्रीय बैंक की दुविधा
बाजार में किसी बड़ी आर्थिक रिपोर्ट के अभाव में निवेशकों का ध्यान यूरोपीय बाजारों के घटनाक्रम और मध्य पूर्व के भू-राजनीतिक हालात पर टिका हुआ है। फ्रांस में आगामी दिनों का सबसे अहम राजनीतिक मुद्दा यह रहेगा कि क्या सोशलिस्ट और मरीन ले पेन की नेशनल रैली बजट विवाद को लेकर मौजूदा सरकार को गिराने के संकेत देते हैं। इस राजनीतिक अनिश्चितता के बीच यूरोपियन सेंट्रल बैंक (ECB) भी एक जटिल स्थिति का सामना कर रहा है। सामान्य परिस्थितियों में जब महंगाई लक्ष्य से लगभग दोगुनी रफ्तार से बढ़ रही हो, तो केंद्रीय बैंक ब्याज दरें बढ़ाकर प्रतिक्रिया देता है। लेकिन मौजूदा दौर में बॉन्ड मार्केट पहले ही वित्तीय परिस्थितियों को सख्त कर रहा है, जिससे केंद्रीय बैंक के सामने नीतिगत स्तर पर फैसला लेना बेहद चुनौतीपूर्ण हो गया है।

















