आयुर्वेदिक तरीकों से कैसे कम हो सकती है ओवरी सिस्ट की समस्या, जानिए डॉक्टर चंचल शर्मा की सलाहश्रीमद्भगवद्गीता का 13वां श्लोक: बाहरी शोर के बीच कैसे लें सही फैसले और पाएं मानसिक शांतिरणबीर कपूर की 'रामायण' का 40 सेकंड का मेकिंग वीडियो वायरल, तीन साल की मेहनत आई सामनेघर पर मखाने से तैयार करें दानेदार कलाकंद, त्योहार और व्रत के लिए आसान तरीकाबॉम्बे हाई कोर्ट से अभिनेता इमरान खान को राहत, देश छोड़ने के नोटिस की डेडलाइन 2 नवंबर तक बढ़ीआंखों के मेकअप में भूलकर भी न करें ये सात बड़ी गलतियां, हो सकता है बड़ा नुकसानसागर के बुंदेलखंड मेडिकल कॉलेज की चौंकाने वाली रिसर्च, डायबिटीज और थायराइड के मेल से बढ़ रहा है अंधापन का खतराकिचन की जिद्दी चिकनाई और गंदगी से हैं परेशान, तो सिर्फ दो मिनट में ऐसे चमकाएं अपना गैस और स्लैबछोटे मैदानों और तूफानी बल्लेबाजी से परेशान नहीं हैं भुवनेश्वर कुमार, बोले- गेंदबाज आज भी रख सकते हैं मैच पर पकड़दीवाली के बाद पेंट की खाली बाल्टियों को न फेंके कचरे में, जानिए उन्हें साफ कर दोबारा इस्तेमाल करने के आसान तरीके
छत्तीसगढ़ की मिट्टी से निकलकर पद्म विभूषण तक पहुंचीं तीजन बाई का रायपुर में निधनकल्चर
5 जुल॰ 2026, 10:17 am (115 दिन पहले)· 4

छत्तीसगढ़ की मिट्टी से निकलकर पद्म विभूषण तक पहुंचीं तीजन बाई का रायपुर में निधन

पंडवानी लोक गायिका और पद्म विभूषण सम्मानित तीजन बाई का 70 साल की उम्र में रायपुर एम्स में निधन हो गया, वे लंबे समय से बीमार थीं।

पंडवानी गायन शैली की मशहूर लोक गायिका और पद्म विभूषण सम्मानित तीजन बाई का निधन हो गया है। वे 70 साल की थीं। रायपुर के एम्स अस्पताल में तड़के करीब 3 बजकर 15 मिनट पर उन्होंने आखिरी सांस ली। तीजन बाई लंबे समय से बीमार चल रही थीं और अस्पताल में उनका इलाज चल रहा था। उन्होंने छत्तीसगढ़ की लोक कला और पंडवानी गायन को देश ही नहीं, दुनियाभर में एक अलग पहचान दिलाई।

गनियारी की एक लड़की से पद्म विभूषण तक का सफर

तीजन बाई का जन्म 8 अगस्त 1956 को भिलाई के पास बसे गनियारी गांव में हुआ था। उनकी कला को पहली बड़ी पहचान 1988 में मिली, जब उन्हें पद्मश्री से नवाजा गया। इसके बाद 2003 में उन्हें पद्म भूषण और 2019 में देश के दूसरे सबसे बड़े नागरिक सम्मान पद्म विभूषण से सम्मानित किया गया। एक छोटे से गांव से निकलकर देश के सबसे बड़े सम्मानों तक पहुंचना तीजन बाई की मेहनत और हुनर की मिसाल है।

ये भी पढ़ें

13 साल की उम्र में 10 रुपए के लिए गाया पहला गाना

तीजन बाई ने सिर्फ 13 साल की उम्र में पहली बार सिर्फ 10 रुपए लेकर मंच पर गाना गाया था। उन्होंने पंडवानी की कापालिक शैली में गाना शुरू किया। उनकी आवाज़ और अंदाज़ इतना अलग और असरदार था कि जल्द ही वे गांव-गांव में मशहूर हो गईं। लोग उन्हें अपने यहां परफॉर्मेंस के लिए बुलाने लगे और धीरे-धीरे उनका नाम पूरे इलाके में फैल गया।

परंपरा तोड़कर खड़े होकर गाने वाली पहली महिला

तीजन बाई पंडवानी गाने वाली पहली महिला गायिका थीं। उस दौर में महिलाएं सिर्फ वेदामती शैली में गाती थीं, जिसमें बैठकर गाया जाता था। तीजन बाई ने इस परंपरा को तोड़ते हुए खड़े होकर गाना शुरू किया, जो उस समय सिर्फ पुरुष गायकों तक सीमित था। उनकी भारी और दमदार आवाज़ के साथ-साथ उनका गजब का जोश लोगों के दिलों में सीधे उतर गया। इस तरह उन्होंने गायन की उस विधा में अपनी जगह बनाई, जिसमें पुरुषों का ही दबदबा माना जाता था।

इंदिरा गांधी के सामने प्रस्तुति ने बदली किस्मत

तीजन बाई महाभारत के पात्रों और उसकी कहानियों को अपने अंदाज़ में मंच पर जीवंत कर देती थीं। उनके करियर का सबसे बड़ा मोड़ तब आया जब रंगकर्मी हबीब तनवीर ने उनके हुनर को पहचाना। हबीब तनवीर ने ही उन्हें तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के सामने परफॉर्म करने का मौका दिलाया। इस प्रस्तुति के बाद तीजन बाई ने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा। उन्होंने सिर्फ भारत में ही नहीं, बल्कि दुनिया के कई देशों में जाकर अपनी आवाज़ और प्रतिभा से लोगों का दिल जीता।

12 साल की उम्र में शादी, फिर संघर्ष का दौर

तीजन बाई की निजी जिंदगी संघर्षों से भरी रही। उनकी शादी सिर्फ 12 साल की उम्र में हो गई थी और शादी के बाद ही उन्होंने गाना शुरू किया था। एक महिला होकर पंडवानी गाने की वजह से उन्हें उनके समुदाय पारधी से बाहर कर दिया गया। इसका नतीजा यह हुआ कि उन्हें अपने पति का घर तक छोड़ना पड़ा। इस मुश्किल दौर में उन्होंने दूसरों के घरों में काम किया और कई बार मांगकर खाना खाया। लेकिन उनकी मेहनत आखिरकार रंग लाई और वे एक बड़ी शख्सियत बनकर उभरीं। तीजन बाई ने अपनी जिंदगी में दो शादियां कीं।

सवाल-जवाब

तीजन बाई का निधन कब और कहां हुआ?
उनका निधन रायपुर के एम्स अस्पताल में तड़के करीब 3.15 बजे हुआ।
निधन के समय तीजन बाई की उम्र कितनी थी?
निधन के समय वे 70 साल की थीं।
तीजन बाई को कौन-कौन से बड़े सम्मान मिले थे?
उन्हें 1988 में पद्मश्री, 2003 में पद्म भूषण और 2019 में पद्म विभूषण से सम्मानित किया गया था।
तीजन बाई ने पहली बार गाना कब गाया था?
उन्होंने 13 साल की उम्र में पहली बार सिर्फ 10 रुपए के लिए गाना गाया था।
तीजन बाई को पहली महिला पंडवानी गायिका क्यों कहा जाता है?
वे पंडवानी गाने वाली पहली महिला थीं और परंपरा तोड़कर खड़े होकर गाने वाली भी पहली महिला रहीं, जबकि उससे पहले महिलाएं बैठकर वेदामती शैली में गाती थीं।
तीजन बाई के करियर का बड़ा मोड़ कब आया?
रंगकर्मी हबीब तनवीर ने उनकी प्रतिभा पहचानी और उन्हें तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के सामने परफॉर्म करने का मौका दिलाया।
तीजन बाई की शादी किस उम्र में हुई थी?
उनकी शादी 12 साल की उम्र में हुई थी और उन्होंने अपनी जिंदगी में दो शादियां कीं।
तीजन बाई को उनके समुदाय से बाहर क्यों किया गया था?
महिला होते हुए पंडवानी गाने की वजह से उन्हें उनके पारधी समुदाय से निकाल दिया गया था, जिसके बाद उन्हें पति का घर छोड़ना पड़ा।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 0

अभी तक कोई टिप्पणी नहीं — पहली टिप्पणी आपकी हो!

नागरिक पत्रकारिता

TrendKia पत्रकार बनें

जनता की आवाज़

अपने आसपास की ख़बरें, तस्वीरें और वीडियो ट्रेंडकिआ के साथ साझा करें और अपनी आवाज़ देश तक पहुँचाएँ। हर नागरिक एक पत्रकार।

अभी जुड़ें
CH 01 लाइव
TrendKia TV ON AIR
Chamar no WhatsApp