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छत्तीसगढ़ की मिट्टी से निकलकर पद्म विभूषण तक पहुंचीं तीजन बाई का रायपुर में निधनकल्चर
1 घंटे पहले· 2

छत्तीसगढ़ की मिट्टी से निकलकर पद्म विभूषण तक पहुंचीं तीजन बाई का रायपुर में निधन

पंडवानी लोक गायिका और पद्म विभूषण सम्मानित तीजन बाई का 70 साल की उम्र में रायपुर एम्स में निधन हो गया, वे लंबे समय से बीमार थीं।

मीरा जोशीमीरा जोशीरिश्ते एवं वेलनेस संवाददाता 3 मिनट पढ़ें AI के लिए
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पंडवानी गायन शैली की मशहूर लोक गायिका और पद्म विभूषण सम्मानित तीजन बाई का निधन हो गया है। वे 70 साल की थीं। रायपुर के एम्स अस्पताल में तड़के करीब 3 बजकर 15 मिनट पर उन्होंने आखिरी सांस ली। तीजन बाई लंबे समय से बीमार चल रही थीं और अस्पताल में उनका इलाज चल रहा था। उन्होंने छत्तीसगढ़ की लोक कला और पंडवानी गायन को देश ही नहीं, दुनियाभर में एक अलग पहचान दिलाई।

गनियारी की एक लड़की से पद्म विभूषण तक का सफर

तीजन बाई का जन्म 8 अगस्त 1956 को भिलाई के पास बसे गनियारी गांव में हुआ था। उनकी कला को पहली बड़ी पहचान 1988 में मिली, जब उन्हें पद्मश्री से नवाजा गया। इसके बाद 2003 में उन्हें पद्म भूषण और 2019 में देश के दूसरे सबसे बड़े नागरिक सम्मान पद्म विभूषण से सम्मानित किया गया। एक छोटे से गांव से निकलकर देश के सबसे बड़े सम्मानों तक पहुंचना तीजन बाई की मेहनत और हुनर की मिसाल है।

13 साल की उम्र में 10 रुपए के लिए गाया पहला गाना

तीजन बाई ने सिर्फ 13 साल की उम्र में पहली बार सिर्फ 10 रुपए लेकर मंच पर गाना गाया था। उन्होंने पंडवानी की कापालिक शैली में गाना शुरू किया। उनकी आवाज़ और अंदाज़ इतना अलग और असरदार था कि जल्द ही वे गांव-गांव में मशहूर हो गईं। लोग उन्हें अपने यहां परफॉर्मेंस के लिए बुलाने लगे और धीरे-धीरे उनका नाम पूरे इलाके में फैल गया।

परंपरा तोड़कर खड़े होकर गाने वाली पहली महिला

तीजन बाई पंडवानी गाने वाली पहली महिला गायिका थीं। उस दौर में महिलाएं सिर्फ वेदामती शैली में गाती थीं, जिसमें बैठकर गाया जाता था। तीजन बाई ने इस परंपरा को तोड़ते हुए खड़े होकर गाना शुरू किया, जो उस समय सिर्फ पुरुष गायकों तक सीमित था। उनकी भारी और दमदार आवाज़ के साथ-साथ उनका गजब का जोश लोगों के दिलों में सीधे उतर गया। इस तरह उन्होंने गायन की उस विधा में अपनी जगह बनाई, जिसमें पुरुषों का ही दबदबा माना जाता था।

इंदिरा गांधी के सामने प्रस्तुति ने बदली किस्मत

तीजन बाई महाभारत के पात्रों और उसकी कहानियों को अपने अंदाज़ में मंच पर जीवंत कर देती थीं। उनके करियर का सबसे बड़ा मोड़ तब आया जब रंगकर्मी हबीब तनवीर ने उनके हुनर को पहचाना। हबीब तनवीर ने ही उन्हें तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के सामने परफॉर्म करने का मौका दिलाया। इस प्रस्तुति के बाद तीजन बाई ने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा। उन्होंने सिर्फ भारत में ही नहीं, बल्कि दुनिया के कई देशों में जाकर अपनी आवाज़ और प्रतिभा से लोगों का दिल जीता।

12 साल की उम्र में शादी, फिर संघर्ष का दौर

तीजन बाई की निजी जिंदगी संघर्षों से भरी रही। उनकी शादी सिर्फ 12 साल की उम्र में हो गई थी और शादी के बाद ही उन्होंने गाना शुरू किया था। एक महिला होकर पंडवानी गाने की वजह से उन्हें उनके समुदाय पारधी से बाहर कर दिया गया। इसका नतीजा यह हुआ कि उन्हें अपने पति का घर तक छोड़ना पड़ा। इस मुश्किल दौर में उन्होंने दूसरों के घरों में काम किया और कई बार मांगकर खाना खाया। लेकिन उनकी मेहनत आखिरकार रंग लाई और वे एक बड़ी शख्सियत बनकर उभरीं। तीजन बाई ने अपनी जिंदगी में दो शादियां कीं।

इसका आप पर असर

  • भारत में: तीजन बाई के निधन के बाद देशभर में लोक कला और पंडवानी गायन को संरक्षित रखने पर चर्चा तेज हो सकती है।
  • छत्तीसगढ़ में: छत्तीसगढ़ के लोगों के लिए यह राज्य की सांस्कृतिक पहचान से जुड़ी एक बड़ी क्षति है, जहां उन्हें श्रद्धांजलि देने के लिए स्थानीय स्तर पर आयोजन हो सकते हैं।

प्रेरणा और सीख

तीजन बाई के जीवन से सीख:

  • सामाजिक बहिष्कार और गरीबी झेलने के बावजूद अपनी कला पर भरोसा बनाए रखना बड़ी कामयाबी की नींव बन सकता है।
  • परंपरा से हटकर अपने अंदाज़ में काम करने का साहस, जैसे खड़े होकर गाना शुरू करना, नई पहचान बना सकता है।
  • सही मौका पहचानने वाला कोई गुरु या मार्गदर्शक, जैसे हबीब तनवीर, करियर को पूरी तरह बदल सकता है।
  • शुरुआत चाहे 10 रुपए जैसी छोटी कमाई से हो, निरंतर मेहनत बड़े सम्मान तक पहुंचा सकती है।
  • घर से निकाले जाने और मांगकर खाना खाने जैसे मुश्किल हालात के बावजूद हार न मानना दीर्घकालिक सफलता की कुंजी है।

सवाल-जवाब

तीजन बाई का निधन कब और कहां हुआ?
उनका निधन रायपुर के एम्स अस्पताल में तड़के करीब 3.15 बजे हुआ।
निधन के समय तीजन बाई की उम्र कितनी थी?
निधन के समय वे 70 साल की थीं।
तीजन बाई को कौन-कौन से बड़े सम्मान मिले थे?
उन्हें 1988 में पद्मश्री, 2003 में पद्म भूषण और 2019 में पद्म विभूषण से सम्मानित किया गया था।
तीजन बाई ने पहली बार गाना कब गाया था?
उन्होंने 13 साल की उम्र में पहली बार सिर्फ 10 रुपए के लिए गाना गाया था।
तीजन बाई को पहली महिला पंडवानी गायिका क्यों कहा जाता है?
वे पंडवानी गाने वाली पहली महिला थीं और परंपरा तोड़कर खड़े होकर गाने वाली भी पहली महिला रहीं, जबकि उससे पहले महिलाएं बैठकर वेदामती शैली में गाती थीं।
तीजन बाई के करियर का बड़ा मोड़ कब आया?
रंगकर्मी हबीब तनवीर ने उनकी प्रतिभा पहचानी और उन्हें तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के सामने परफॉर्म करने का मौका दिलाया।
तीजन बाई की शादी किस उम्र में हुई थी?
उनकी शादी 12 साल की उम्र में हुई थी और उन्होंने अपनी जिंदगी में दो शादियां कीं।
तीजन बाई को उनके समुदाय से बाहर क्यों किया गया था?
महिला होते हुए पंडवानी गाने की वजह से उन्हें उनके पारधी समुदाय से निकाल दिया गया था, जिसके बाद उन्हें पति का घर छोड़ना पड़ा।
मीरा जोशी
लेखक के बारे मेंमीरा जोशीरिश्ते एवं वेलनेस संवाददाता जम्मू-कश्मीर
विशेषज्ञतारिश्ते, मानसिक स्वास्थ्य, वेलनेस, लाइफस्टाइल, डेटिंग, विवाह, भावनात्मक कल्याण, आत्म-विकास, माइंडफुलनेस, वर्क-लाइफ बैलेंस

मीरा जोशी एक रिश्ते एवं वेलनेस संवाददाता हैं जो आधुनिक रिश्तों, मानसिक स्वास्थ्य, लाइफस्टाइल और व्यक्तित्व विकास को कवर करती हैं। वे भावनात्मक स्वास्थ्य और मानवीय जुड़ाव पर सूझबूझ भरी कहानियाँ लिखती हैं।

मीरा जोशी एक रिश्ते एवं वेलनेस संवाददाता हैं जो रिश्तों, मानसिक स्वास्थ्य, भावनात्मक कल्याण और व्यक्तित्व विकास पर केंद्रित लाइफस्टाइल पत्रकारिता में विशेषज्ञता रखती हैं। वे आधुनिक डेटिंग, विवाह, संवाद, आत्म-विकास, माइंडफुलनेस और वर्क-लाइफ बैलेंस जैसे विषय कवर करती हैं। संवेदनशील और शोध-आधारित नज़रिये के साथ मीरा मानवीय रिश्तों के मनोवैज्ञानिक व सामाजिक पहलुओं की पड़ताल करती हैं और पाठकों को व्यावहारिक अंतर्दृष्टि व सहज दृष्टिकोण देती हैं। उनकी रिपोर्टिंग का मक़सद पाठकों को भावनात्मक चुनौतियों से निपटने, स्वस्थ रिश्ते बनाने और आज की तेज़ रफ़्तार दुनिया में समग्र कल्याण बेहतर करने में मदद करना है।

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