देश की राजधानी में पटाखों की बिक्री और इस्तेमाल पर लगी पाबंदियों में ढील देने की मांग पर सुप्रीम कोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। पटाखा निर्माताओं द्वारा दायर की गई याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए शीर्ष अदालत ने स्पष्ट कर दिया है कि पर्यावरण से जुड़े मामलों में किसी भी तरह की जल्दबाजी नहीं की जा सकती। अदालत के अनुसार, ऐसे संवेदनशील विषयों पर कोई भी कदम उठाने से पहले हर पहलू पर धीरे-धीरे और अत्यंत गहराई से विचार करना अनिवार्य है।
अदालत ने दिए पुराने फैसलों के नतीजे
सुनवाई के दौरान पीठ ने अतीत के कुछ न्यायिक आदेशों के प्रतिकूल परिणामों का विशेष रूप से उल्लेख किया। अदालत ने कहा कि पूर्व में पर्यावरण संरक्षण से जुड़े कुछ फैसलों के उल्टे असर देखने को मिले हैं। खासतौर पर दिल्ली में वायु गुणवत्ता और पर्यावरण से जुड़ी जटिल स्थितियों का हवाला देते हुए सुप्रीम कोर्ट ने टिप्पणी की कि किसी भी जल्दबाज़ी वाले कदम से बड़ा जोखिम पैदा हो सकता है। इसीलिए अदालत बिना संपूर्ण समीक्षा के किसी राहत पर विचार करने के पक्ष में नहीं है।
संतुलन और सावधानी पर जोर
मामले की गंभीरता को रेखांकित करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि पटाखों पर लगे प्रतिबंधों से जुड़े विषयों में अनेक सामाजिक और पर्यावरणीय पक्षों के बीच संतुलन कायम करना बेहद जरूरी है। निर्माताओं की तरफ से तुरंत रोक हटाने या ढील देने का आग्रह किया गया था, लेकिन कोर्ट ने साफ कर दिया कि तत्काल कोई भी आदेश जारी करने के बजाय पूरे मामले को अत्यंत सावधानीपूर्वक आगे बढ़ाया जाएगा। पर्यावरण सुरक्षा और जनस्वास्थ्य को प्राथमिकता देते हुए ही आगामी दिशा तय की जाएगी।
भविष्य का रुख
पटाखा कारोबारियों की ओर से लगाई गई इन अर्जियों पर सुप्रीम कोर्ट का यह रुख ऐसे समय में सामने आया है, जब आगामी त्यौहारों और सर्दियों के मौसम को देखते हुए पाबंदियों में राहत की मांग उठ रही थी। हालांकि, अदालत ने संकेत दिया है कि वह केवल जनहित और पर्यावरणीय संतुलन को ध्यान में रखते हुए ही आगे का रास्ता निर्धारित करेगी। कोर्ट ने यह संदेश स्पष्ट कर दिया है कि किसी व्यावसायिक दबाव में आकर पर्यावरण से समझौता नहीं किया जाएगा।



















