राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली के जंतर-मंतर पर नीट पेपर लीक के खिलाफ आयोजित एक प्रदर्शन के दौरान हुई हिंसा और मारपीट के मामले में दिल्ली पुलिस ने आधिकारिक रूप से अपना पक्ष रखा है। कॉकरोच जनता पार्टी के विरोध प्रदर्शन के समय संजय कुमार नामक एक दलित युवक घायल हो गया था। इस घटना के बाद से ही सोशल मीडिया पर विभिन्न दावे किए जा रहे हैं और पुलिस कार्रवाई की पारदर्शिता पर गंभीर सवाल उठाए जा रहे हैं।
मामले की शुरुआत 23 जून 2026 को हुई जब कॉकरोच जनता पार्टी के बैनर तले जंतर-मंतर पर प्रदर्शन चल रहा था। इसी दौरान हुई तीखी झड़प में 38 वर्षीय संजय कुमार घायल हो गए। पुलिस की ओर से दी गई जानकारी के अनुसार, जांच में यह बात सामने आई कि संजय को यह चोट किसी घातक हथियार से नहीं, बल्कि वहां मौजूद एक व्यक्ति द्वारा हाथ में पहने गए कड़े से लगने के कारण आई थी।
मेडिकल रिपोर्ट पर उठे सवालों का जवाब
घटना के तुरंत बाद घायल संजय कुमार को इलाज और मेडिकल जांच के लिए राम मनोहर लोहिया अस्पताल ले जाया गया था। अस्पताल के डॉक्टरों द्वारा तैयार की गई मेडिकल रिपोर्ट और उनकी पेशेवर राय के आधार पर पुलिस ने यह साफ कर दिया कि पीड़ित को आई चोटें गंभीर या जानलेवा नहीं बल्कि साधारण प्रकृति की थीं। पुलिस ने उन तमाम वायरल दावों को सिरे से खारिज कर दिया जिनमें यह कहा जा रहा था कि संजय की खोपड़ी फट गई थी या सिर में कोई गहरी दरार आ गई थी। पुलिस का तर्क है कि अस्पताल की एमएलसी रिपोर्ट में इस तरह के किसी भी गंभीर दावे की पुष्टि नहीं होती है।
कानूनी धाराओं और हिरासत पर पुलिस का रुख
संजय कुमार की तरफ से दी गई शिकायत के आधार पर संसद मार्ग पुलिस स्टेशन में भारतीय न्याय संहिता की प्रासंगिक धाराओं के तहत औपचारिक मुकदमा दर्ज कर लिया गया था। पुलिस ने यह भी स्पष्ट किया कि घटना के तुरंत बाद स्थिति को संभालते हुए मौके पर मौजूद संदिग्धों को हिरासत में ले लिया गया था। बाद में कानूनी प्रक्रिया का पालन करते हुए 24 वर्षीय सूरज कुमार और 21 वर्षीय स्वतंत्र भारद्वाज को नोटिस जारी करके थाने बुलाया गया और उनसे इस पूरे घटनाक्रम के संबंध में गहन पूछताछ की गई।
कानून व्यवस्था बनाए रखने वाली एजेंसी ने जोर देकर कहा कि इस पूरी कानूनी प्रक्रिया के दौरान किसी भी बाहरी या राजनीतिक दबाव को स्वीकार नहीं किया गया है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि जांच पूरी तरह से निष्पक्ष और तयशुदा नियमों के दायरे में रहकर की गई है, और किसी भी प्रकार के अनुचित हस्तक्षेप के आरोप पूरी तरह से बेबुनियाद हैं।
सीजेपी प्रवक्ता के तीखे आरोप और सवाल
दूसरी ओर, कॉकरोच जनता पार्टी के प्रवक्ता सौरव दास ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक विस्तृत बयान जारी कर पुलिस प्रशासन और सत्ता पक्ष पर गंभीर आरोप लगाए हैं। सौरव दास का कहना है कि हमले में संजय का सिर बुरी तरह जख्मी हुआ था और घाव की गहराई को देखते हुए प्राथमिकी में हत्या के प्रयास से जुड़ी धारा जोड़ी जानी अनिवार्य थी। उनका आरोप है कि पुलिस ने आरोपियों को तुरंत गिरफ्तार करने से बचने के लिए जानबूझकर इस गंभीर धारा को शामिल करने से इनकार कर दिया।
सौरव दास ने यह भी आरोप लगाया कि जब उन्होंने पुलिस से गंभीर चोट से जुड़ी धारा जोड़ने का अनुरोध किया तो स्थानीय अधिकारियों ने उनकी बात अनसुनी कर दी और उन्हें अदालत जाने की सलाह दी। इसके अलावा, उन्होंने आरोप लगाया कि इस मामले के मुख्य आरोपित खुलेआम यह दावा कर रहे हैं कि एक वरिष्ठ मंत्री पुलिस अधिकारियों पर दबाव बना रहे हैं ताकि कानूनी कार्रवाई को प्रभावित किया जा सके और गिरफ्तारी से बचा जा सके।
अदालती घटनाक्रम और अन्य गतिविधियां
इस बीच, इस राजनीतिक और सामाजिक हलचल के बीच यह भी सामने आया है कि कॉकरोच जनता पार्टी ने आगामी 5 सितंबर को इंडिया गेट तक निकाले जाने वाले अपने प्रस्तावित मार्च को रद्द कर दिया है। संगठन के इस कदम की सराहना देश की सर्वोच्च अदालत यानी सुप्रीम कोर्ट द्वारा भी की गई है। इसके साथ ही, देश के अन्य हिस्सों में भी इस राजनीतिक दल से जुड़ी गतिविधियों और झड़पों की खबरें सामने आती रही हैं, जिन पर स्थानीय प्रशासन नजर बनाए हुए है।



















