केंद्रीय बैंकों की नीतियों में बदलाव और एनवीडिया के नतीजों पर टिकी बाजार की निगाहें, अमेरिकी डॉलर में बढ़तरक्षाबंधन पर बन रहा दुर्लभ खगोलीय संयोग, शतभिषा नक्षत्र का चंद्र ग्रहण 5 राशियों की बढ़ाएगा उलझनरक्षाबंधन पर समस्तीपुर के कुंदन राय का अनोखा प्रयोग, मिथिला कला से राखियों पर बनाए बीजेपी और बैंकों के लोगोभोजपुरी इंडस्ट्री में घमासान, काजल राघवानी के बयानों पर अंजना सिंह का तंज और पवन सिंह पर उठे सवालडेरा प्रमुख को 21 दिन की फरलो मिलने से गहराया विवाद, अंशुल छत्रपति ने सरकारी तंत्र की नीयत पर दागे तीखे सवालकम बारिश की मार झेल रहे पाली और पश्चिमी राजस्थान के किसानों के लिए जोधपुर कृषि विश्वविद्यालय ने खोजी बाजरा और मूंग की नई राहवडोदरा में 15 साल से बेखौफ चल रहे फर्जी क्लीनिक का पर्दाफाश, 10वीं पास बिस्वजीत प्रफुल्ला हालदार अरेस्टआर्थिक मापदंडों पर आरक्षण लागू करने की वकालत के बीच ओम प्रकाश राजभर ने अखिलेश यादव को दी मुस्लिम मुख्यमंत्री घोषित करने की चुनौतीकॉर्पोरेट नौकरी छोड़ 29 साल की स्नेहा रायगुरु ने बनाया अनोखा रिटायरमेंट प्लान, पिता के साथ फार्म खोलकर पाई मन की शांतिबढ़ती राजकोषीय चिंता और रिस्क प्रीमियम में उछाल से अमेरिकी डॉलर पस्त, वैश्विक बाजारों पर दिखा असर
गमले में सुस्त पड़े चमेली के पौधे पर लाएं अनगिनत कलियां, जानें छंटाई और जैविक पोषण के असरदार उपायDIY
26 अग॰ 2026, 7:40 pm (2 घंटे पहले)· 2

गमले में सुस्त पड़े चमेली के पौधे पर लाएं अनगिनत कलियां, जानें छंटाई और जैविक पोषण के असरदार उपाय

बारिश के मौसम में अगर चमेली के पौधे पर फूल नहीं आ रहे हैं, तो सही प्रूनिंग, मिट्टी का अम्लीय संतुलन और रसोई से मिलने वाली देसी जैविक खाद से पौधे को दोबारा फूलों से भरा जा सकता है।

मानसून के महीने चमेली के पौधे की बेहतर बढ़त के लिए बेहद मुफीद माने जाते हैं। वैसे तो इस पौधे में मुख्य रूप से मार्च से जून के दौरान सबसे ज्यादा बहार देखने को मिलती है, लेकिन कुछ खास किस्मों में सितंबर या अक्टूबर तक लगातार फूल खिलते रहते हैं। अगर बरसात के दिनों में भी गमले में लगा पौधा नई कलियां नहीं दे रहा है या उसकी ग्रोथ रुक गई है, तो इसका सीधा मतलब है कि पौधे में नई शाखाओं का फूटना बंद हो चुका है। ऐसे समय में थोड़ी सी देखभाल और सही बागवानी तकनीकों को अपनाकर पौधे को फिर से हरा-भरा और कलियों से सराबोर किया जा सकता है।

चमेली और मोगरा के बीच अंतर की पहचान

अक्सर लोग बेला, जूही, चमेली और मोगरा के बीच उलझ जाते हैं क्योंकि ये सभी एक ही जैसमिन परिवार का हिस्सा हैं और इन सभी के फूलों से बेहद मनमोहक सुगंध आती है। हालांकि इनके पत्तों और फूलों की शारीरिक बनावट में साफ अंतर देखा जा सकता है। चमेली का वानस्पतिक नाम जैस्मिनम है, जबकि मोगरा को वैज्ञानिक रूप से जैस्मिनम सांबैक कहा जाता है। चमेली के फूल सफेद रंग के अलावा पीले और गुलाबी शेड में भी आते हैं। इसके फूल आकार में छोटे होते हैं और हमेशा गुच्छों में खिलते हैं, जिनकी मीठी और तेज सुगंध रात के समय सबसे ज्यादा महसूस होती है। इसकी पत्तियां लंबी और संकरी आकृति की होती हैं। इसके विपरीत मोगरा के फूल थोड़े छोटे, सिंगल या डबल पंखुड़ियों वाले होते हैं, जिनकी पत्तियों की बनावट मोटी और चमकदार होती है।

ये भी पढ़ें

शाखाओं की छंटाई और कवक से बचाव का तरीका

अगर पौधे पर कलियां बनना पूरी तरह बंद हो जाएं, तो सबसे पहला कदम निष्क्रिय या सूखी शाखाओं की पहचान कर उनकी कटाई-छंटाई करना है। गमले के पौधे को घना बनाने के लिए नियमित प्रूनिंग बेहद जरूरी मानी जाती है। पौधा जितना ज्यादा झाड़ीदार और घना होगा, उसमें नई शाखाएं निकलेंगी और फूलों की संख्या भी उतनी ही अधिक होगी। प्रूनिंग करते समय इस बात का विशेष ध्यान रखें कि कटिंग वाली जगह पर हल्दी का गाढ़ा लेप या कोई फंगीसाइड तुरंत लगा दें। इससे खुले हुए हिस्से पर किसी भी तरह के कीट या कवक का संक्रमण नहीं फैलता। इसके अलावा मानसून में जब भी धूप निकले, पौधे को सुबह की ताजी धूप जरूर दिखाएं। क्योंकि चमेली के फूलों का उपयोग धार्मिक कार्यों और पूजा-पाठ में होता है, इसलिए इसमें केमिकल फर्टिलाइजर या बोन मील डालने से बचना चाहिए।

जल निकासी, जड़ों की गुड़ाई और पुनर्रोपण के नियम

बरसात के मौसम में गमले के ड्रेनेज होल का सुचारू होना बहुत आवश्यक है। अगर गमले में पानी रुका रहेगा तो जड़ों में फंगस लगने का खतरा बढ़ जाता है, जिससे पौधा सड़ सकता है। इस दौरान सिंचाई तभी करें जब गमले की ऊपरी मिट्टी कम से कम डेढ़-दो इंच तक सूख चुकी हो। पौधे की मिट्टी की नियमित रूप से निराई-गुड़ाई करते रहना चाहिए। कई बार जड़ें गमले में अत्यधिक फैलकर ब्लॉक हो जाती हैं, जिससे पौधे की खुराक रुक जाती है और फूल आना बंद हो जाते हैं। ऐसी स्थिति में जड़ों की हार्ड प्रूनिंग करें या फिर पौधे को 12 इंच के बड़े मिट्टी के गमले में रीपॉट कर दें। गुड़ाई करने से जड़ों तक हवा, धूप और ऑक्सीजन आसानी से पहुंचती है। गुड़ाई के तुरंत बाद सड़े हुए गोबर की खाद या अन्य जैविक कंपोस्ट देकर पानी देना न भूलें।

अम्लीय मिट्टी और पोटेशियम से भरपूर देसी खाद

चमेली के पौधे को फलने-फूलने के लिए अम्लीय मिट्टी की आवश्यकता होती है। पौधे में हर 20 दिन के अंतराल पर पोषण बदलना चाहिए। मिट्टी का एसिडिक स्तर बनाए रखने के लिए फिटकरी का हल्का घोल बनाकर डाला जा सकता है। इसके अलावा संतरे के छिलकों को पानी में भिगोकर उसका पानी देना भी बहुत फायदेमंद होता है। घर में बचे केले और आलू के छिलकों को सुखाकर उनका बारीक पाउडर तैयार कर लें और गमले की मिट्टी में मिलाएं। आप चाहें तो केले के छिलकों का लिक्विड फर्टिलाइजर भी बनाकर डाल सकते हैं। आलू और केले के छिलके पोटेशियम और अन्य सूक्ष्म पोषक तत्वों से भरपूर होते हैं। निराई-गुड़ाई के बाद दो से तीन चम्मच नीम खली मिट्टी में मिलाएं, जो पौधे के लिए एनपीके (नाइट्रोजन, फॉस्फोरस, पोटेशियम) का प्राकृतिक जरिया बनने के साथ-साथ एंटी फंगल सुरक्षा भी प्रदान करती है। इस प्रक्रिया से 15 से 20 दिनों में नई कलियां आना शुरू हो जाती हैं।

पत्तियों को चमकदार बनाने और तेजी से कलियां लाने के नुस्खे

लगातार और प्रचुर मात्रा में फ्लावरिंग लेने के लिए खाद का चक्र बदलते रहना चाहिए। बारिश के दिनों में पत्तियों और नई कलियों पर कीड़ों का हमला होने की आशंका बनी रहती है, जिससे बचाव के लिए समय-समय पर नीम ऑयल का छिड़काव करें। पौधे की पत्तियों में हरापन और चमक लाने के लिए दो चम्मच एप्सम सॉल्ट का इस्तेमाल करें, जिससे प्रकाश संश्लेषण बेहतर होता है। इसके साथ ही इस्तेमाल की गई चाय पत्ती या कॉफी पाउडर को धोकर सुखाने के बाद गमले में डाला जा सकता है। एक और असरदार नुस्खा चार-पांच दिन पुराने खट्टे दही का है। चार से पांच चम्मच दही को एक लीटर पानी में घोलकर तीन-चार दिनों के लिए छोड़ दें। इस तैयार घोल को महीने में एक बार पौधे की जड़ों में डालें। यह मिट्टी के मित्र बैक्टीरिया को बढ़ाता है और पौधे में बेहद तेजी से कलियां और फूल लाता है।

सवाल-जवाब

चमेली के पौधे में मुख्य रूप से किस महीने में फूल आते हैं?
चमेली के पौधे में सामान्यतः मार्च से जून तक सबसे ज्यादा फूल आते हैं, जबकि कुछ किस्में सितंबर या अक्टूबर तक भी फूल देती हैं।
चमेली और मोगरा के फूलों में मुख्य अंतर क्या है?
चमेली के फूल सफेद, पीले या गुलाबी रंग के गुच्छों में खिलते हैं और पत्तियां लंबी-संकरी होती हैं, जबकि मोगरा के फूल मुख्य रूप से सफेद, सिंगल या डबल पंखुड़ी वाले और पत्तियां मोटी व चमकदार होती हैं।
गमले में पानी डालते समय किस बात का ध्यान रखना चाहिए?
गमले की मिट्टी जब ऊपरी सतह से डेढ़ से दो इंच तक सूख जाए, तभी पानी दें ताकि जड़ों में फंगस न लगे।
चमेली के लिए गमले का सही आकार क्या होना चाहिए?
चमेली के पौधे को अच्छी बढ़त और जड़ों के फैलाव के लिए 12 इंच के मिट्टी के गमले में लगाना सबसे उत्तम माना जाता है।
मिट्टी को एसिडिक बनाने के लिए कौन सी चीजें डाली जा सकती हैं?
फिटकरी का घोल या संतरे के छिलकों का पानी डालकर मिट्टी के अम्लीय संतुलन को बनाए रखा जा सकता है।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 0

अभी तक कोई टिप्पणी नहीं — पहली टिप्पणी आपकी हो!

नागरिक पत्रकारिता

TrendKia पत्रकार बनें

जनता की आवाज़

अपने आसपास की ख़बरें, तस्वीरें और वीडियो ट्रेंडकिआ के साथ साझा करें और अपनी आवाज़ देश तक पहुँचाएँ। हर नागरिक एक पत्रकार।

अभी जुड़ें
CH 01 लाइव
TrendKia TV ON AIR