अगर आप नियमित रूप से चश्मा पहनते हैं, तो लेंस पर बार-बार जमने वाली धूल, उंगलियों के निशान और चेहरे का प्राकृतिक तेल आपके देखने के अनुभव को खराब कर सकता है। सुबह के समय साफ किया गया चश्मा अक्सर कुछ ही घंटों के इस्तेमाल के बाद दोबारा धुंधला दिखने लगता है। ऐसी स्थिति में ज्यादातर लोग बिना सोचे-समझे पास में मौजूद टी-शर्ट के किनारे, रुमाल, टिशू पेपर या तौलिये से ही चश्मे को रगड़ना शुरू कर देते हैं। तुरंत देखने पर भले ही लेंस साफ नजर आने लगे, लेकिन यह तरीका चश्मे की सेहत के लिए बेहद नुकसानदायक साबित होता है। कपड़े या लेंस की सतह पर जमा बारीक धूल के कण रगड़े जाने पर घर्षण पैदा करते हैं, जिससे लेंस पर स्थायी रूप से सूक्ष्म स्क्रैच पड़ सकते हैं। यदि आपके चश्मे पर एंटी-रिफ्लेक्टिव कोटिंग या ब्लू लाइट प्रोटेक्शन जैसी विशेष परतें लगी हैं, तो गलत तरीके से सफाई करने पर यह महंगी कोटिंग्स हमेशा के लिए खराब हो सकती हैं।
गलत तरीकों से लेंस को पहुंचने वाला नुकसान और सफाई की सही आवश्यकता
चश्मे के लेंस की सतह काफी नाजुक होती है। जब हम सूखी अवस्था में किसी कपड़े या पेपर टॉवल से लेंस को पोंछते हैं, तो उस पर पहले से मौजूद धूल के कण किसी सैंडपेपर की तरह काम करते हैं। इससे लेंस की ऊपरी सतह पर महीन लाइनें बन जाती हैं। शुरुआत में ये निशान भले ही आंखों से साफ न दिखें, लेकिन समय के साथ ये आपकी नजर को धुंधला कर देते हैं। पेपर टॉवल, नैपकिन और टिशू पेपर लकड़ी के रेशों से बनते हैं, जो दिखने में भले ही मुलायम लगें, लेकिन लेंस के लिए कठोर होते हैं। इसके अलावा कपड़े पर लगा पसीना और तेल भी लेंस पर फैल जाता है, जिससे धुंधलापन और बढ़ जाता है। इसलिए चश्मे की उम्र बढ़ाने और आंखों की सुरक्षा के लिए सही सफाई तकनीक को अपनाना बेहद जरूरी है।
सफाई प्रक्रिया का पहला कदम: हाथों की अच्छी तरह धुलाई
चश्मे की सफाई शुरू करने से पहले अपने दोनों हाथों को साबुन और पानी से अच्छी तरह धोना सबसे पहला और अनिवार्य नियम है। हमारे हाथों की त्वचा पर प्राकृतिक तेल, मॉइस्चराइजर, सनस्क्रीन या हैंड क्रीम का असर बना रहता है। अगर आप बिना हाथ धोए चश्मे को छुएंगे, तो उंगलियों की चिकनाई दोबारा फ्रेम और लेंस पर लग जाएगी। हाथ धोने के बाद उन्हें एक साफ और रोएं-मुक्त तौलिये से सुखाएं। तौलिया ऐसा होना चाहिए जिसके रेशे हाथों पर न चिपके हों। इसके बाद चश्मे को हमेशा उसके फ्रेम के दोनों सिरों से पकड़ें। सफाई के दौरान उंगलियों को बार-बार लेंस के सीधे संपर्क में लाने से बचें, ताकि उंगलियों के नए निशान लेंस पर न छपें।
दूसरे चरण में सादे पानी से हटाएं जमी हुई धूल
हाथ साफ करने के बाद अगला कदम चश्मे को बहते पानी के नीचे हल्का धोना है। चश्मे पर सीधे कपड़ा लगाने के बजाय पानी का इस्तेमाल करने से सतह पर मौजूद धूल, मिट्टी और बारीक कण बिना किसी घर्षण के आसानी से बह जाते हैं। पानी का तापमान सामान्य या हल्का गुनगुना होना चाहिए। कभी भी अत्यधिक गर्म पानी का उपयोग न करें, क्योंकि तेज गर्मी लेंस की एंटी-रिफ्लेक्टिव और यूवी कोटिंग को नुकसान पहुंचा सकती है। जब आप बाहर से घर लौटते हैं या धूल भरे माहौल में समय बिताते हैं, तो पानी से शुरुआती धुलाई करना अनिवार्य हो जाता है। सूखे लेंस पर कपड़ा रगड़ने से स्क्रैच पड़ने का जोखिम सबसे ज्यादा होता है।
माइल्ड लिक्विड डिश सोप का इस्तेमाल कर हटाएं चिकनाई
केवल पानी से धूल तो हट सकती है, लेकिन लेंस पर जमा तेल और फिंगरप्रिंट्स पूरी तरह साफ नहीं होते। इसके लिए किसी हल्के लिक्विड डिश सोप का प्रयोग किया जा सकता है। ध्यान रखें कि इस डिश सोप में मॉइस्चराइजर, अत्यधिक खुशबू या कठोर रसायन शामिल न हों, क्योंकि ये तत्व लेंस पर एक धुंधली परत छोड़ देते हैं। सफाई के लिए हर लेंस पर साबुन की एक छोटी बूंद से भी कम मात्रा पर्याप्त होती है। अपनी उंगलियों की पोरों की मदद से इस साबुन को बहुत हल्के हाथों से लेंस के दोनों तरफ फैलाएं और गोल घुमाते हुए साफ करें। लेंस के साथ-साथ फ्रेम, नोज पैड और कान के पीछे टिकने वाले हिस्सों की सफाई भी जरूर करें, क्योंकि त्वचा का पसीना और तेल इन्हीं जगहों पर सबसे ज्यादा जमा होता है।
साबुन को धोना और सुखाने की सटीक विधि
साबुन लगाने के बाद चश्मे को दोबारा साफ बहते पानी से अच्छी तरह धो लें। यह सुनिश्चित करना जरूरी है कि लेंस या फ्रेम के किसी भी कोने में साबुन का थोड़ा सा भी अंश बाकी न रहे। यदि साबुन की पतली परत भी लेंस पर रह जाती है, तो सूखने के बाद लेंस के ऊपर धुंधलापन जम जाएगा। धोने के बाद चश्मे को हल्के से झटककर अतिरिक्त पानी की बूंदों को निकाल दें। इसके बाद एक बिल्कुल साफ माइक्रोफाइबर कपड़े की मदद से धीरे-धीरे लेंस और फ्रेम को सुखाएं। सुखाते समय लेंस पर ज्यादा जोर देने या कपड़ा जोर-जोर से रगड़ने की बिल्कुल आवश्यकता नहीं होती।
माइक्रोफाइबर कपड़ा क्यों है बेहतर और कैसे करें इसकी देखभाल
चश्मा खरीदते समय साथ मिलने वाला माइक्रोफाइबर कपड़ा लेंस की सफाई के लिए सबसे सुरक्षित विकल्प माना जाता है। इसकी खास बनावट धूल और तेल के कणों को बिना सतह को नुकसान पहुंचाए अपने भीतर समेट लेती है। हालांकि, ज्यादातर लोग माइक्रोफाइबर कपड़े को महीनों तक बिना धोए इस्तेमाल करते रहते हैं। कपड़े में लगातार जमा होने वाला तेल और धूल दोबारा लेंस पर चिपकने लगता है, जिससे सफाई का कोई फायदा नहीं मिलता। इसलिए माइक्रोफाइबर कपड़े को भी समय-समय पर गुनगुने पानी और हल्के साबुन से धोना चाहिए। इसे धोते समय कभी भी फैब्रिक सॉफ्टनर का इस्तेमाल न करें, क्योंकि फैब्रिक सॉफ्टनर कपड़े के रेशों पर एक मोम जैसी परत बना देता है जो बाद में लेंस पर धुंधले निशान छोड़ती है।
स्क्रैच हटाने के घरेलू नुस्खों से बचें
इंटरनेट पर चश्मे के स्क्रैच हटाने के लिए टूथपेस्ट, बेकिंग सोडा, वैक्स या अन्य घरेलू चीजों के इस्तेमाल के दावे अक्सर देखने को मिलते हैं। नंबर वाले चश्मे के लेंस पर ऐसे नुस्खे आजमाने की गलती कभी न करें। टूथपेस्ट और बेकिंग सोडा में सूक्ष्म घर्षण पैदा करने वाले तत्व होते हैं, जो लेंस की कोटिंग को पूरी तरह छीलकर खराब कर देते हैं। यदि लेंस पर एक बार वास्तविक स्क्रैच पड़ गया है, तो उसे किसी भी सफाई या घरेलू नुस्खे से ठीक नहीं किया जा सकता। यदि स्क्रैच आपकी आंखों के सामने आकर देखने में बाधा पैदा कर रहा है या सिरदर्द का कारण बन रहा है, तो किसी ऑप्टिकल स्टोर पर जाकर जांच करवाएं और नया लेंस बदलवाएं।
लंबी उम्र के लिए चश्मे के रखरखाव से जुड़े जरूरी नियम
चश्मे को लंबे समय तक नया जैसा बनाए रखने के लिए कुछ दैनिक आदतों में बदलाव जरूरी है। चश्मा उतारकर किसी भी मेज या सतह पर रखते समय उसे कभी भी लेंस की तरफ से न रखें, बल्कि फ्रेम के बल टिकाकर रखें। जब चश्मा इस्तेमाल में न हो, तो उसे हमेशा उसके मजबूत हार्ड केस के भीतर ही रखें। इसके अलावा अपने चश्मे को कार के डैशबोर्ड या सीधी धूप वाली गर्म जगहों पर छोड़ने से बचें, क्योंकि अत्यधिक तापमान लेंस की कोटिंग्स को पिघला या चटका सकता है। बाहर सफर करते समय अपने केस में एक साफ माइक्रोफाइबर कपड़ा हमेशा साथ रखें। सही रखरखाव और नियमित सफाई से आपके चश्मे का लेंस लंबे समय तक चमकदार और पारदर्शी बना रहेगा।



















