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भारत में शिक्षकों की संख्या एक करोड़ के पार, स्कूली स्तर पर ड्रॉपआउट दर में आई रिकॉर्ड गिरावटशिक्षा
3 घंटे पहले· 2

भारत में शिक्षकों की संख्या एक करोड़ के पार, स्कूली स्तर पर ड्रॉपआउट दर में आई रिकॉर्ड गिरावट

शिक्षा मंत्रालय की नई UDISE रिपोर्ट के अनुसार देश में कार्यरत शिक्षकों की संख्या बढ़कर 1.02 करोड़ हो गई है, जबकि बच्चों के स्कूल छोड़ने की दर में बड़ी कमी आई है।

दिव्या रेड्डीदिव्या रेड्डीशिक्षा संवाददाता 5 मिनट पढ़ें AI के लिए
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देश के स्कूली शिक्षा क्षेत्र में एक ऐतिहासिक सुधार देखने को मिला है, जहां भारत भर के विद्यालयों में पढ़ाने वाले शिक्षकों की कुल संख्या ने 1.02 करोड़ का आंकड़ा पार कर लिया है। इस बड़ी शिक्षक शक्ति के साथ देश में इस समय लगभग 24.72 करोड़ विद्यार्थी शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं। इसके साथ ही, स्कूल छोड़ने वाले छात्रों यानी ड्रॉपआउट की संख्या में भी महत्वपूर्ण गिरावट दर्ज की गई है। शिक्षा मंत्रालय द्वारा जारी की गई नई UDISE रिपोर्ट के अनुसार, साल 2024-25 में जो ड्रॉपआउट दर 2.3 प्रतिशत थी, वह शैक्षणिक सत्र 2025-26 में घटकर महज 1.8 प्रतिशत रह गई है। यह रिपोर्ट दर्शाती है कि भारतीय स्कूलों में बुनियादी ढांचे और बच्चों को पढ़ाई से जोड़े रखने के प्रयासों में लगातार सुधार हो रहा है।

देशभर में बढ़ी शिक्षकों की संख्या और सरकारी योजनाएं

देश भर के लगभग 14.66 लाख (14,66,682) विद्यालयों में कार्यरत शिक्षकों की संख्या अब बढ़कर 1.02 करोड़ (1,02,73,020) से अधिक हो गई है। अगर पिछले वर्षों के आंकड़ों पर नजर डालें, तो पता चलता है कि शिक्षकों की संख्या में लगातार बढ़ोतरी हुई है। वर्ष 2022-23 में देश में शिक्षकों की कुल संख्या 94.8 लाख थी। इसके बाद शैक्षणिक सत्र 2023-24 में यह आंकड़ा बढ़कर 98 लाख हो गया। इसके अगले ही साल यानी 2024-25 में शिक्षकों की संख्या ने एक करोड़ की सीमा को पार करते हुए 1.01 करोड़ का स्तर हासिल किया और अब वर्ष 2025-26 में यह संख्या 1.02 करोड़ तक पहुंच चुकी है। शिक्षा मंत्रालय ने इस निरंतर विकास को भारत में स्कूली शिक्षा के इतिहास में एक मील का पत्थर करार दिया है। मंत्रालय ने इस बेहतरीन सफलता का मुख्य श्रेय समग्र शिक्षा अभियान और राष्ट्रीय शिक्षा नीति यानी NEP 2020 जैसी महत्वपूर्ण सरकारी योजनाओं के जमीनी स्तर पर सफल क्रियान्वयन को दिया है।

स्कूल छोड़ने वाले बच्चों की दर में उल्लेखनीय कमी

शिक्षा मंत्रालय की इसी रिपोर्ट में यह भी रेखांकित किया गया है कि प्राथमिक और माध्यमिक दोनों ही स्तरों पर स्कूली पढ़ाई बीच में छोड़ने वाले बच्चों की संख्या में भारी गिरावट आई है। आंकड़ों के अनुसार, प्रिपरेटरी स्तर पर पढ़ाई बीच में ही छोड़ने वाले विद्यार्थियों की दर वर्ष 2024-25 में 2.3 प्रतिशत पर थी, जो नई नीतियों के प्रभाव से घटकर वर्ष 2025-26 में केवल 1.8 प्रतिशत रह गई है। इसी तरह, माध्यमिक यानी सेकेंडरी स्तर पर भी ड्रॉपआउट दर में बड़ा सुधार देखा गया है, जहां यह आंकड़ा पहले के 8.2 प्रतिशत से कम होकर अब 7 प्रतिशत पर आ गया है। यह गिरावट स्पष्ट रूप से दर्शाती है कि स्कूल अब बच्चों को पढ़ाई जारी रखने के लिए एक अनुकूल और आकर्षक माहौल प्रदान करने में सफल हो रहे हैं।

स्कूली दाखिलों में बदलाव और सरकारी बनाम निजी स्कूलों के आंकड़े

रिपोर्ट के मुताबिक देश के स्कूलों में कुल दाखिलों में भी बढ़ोतरी देखी गई है। कुल प्रवेश वर्ष 2025 में 24.6 लाख थे, जो बढ़कर अब 24.72 लाख हो गए हैं। हालांकि, इस सकारात्मक पहलू के बीच सरकारी स्कूलों में दाखिले के रुझान में कमी देखने को मिली है। सरकारी शिक्षण संस्थानों में दाखिले करीब 26.8 लाख कम हुए हैं, जो कि साल 2024-25 के 12.1 करोड़ से गिरकर इस साल 11.8 करोड़ पर सिमट गए हैं। इसके ठीक विपरीत, निजी स्कूलों यानी प्राइवेट स्कूलों में दाखिला लेने वाले विद्यार्थियों की संख्या में जबरदस्त उछाल आया है, जहां करीब 30 लाख अतिरिक्त छात्रों की वृद्धि दर्ज की गई है।

इसके साथ ही, विभिन्न स्तरों पर होने वाले दाखिलों के पैटर्न में भी बड़ा बदलाव आया है। साल 2023-24 और 2025-26 के बीच की अवधि में सेकेंडरी स्कूलों में दाखिले लेने वाले छात्रों की संख्या करीब 31.5 लाख बढ़ गई है। हालांकि, इसी दौरान प्रिपरेटरी स्तर पर होने वाले दाखिलों में 42 लाख की कमी दर्ज की गई। माध्यमिक स्तर पर GRE वर्ष 2023-24 के 68.5 प्रतिशत से बढ़कर शैक्षणिक वर्ष 2025-26 में 71.7 प्रतिशत हो गया है।

सिंगल टीचर और बिना दाखिले वाले स्कूलों की संख्या घटी

UDISE रिपोर्ट एक और बेहद सकारात्मक पहलू को सामने लाती है, जो कि एकल शिक्षक यानी सिंगल टीचर वाले स्कूलों और बिना किसी दाखिले यानी ज़ीरो एनरोलमेंट वाले स्कूलों की संख्या में आई कमी है। रिपोर्ट के अनुसार, पिछले वर्षों की तुलना में इस साल देश में सिर्फ एक शिक्षक के भरोसे चलने वाले स्कूलों की संख्या में लगभग 3 प्रतिशत की कमी आई है। वहीं, जिन स्कूलों में एक भी छात्र का दाखिला नहीं हुआ था यानी शून्य नामांकन वाले स्कूल, उनकी संख्या में भी करीब 2 प्रतिशत की कमी देखी गई है। यह आंकड़ा इस बात का प्रमाण है कि सुदूर क्षेत्रों में भी स्कूलों के सुदृढ़ीकरण और शिक्षकों की नियुक्ति पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।

एक स्तर से दूसरे स्तर में जाने की दर यानी ट्रांजिशन रेट में सुधार

चालू शैक्षणिक वर्ष में स्कूली शिक्षा के विभिन्न स्तरों के बीच होने वाले ट्रांजिशन रेट में भी सराहनीय सुधार देखने को मिला है। शिक्षा मंत्रालय के विश्लेषकों का मानना है कि यह प्रगति इस बात का स्पष्ट संकेत है कि विद्यार्थी अपनी पढ़ाई को बीच में छोड़े बिना अगले स्तरों की शिक्षा में सुचारू रूप से आगे बढ़ रहे हैं। आंकड़ों को देखें तो फाउंडेशनल स्तर से प्रिपरेटरी स्तर तक जाने वाला ट्रांजिशन रेट साल 2024-25 के 98.6 प्रतिशत से बढ़कर वर्ष 2025-26 में 99.2 प्रतिशत हो गया है।

इसके अतिरिक्त, मिडिल और सेकेंडरी स्तरों के बीच भी बच्चों की प्रगति की दर में सुधार हुआ है। प्रिपरेटरी से मिडिल स्तर पर जाने वाले छात्रों का ट्रांजिशन रेट जो पहले 92.2 प्रतिशत था, वह बढ़कर अब 93.8 प्रतिशत हो गया है। वहीं, मिडिल से सेकेंडरी स्तर पर यह ट्रांजिशन रेट साल 2024-25 के 86.6 प्रतिशत की तुलना में शैक्षणिक वर्ष 2025-26 में सुधरकर 88.3 प्रतिशत पर पहुंच गया है।

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इसका आप पर असर

  • भारत में: स्कूल स्तर पर बेहतर बुनियादी ढांचा और अधिक शिक्षकों की उपलब्धता से देश भर के बच्चों को उच्च गुणवत्ता वाली शिक्षा मिलेगी, जिससे लंबे समय में रोजगार के अवसर सुधरेंगे।
  • अभिभावकों के लिए: स्कूलों में ड्रॉपआउट दर घटने और बेहतर ट्रांजिशन रेट से यह सुनिश्चित होगा कि बच्चों को अपनी प्राथमिक शिक्षा पूरी करने के बाद आगे की पढ़ाई बीच में नहीं छोड़नी पड़ेगी।

सवाल-जवाब

UDISE रिपोर्ट के अनुसार वर्तमान में भारत में स्कूल शिक्षकों की कुल संख्या कितनी है?
भारत में लगभग 14.66 लाख (14,66,682) स्कूलों में 1.02 करोड़ (1,02,73,020) से अधिक शिक्षक कार्यरत हैं।
साल 2024-25 और 2025-26 के बीच भारत में स्कूल ड्रॉपआउट दर में क्या बदलाव आया है?
प्रिपरेटरी स्तर पर ड्रॉपआउट दर 2024-25 में 2.3% से घटकर 2025-26 में 1.8% हो गई है, जबकि सेकेंडरी स्तर पर यह दर 8.2% से घटकर 7% रह गई है।
सरकारी और प्राइवेट स्कूलों में दाखिले (एनरोलमेंट) के क्या रुझान रहे हैं?
कुल दाखिले बढ़ने के बावजूद सरकारी स्कूलों में नामांकन 26.8 lakh कम होकर 11.8 करोड़ रह गया, जबकि प्राइवेट स्कूलों में लगभग 30 लाख छात्रों की बढ़ोतरी दर्ज की गई।
छात्रों के ट्रांजिशन रेट (एक स्तर से दूसरे स्तर पर जाने की दर) में क्या सुधार दर्ज किया गया?
फाउंडेशनल से प्रिपरेटरी स्तर का ट्रांजिशन रेट बढ़कर 99.2%, प्रिपरेटरी से मिडिल का 93.8%, और मिडिल से सेकेंडरी स्तर का ट्रांजिशन रेट सुधरकर 88.3% हो गया है।
सिंगल टीचर और बिना दाखिले वाले स्कूलों की स्थिति में क्या बदलाव आया है?
पिछले वर्षों की तुलना में इस साल देश में केवल एक शिक्षक वाले स्कूलों की संख्या में लगभग 3% और बिना किसी दाखिले वाले (ज़ीरो एनरोलमेंट) स्कूलों की संख्या में लगभग 2% की कमी आई है।
दिव्या रेड्डी
लेखक के बारे मेंदिव्या रेड्डीशिक्षा संवाददाता आगरा
विशेषज्ञताशिक्षा समाचार, स्कूल, विश्वविद्यालय, शिक्षा नीति, परीक्षा, छात्रवृत्ति, छात्र मामले, शैक्षणिक रुझान, उच्च शिक्षा, कौशल विकास

दिव्या रेड्डी एक शिक्षा संवाददाता हैं जो स्कूलों, विश्वविद्यालयों, शिक्षा नीति, शैक्षणिक रुझानों और छात्रों से जुड़ी ख़बरों को कवर करती हैं। वे शिक्षा क्षेत्र के अहम घटनाक्रमों पर स्पष्टता व अंतर्दृष्टि के साथ रिपोर्ट करती हैं।

दिव्या रेड्डी एक शिक्षा संवाददाता हैं जो शिक्षा पत्रकारिता — स्कूल व विश्वविद्यालय की ख़बरों, शिक्षा नीति, शैक्षणिक सुधारों, छात्र मामलों और कौशल विकास पहलों — में विशेषज्ञता रखती हैं। वे शिक्षा क्षेत्र के ब्रेकिंग घटनाक्रम, परीक्षा अपडेट, संस्थागत बदलाव, सरकारी शिक्षा कार्यक्रम और सीखने में नवाचार पर रिपोर्ट करती हैं। सटीक व सुलभ रिपोर्टिंग पर मज़बूत ज़ोर के साथ दिव्या छात्रों, शिक्षकों और नीति-निर्माताओं को प्रभावित करने वाले मुद्दे कवर करती हैं। उनका काम पाठ्यक्रम में बदलाव, उच्च शिक्षा रुझानों, छात्रवृत्ति अवसरों, प्रतियोगी परीक्षाओं और शिक्षा में तकनीक की बदलती भूमिका को उजागर करता है।

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