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NCERT की नई पहल: स्कूली किताबों में 'गरीबी' को भी भेदभाव के रूप में किया गया शामिलशिक्षा
8 जुल॰ 2026, 3:43 pm (112 दिन पहले)· 2

NCERT की नई पहल: स्कूली किताबों में 'गरीबी' को भी भेदभाव के रूप में किया गया शामिल

एनसीईआरटी ने अपनी कक्षा 8 की नई सामाजिक विज्ञान की किताब में आर्थिक स्थिति को भेदभाव का एक प्रमुख कारण माना है। यह कदम छात्रों को सामाजिक समानता और संवेदनशीलता के प्रति जागरूक करने के लिए उठाया गया है।

एनसीईआरटी ने शिक्षा के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए स्कूली पाठ्यक्रम में बड़ा बदलाव किया है। सुप्रीम कोर्ट के हालिया निर्देशों के बाद जारी कक्षा 8 की नई सामाजिक विज्ञान की किताब, जिसका शीर्षक 'एक्सप्लोरिंग सोसाइटी: इंडिया एंड बियॉन्ड' है, अब छात्रों को भेदभाव के विभिन्न पहलुओं के बारे में अधिक गहराई से सिखाएगी। इस किताब के 'नागरिकता: अधिकार और कर्तव्य' नामक अध्याय में आर्थिक स्थिति को भेदभाव के एक प्रमुख कारण के तौर पर स्पष्ट रूप से परिभाषित किया गया है।

भेदभाव की व्यापक परिभाषा

नई पाठ्यपुस्तक में यह स्पष्ट किया गया है कि किसी भी व्यक्ति या समूह के साथ उसकी जाति, धर्म, नस्ल, जातीय पहचान, दिव्यांगता, शारीरिक बनावट, लिंग या यौन पहचान के साथ-साथ उसकी आर्थिक स्थिति के आधार पर गलत व्यवहार करना पूरी तरह से भेदभाव की श्रेणी में आता है। एनसीईआरटी ने अपनी किताब में इसे केवल एक अनैतिक कृत्य ही नहीं, बल्कि इसे कानून के विरुद्ध भी करार दिया है। किताब में विशेष रूप से इस बात पर जोर दिया गया है कि समाज में आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के बच्चों को अक्सर भेदभाव का शिकार होना पड़ता है, इसलिए इसे भेदभाव का एक अनिवार्य और महत्वपूर्ण आधार मानना आवश्यक है।

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बदलाव क्यों है जरूरी

शिक्षा जगत में इस बदलाव को इसलिए काफी अहम माना जा रहा है क्योंकि भेदभाव के खिलाफ चल रही मौजूदा नीतियों में अक्सर आर्थिक पृष्ठभूमि को अनदेखा कर दिया जाता था। उदाहरण के लिए, हाल ही में जारी यूजीसी (प्रमोशन ऑफ इक्विटी इन हायर एजुकेशन इंस्टीट्यूशन्स) रेगुलेशन्स, 2026 में भी भेदभाव की परिभाषा में धर्म, जाति, नस्ल, लिंग और जन्मस्थान जैसे आधार तो शामिल थे, लेकिन आर्थिक स्थिति का अलग से कोई स्पष्ट उल्लेख नहीं था। कई विशेषज्ञों और शिक्षाविदों ने इस पर चिंता जताई थी कि ईडब्ल्यूएस (EWS) वर्ग के लोगों को होने वाली समस्याओं को औपचारिक रूप से मान्यता मिलनी चाहिए। एनसीईआरटी का यह नया दृष्टिकोण अब स्कूली स्तर पर ही बच्चों में आर्थिक समानता के प्रति समझ विकसित करने का कार्य करेगा।

सवाल-जवाब

एनसीईआरटी की किताब में भेदभाव के किन आधारों को जोड़ा गया है?
नई किताब में आर्थिक स्थिति को भेदभाव के एक प्रमुख आधार के रूप में शामिल किया गया है।
यह बदलाव किस कक्षा की किताब में किया गया है?
यह बड़ा बदलाव कक्षा 8 की सामाजिक विज्ञान (भाग-2) की नई किताब में किया गया है।
नई किताब का नाम क्या है?
नई पाठ्यपुस्तक का शीर्षक 'एक्सप्लोरिंग सोसाइटी: इंडिया एंड बियॉन्ड' है।
क्या आर्थिक स्थिति के आधार पर भेदभाव कानूनन गलत है?
जी हां, किताब में स्पष्ट रूप से उल्लेख किया गया है कि ऐसा व्यवहार अनैतिक होने के साथ-साथ कानून के खिलाफ भी है।
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