छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में स्थित इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय में प्रश्नपत्र लीक होने की गंभीर घटना सामने आई है। विश्वविद्यालय प्रशासन ने मामले का संज्ञान लेते हुए बीएससी एग्रीकल्चर सेकेंड ईयर के कीट विज्ञान विषय की परीक्षा को तत्काल प्रभाव से रद्द कर दिया है। पेपर लीक की खबर फैलते ही पूरे परिसर में हड़कंप मच गया और बड़ी संख्या में छात्र सड़कों पर उतर आए। गुस्साए छात्रों ने विश्वविद्यालय प्रबंधन के खिलाफ जोरदार नारेबाजी करते हुए जमकर प्रदर्शन किया और व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े किए।
परिसर में छात्रों का जोरदार प्रदर्शन और प्रशासन पर आरोप
परीक्षा रद्द होने के बाद आक्रोशित विद्यार्थियों ने विश्वविद्यालय परिसर में एकत्र होकर उग्र विरोध दर्ज कराया। छात्रों ने विश्वविद्यालय प्रशासन पर घोर लापरवाही बरतने का आरोप लगाया है। पीड़ित छात्रों का कहना है कि प्रश्नपत्र लीक होने की सूचना अधिकारियों को परीक्षा शुरू होने से पहले ही मिल चुकी थी, लेकिन इसके बावजूद समय रहते परीक्षा रोकने के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। इसके अलावा, विद्यार्थियों ने आरोप लगाया है कि विश्वविद्यालय के अंदरूनी कर्मचारियों और शिक्षकों की मिलीभगत से प्रश्नपत्र की सौदेबाजी की गई। प्रदर्शनकारी छात्रों ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों को कड़ी सजा नहीं दी गई, तो वे आने वाले दिनों में उग्र आंदोलन करने के लिए बाध्य होंगे।
संदेह के घेरे में कई प्रोफेसर और कर्मचारी, बुलाई गई उच्च स्तरीय बैठक
प्रश्नपत्र लीक की घटना के बाद विश्वविद्यालय प्रबंधन हरकत में आ गया है। मामले की गंभीरता को देखते हुए प्रबंधन ने तत्काल कार्रवाई करते हुए कई प्रोफेसरों और कर्मचारियों को जवाब-तलब के लिए पेश होने का निर्देश दिया है। प्राथमिक स्तर पर विश्वविद्यालय के ही कुछ शिक्षकों और स्टाफ सदस्यों की भूमिका को संदिग्ध माना जा रहा है। घटनाक्रम की समीक्षा करने, आंतरिक खामियों को चिह्नित करने और आगे की रणनीति तय करने के लिए विश्वविद्यालय प्रबंधन ने अधिकारियों की एक उच्च स्तरीय आपातकालीन बैठक भी आयोजित की है।
पुलिस में दर्ज कराई शिकायत, कुलसचिव ने दिए सख्त कार्रवाई के संकेत
घटनाक्रम पर बात करते हुए विश्वविद्यालय के कुलसचिव डॉ. कपिल देव दीपक ने कहा कि मामला बेहद संवेदनशील है और इसी वजह से परीक्षा को अविलंब निरस्त कर दिया गया है। उन्होंने बताया कि इस पूरे प्रकरण की आधिकारिक शिकायत पुलिस में दर्ज करा दी गई है ताकि आपराधिक पहलू की गहराई से जांच हो सके। कुलसचिव ने यह भी स्पष्ट किया कि संस्थान के भीतर कर्मचारियों की भूमिका की गहन जांच की जा रही है। इस धांधली में जो भी व्यक्ति, चाहे वह कितना भी प्रभावशाली क्यों न हो, दोषी पाया जाएगा, उसके खिलाफ कठोरतम कानूनी कदम उठाए जाएंगे।
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने गठित की 5 सदस्यीय जांच समिति
इस पूरे मामले की गूंज राज्य शासन तक पहुंच गई है। छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा कि यह मामला उनके संज्ञान में आया है और स्थिति को देखते हुए विश्वविद्यालय प्रशासन ने परीक्षा रद्द करने का फैसला लिया है। मुख्यमंत्री ने घोषणा की कि मामले की निष्पक्ष एवं विस्तृत जांच के लिए राज्य सरकार द्वारा एक 5 सदस्यीय जांच कमेटी का गठन किया गया है। उन्होंने भरोसा दिलाया है कि समिति की जांच रिपोर्ट सामने आने के बाद जो भी लोग इस गड़बड़ी के लिए जिम्मेदार पाए जाएंगे, उनके खिलाफ सख्त से सख्त दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी।



















