उत्तराखंड के शिक्षण तंत्र में बड़े सुधारों के बीच मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने राज्य के 26 मदरसों को नई शिक्षा नीति के तहत औपचारिक मान्यता प्रमाणपत्र प्रदान किए हैं। इन नए मदरसों को शामिल करने के साथ ही राज्य में नए शैक्षणिक ढांचे के अंतर्गत मान्यता प्राप्त मदरसों की कुल संख्या बढ़कर 33 हो गई है। राज्य सरकार द्वारा आयोजित इस आधिकारिक कार्यक्रम की शुरुआत राष्ट्रगान के साथ हुई और वंदे मातरम का पूरा गायन किया गया। समारोह में उपस्थित सभी मदरसा संचालकों तथा प्रतिनिधियों ने सम्मानपूर्वक खड़े होकर राष्ट्रीय गीत का गायन किया।
विज्ञान, गणित और एआई की पढ़ाई पर मुख्यमंत्री का जोर
समारोह को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि वर्तमान दौर में मदरसा छात्रों के लिए पारंपरिक तालीम के साथ-साथ विज्ञान, गणित और आधुनिक तकनीक का ज्ञान होना अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि बच्चे आधुनिक शैक्षणिक विषयों से वंचित रहेंगे तो वे वैश्विक प्रतिस्पर्धा में पिछड़ जाएंगे। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार का लक्ष्य हर बच्चे को गुणवत्तापूर्ण और सामयिक शिक्षा उपलब्ध कराना है ताकि उनका भविष्य उज्ज्वल हो सके।
राजनीतिक बयानों और आलोचनाओं पर बोलते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि विपक्षी दल उनकी सरकार की नीतियों को लेकर भ्रम फैलाने का प्रयास करते हैं और इसे अल्पसंख्यक विरोधी बताने की कोशिश करते हैं। हालांकि, उन्होंने स्पष्ट किया कि सरकार का रुख पूरी तरह से न्यायसंगत है। कानून के दायरे में रहकर काम करने वाले संस्थानों को पूरा सहयोग दिया जाएगा, जबकि केवल अवैध गतिविधियों में लिप्त पाए जाने वालों के विरुद्ध ही सख्त कानूनी कार्रवाई की जाती है।
अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण और अनिवार्य एनसीईआरटी पाठ्यक्रम
उत्तराखंड में मदरसों के इस प्रशासनिक पुनर्गठन की शुरुआत 1 जुलाई को हुई थी, जब राज्य सरकार ने पूर्ववर्ती मदरसा शिक्षा बोर्ड को भंग कर दिया था। इसके स्थान पर एक नया 'अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण' गठित किया गया, जिसके तहत राज्य के सभी मदरसों का पंजीकरण अनिवार्य कर दिया गया है। इस नए प्राधिकरण ने मदरसों के लिए एक अद्यतन पाठ्यक्रम तैयार किया है, जिसके अंतर्गत राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (एनसीईआरटी) का सिलेबस लागू किया गया है।
नए शैक्षणिक नियमों के तहत अब मदरसों में मजहबी शिक्षा के साथ-साथ विज्ञान, गणित, सामाजिक विज्ञान और अंग्रेजी जैसे प्रमुख विषयों का अध्यापन अनिवार्य कर दिया गया है। सरकार का मानना है कि इस व्यवस्था से मदरसा छात्रों की शैक्षणिक नींव मजबूत होगी और उन्हें मुख्यधारा के विद्यालयों के समकक्ष अवसर प्राप्त होंगे।
30 सितंबर तक पंजीकरण की सीमा और मदरसा संचालकों की प्रतिक्रिया
राज्य सरकार ने नए ढांचे के तहत सभी मदरसों के लिए पंजीकरण कराने की अंतिम तिथि 30 सितंबर निर्धारित की है। आंकड़ों के अनुसार, जब पुराना मदरसा बोर्ड कार्यरत था, तब राज्य में कुल 452 पंजीकृत मदरसे मौजूद थे। हालांकि, पिछले दो महीनों में लागू नई व्यवस्था के तहत अब तक केवल 33 मदरसों ने ही अपनी पंजीकरण प्रक्रिया पूरी की है।
इस नई नीति को लेकर मदरसा संचालकों के बीच मिला-जुला रुख देखने को मिल रहा है। कुछ मदरसा प्रबंधक नए नियमों का विरोध कर रहे हैं। उनका तर्क है कि मदरसों का प्राथमिक उद्देश्य मजहबी तालीम देना है और पाठ्यक्रम में बदलाव करने से इन संस्थानों की पारंपरिक पहचान और धार्मिक शिक्षा प्रभावित हो सकती है।
दूसरी ओर, आज मान्यता प्रमाणपत्र प्राप्त करने वाले मदरसा संचालकों ने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की नीति और नीयत की सराहना की। उन्होंने कहा कि बच्चों को आधुनिक और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिलने से उनका भविष्य संवरेगा। संचालकों का मानना है कि इस व्यवस्था से छात्रों को सरकारी योजनाओं और सुविधाओं का सीधा लाभ मिलेगा, और जो लोग इस व्यवस्था का विरोध कर रहे हैं वे अपने व्यक्तिगत कारणों से ऐसा कर रहे हैं।
उत्तराखंड वक्फ बोर्ड का फैसला: नए निकाहनामे से हटाए गए कॉलम
इसी शैक्षणिक और प्रशासनिक सुधार की कड़ी के बीच उत्तराखंड वक्फ बोर्ड ने भी एक बड़ा निर्णय लिया है। वक्फ बोर्ड ने राज्य के लिए एक नया निकाहनामा तैयार किया है। इस नए आधिकारिक निकाहनामा दस्तावेज में से दूसरे, तीसरे और चौथे निकाह से संबंधित कॉलम पूरी तरह से हटा दिए गए हैं, जिससे राज्य में विवाह पंजीकरण की प्रक्रिया में बदलाव आया है।



















