अंतरराष्ट्रीय मुद्रा बाजार में बुधवार को ब्रिटिश पाउंड में गिरावट दर्ज की गई। अमेरिकी डॉलर के मुकाबले पाउंड करीब 0.11 फीसदी टूटकर 1.3500 के स्तर पर कारोबार कर रहा है, जो पिछले तीन हफ्तों का सबसे निचला स्तर है। कारोबार के दौरान यह करेंसी 1.3520 के ऊपरी स्तर तक पहुंची थी, लेकिन बाद में दबाव में आ गई। दिलचस्प बात यह है कि अमेरिकी डॉलर इंडेक्स (DXY) में कमजोरी और अमेरिका के सुस्त रोजगार आंकड़ों के बावजूद पाउंड में यह गिरावट देखने को मिली है। वैश्विक निवेशक इस समय आर्थिक आंकड़ों से अधिक मध्य पूर्व के भू-राजनीतिक हालात और ऊर्जा कीमतों से उपजने वाले महंगाई के खतरों पर नजर बनाए हुए हैं।
मध्य पूर्व में बढ़ता सैन्य तनाव और ऊर्जा आधारित मुद्रास्फीति का डर
वैश्विक बाजारों में अनिश्चितता का सबसे बड़ा कारण मध्य पूर्व में जारी सैन्य संघर्ष है। बीते दो दिनों के भीतर अमेरिका और ईरान ने एक-दूसरे पर सैन्य हमले किए हैं। इस बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने स्पष्ट किया है कि ईरान अभी किसी भी कूटनीतिक समझौते के लिए तैयार नहीं दिखता। इसके साथ ही अमेरिकी विदेश विभाग ने मध्य पूर्व में अपने राजनयिक कर्मचारियों को वापस तैनात करने की योजनाओं पर फिलहाल रोक लगा दी है। इस कदम को इस बात का स्पष्ट संकेत माना जा रहा है कि दोनों देशों के बीच बातचीत के रास्ते अभी बंद हो चुके हैं।
इन सैन्य और कूटनीतिक झटकों के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल और ईंधन के दाम ऊंचे बने हुए हैं। बाजार विशेषज्ञों को डर है कि ऊर्जा कीमतों में यह तेजी दुनिया भर में मुद्रास्फीति की दूसरी लहर को जन्म दे सकती है। जब ऊर्जा महंगी होती है, तो परिवहन और उत्पादन लागत बढ़ती है, जिससे केंद्रीय बैंकों के लिए ब्याज दरों में कटौती करना मुश्किल हो जाता है। यही वजह है कि निवेशक सुरक्षित ठिकानों की ओर रुख कर रहे हैं और जोखिम वाली परिसंपत्तियों से पूंजी निकाल रहे हैं।
अमेरिका में निजी क्षेत्र की भर्ती सुस्त, ADP रिपोर्ट के आंकड़े निराशाजनक
अगर अमेरिकी अर्थव्यवस्था के आंतरिक आंकड़ों को देखें, तो निजी क्षेत्र में नौकरियों की स्थिति उम्मीद से कमजोर रही है। एडीपी एम्प्लॉयमेंट चेंज नेशनल रिपोर्ट के अनुसार, अगस्त महीने में अमेरिका के निजी क्षेत्र में केवल 38,000 नई नौकरियां जुड़ीं। यह आंकड़ा बाजार के 47,000 के अनुमान से काफी कम है। इससे पहले जुलाई महीने में भी निजी क्षेत्र की भर्ती का आंकड़ा 44,000 दर्ज किया गया था।
आमतौर पर जब अमेरिका में रोजगार के आंकड़े कमजोर आते हैं, तो अमेरिकी डॉलर पर दबाव बनता है और दूसरी प्रमुख करेंसी को मजबूती मिलती है। हालांकि इस बार डॉलर सूचकांक में सुस्ती के बावजूद पाउंड बढ़त हासिल नहीं कर सका। इससे पता चलता है कि फॉरेक्स ट्रेडर्स अमेरिकी अर्थव्यवस्था की सुस्ती से ज्यादा मध्य पूर्व के संकट और वैश्विक सप्लाई चेन पर पड़ने वाले इसके असर को लेकर चिंतित हैं।
ब्रिटेन का आगामी बजट और बैंक ऑफ इंग्लैंड की ब्याज दर नीति
ब्रिटेन के घरेलू आर्थिक मोर्चे पर भी कई अहम घटनाक्रम सामने आ रहे हैं। ब्रिटेन के वित्त मंत्री हीली ने घोषणा की है कि वह 28 अक्टूबर को बर्नहम का पहला बजट पेश करेंगे। वित्त मंत्री हीली ने स्पष्ट किया है कि वह पूर्व मंत्री रेचल रीव्स द्वारा तय किए गए सरकारी उधारी नियमों का सख्ती से पालन करेंगे। ब्रिटेन में राजकोषीय अनुशासन बनाए रखने की इस प्रतिबद्धता पर वित्तीय बाजारों की पैनी नजर बनी हुई है।
दूसरी ओर, ब्याज दरों को लेकर मुद्रा बाजार के ट्रेडर्स का मानना है कि बैंक ऑफ इंग्लैंड (BoE) इस साल के अंत में अपनी मौद्रिक नीति को सख्त कर सकता है। प्राइम टर्मिनल के आंकड़ों के मुताबिक, निवेशक उम्मीद जता रहे हैं कि बैंक ऑफ इंग्लैंड दिसंबर महीने में ब्याज दरों में 32 बेसिस पॉइंट की बढ़ोतरी कर सकता है। हालांकि, आर्थिक वृद्धि में सुस्ती और महंगाई के बीच संतुलन बनाना ब्रिटेन के केंद्रीय बैंक के लिए एक चुनौतीपूर्ण काम साबित हो रहा है।
GBP/USD का तकनीकी विश्लेषण: रेजिस्टेंस और सपोर्ट के मुख्य स्तर
तकनीकी चार्ट पर नजर डालें तो GBP/USD जोड़ी में पिछले कुछ दिनों से लगातार बिकवाली का दबाव देखा जा रहा है। बुधवार के कारोबारी सत्र के दौरान यह जोड़ी 1.3470 के चार हफ्ते के निचले स्तर तक गिर गई थी, जहां से थोड़ा बाउंस बैक देखने को मिला। ऊपर की ओर पहला रुकावट स्तर यानी इमीडिएट रेजिस्टेंस 1.3508 के आसपास है, जो पहली ट्रेंड लाइन से जुड़ा है। इसके बाद अगला रेजिस्टेंस 1.3544 पर देखा जा रहा है।
यदि पाउंड इन दोनों स्तरों को पार करने में सफल रहता है, तो फिर 1.3606 और 1.3631 के स्तरों की ओर बढ़त देखने को मिल सकती है, जो पहले सपोर्ट का काम कर रहे थे लेकिन अब रेजिस्टेंस में तब्दील हो चुके हैं। दूसरी तरफ, नीचे की ओर पहला मजबूत सपोर्ट 1.3442 के आसपास क्लस्टर्ड सिंपल मूविंग एवरेज द्वारा प्रदान किया जा रहा है। अगर यह करेंसी जोड़ी इस सपोर्ट जोन के नीचे दैनिक क्लोजिंग देती है, तो वर्तमान सुधारात्मक ढांचा कमजोर पड़ जाएगा और गिरावट अधिक गहरी हो सकती है।
ग्लोबल फॉरेक्स और कमोडिटी मार्केट: यूरो, सोना और कच्चे तेल की चाल
ब्रिटिश पाउंड के अलावा अन्य प्रमुख वैश्विक परिसंपत्तियों में भी बुधवार को मिला-जुला रुझान देखने को मिला। यूरो और डॉलर की जोड़ी (EUR/USD) यूरोपीय बाजारों की समाप्ति के बाद 1.1600 के करीब उतार-चढ़ाव करती दिखी। इससे पहले यह जोड़ी 1.1560 के दो हफ्ते के निचले स्तर तक गिर गई थी, लेकिन डॉलर की सुस्ती के सहारे इसमें थोड़ा सुधार आया। करेंसी हीट मैप के अनुसार, बुधवार को ब्रिटिश पाउंड ने न्यूजीलैंड डॉलर (NZD) के मुकाबले सबसे ज्यादा मजबूती का प्रदर्शन किया।
कमोडिटी बाजार में सोने में तेजी दर्ज की गई। पीली धातु ने अपनी पुरानी बढ़त को वापस हासिल करते हुए 4,400 डॉलर प्रति ट्रॉय औंस के स्तर की ओर कदम बढ़ा दिए हैं। अमेरिकी डॉलर में नरमी, वैश्विक तनाव और अमेरिकी ट्रेजरी प्रतिफल में उतार-चढ़ाव के कारण सोने को निवेशकों का समर्थन मिल रहा है। कच्चा तेल (WTI) लगातार तीसरे दिन और पिछले छह में से पांचवें दिन बढ़त के साथ कारोबार करता दिखा। एशियाई सत्र में यह 24 जुलाई के बाद के अपने उच्चतम स्तर पर पहुंच गया।
डीजल क्रैक स्प्रेड में रिकॉर्ड उछाल और क्रिप्टोकरेंसी बाजार में गिरावट
ऊर्जा बाजार में केवल कच्चे तेल के दाम ही नहीं बढ़ रहे हैं, बल्कि प्रसंस्कृत ईंधन की स्थिति और भी गंभीर बनी हुई है। अमेरिका में डीजल क्रैक स्प्रेड, यानी WTI कच्चे तेल के मुकाबले अल्ट्रा-लो सल्फर डीजल फ्यूचर्स का प्रीमियम, इतिहास में पहली बार 100 डॉलर प्रति बैरल के पार निकल गया है। इंट्राडे कारोबार के दौरान यह 102.00 डॉलर प्रति बैरल के रिकॉर्ड स्तर को छू गया, जो रिफाइनिंग मार्जिन में भारी दबाव और डीजल की आपूर्ति में कमी का संकेत देता है।
इसके विपरीत, क्रिप्टोकरेंसी बाजार में बुधवार को बिकवाली का दौर देखने को मिला। निवेशक अनिश्चित वैश्विक माहौल के कारण सतर्क रुख अपना रहे हैं। बिटकॉइन (BTC) अपने अल्पकालिक सपोर्ट 77,000 डॉलर के करीब समेकित हो रहा है। एथेरियम (ETH) में भी गिरावट दर्ज की गई और यह 2,400 डॉलर के स्तर की ओर खिसक गया। इसी तरह रिपल (XRP) में भी कमजोरी का रुख बना हुआ है।


















