देश में राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा-स्नातक (नीट-यूजी) के संचालन को डिजिटल रूप में ढालने और इसमें व्यापक सुधार लाने के लिए गठित समिति पर उच्चतम न्यायालय अपनी नज़र रखेगा। सोमवार को एक याचिका पर सुनवाई करते हुए शीर्ष अदालत ने स्पष्ट किया कि नंदन नीलेकणि की अगुवाई वाले उच्चस्तरीय कार्यबल के सुझावों का बारीकी से अध्ययन किया जाएगा। अदालत ने माना कि पारंपरिक तरीके को छोड़कर ऑनलाइन परीक्षा अपनाते समय मजबूत सुरक्षा इंतजाम बेहद जरूरी हैं।
ऑनलाइन परीक्षा व्यवस्था के लिए साइबर और डेटाबेस सुरक्षा पर ज़ोर
न्यायमूर्ति पीएस नरसिम्हा और न्यायमूर्ति आलोक अराधे की पीठ ने मामले की सुनवाई के दौरान कहा कि ऑफलाइन परीक्षा से ऑनलाइन (कंप्यूटर आधारित) माध्यम में जाने के लिए पारंपरिक तरीकों से हटकर नए सोच की आवश्यकता है। पीठ ने टिप्पणी की, “हमें साइबर सुरक्षा और डेटाबेस सुरक्षा के मामले में कुछ अतिरिक्त सुरक्षा उपाय करने की जरूरत है।” अदालत ने स्पष्ट माना कि लाखों छात्रों के भविष्य से जुड़ी इस परीक्षा में किसी भी तरह की तकनीकी या सुरक्षा चूक की गुंजाइश नहीं छोड़ी जा सकती।
यह सुनवाई राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के सांसद सुधाकर सिंह द्वारा दायर याचिका पर हो रही थी। उन्होंने नीट-यूजी परीक्षा के पर्चे लीक होने के दावों के बाद पूरी प्रक्रिया को रद्द करने और फिर से परीक्षा आयोजित कराने की मांग की थी।
तुषार मेहता ने दी पीएम द्वारा घोषित उच्चस्तरीय समिति की जानकारी
केंद्र सरकार की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अदालत को बताया कि सरकार इस मुद्दे को लेकर पूरी तरह गंभीर है। उन्होंने कहा कि खुद प्रधानमंत्री ने इस उच्चस्तरीय समिति के गठन का ऐलान किया था, ताकि परीक्षा प्रणाली को फुलप्रूफ बनाया जा सके। प्रौद्योगिकी विशेषज्ञ नंदन नीलेकणि को इस टास्क फोर्स की जिम्मेदारी सौंपी गई है।
सॉलिसिटर जनरल ने समिति के अन्य प्रमुख सदस्यों के नाम भी अदालत के समक्ष रखे
- एस सोमनाथ, भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) के पूर्व प्रमुख
- तपन डेका, खुफिया ब्यूरो (आईबी) के पूर्व निदेशक
- वी कामाकोटी, भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) मद्रास के निदेशक
- अनीता करवाल, पूर्व शिक्षा सचिव
- अमृत लाल मीणा, रसद (लॉजिस्टिक्स) मामलों के विशेषज्ञ
नीट विवाद का घटनाक्रम और सीबीआई जांच का मौजूदा स्तर
नीट-यूजी विवाद की शुरुआत 3 मई को आयोजित परीक्षा के साथ हुई थी, जिसमें प्रश्नपत्र लीक की शिकायतें सामने आई थीं। इसके बाद राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (एनटीए) ने 12 मई को परीक्षा निरस्त करने का निर्णय लिया और 21 जून को पुनः परीक्षा कराई। इस पूरे प्रकरण में धांधली के आपराधिक पहलुओं का खुलासा करने के लिए केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) अपनी छानबीन जारी रखे हुए है।
इस बीच, याचिकाकर्ता सुधाकर सिंह ने 21 जून की पुनः परीक्षा को सीबीटी (कंप्यूटर आधारित टेस्ट) मोड में कराने के लिए अर्जेंट सुनवाई की मांग की थी, जिसे सर्वोच्च अदालत ने 1 जून को खारिज कर दिया था। उच्चतम न्यायालय ने अब इस मुख्य याचिका को 3 अगस्त को अगली सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया है।



















