दक्षिण कोरियाई सीमा पर उत्तर कोरिया की हलचल, तोपों की तैनाती से बढ़ा तनावरणबीर कपूर की 'रामायण' के खौफ से टली अंशुमान झा की 'लकड़बग्घा 2', जानिए अब कब आएगी फिल्मसावन पुत्रदा एकादशी 5 अगस्त को, संतान प्राप्ति के लिए इस शुभ योग में करें पूजाचक्रवाती तूफान अर्नब की आहट से सहमा रेल यातायात, 6 राज्यों में दर्जनों एक्सप्रेस व पैसेंजर ट्रेनें रद्दमैक्सिकन पेसो में हालिया तेज गिरावट अब सीमित रहने के आसार, कमर्जबैंक का आकलनरिज़र्व बैंक ऑफ़ न्यूज़ीलैंड 3 प्रतिशत कर सकता है ब्याज दर, मुद्रास्फीति और वैश्विक दबावों के बीच नीतिगत समीक्षा पर टिकी नज़रेंसेंट टेरेसा में रहस्यमयी मौत और जानलेवा खेल, शनाया कपूर का डबल रोल थ्रिलर 'स्टूडेंट ऑफ द ईयर: आफ्टर डार्क' का वीडियो सामने आयाफर्रुखाबाद के इस प्राचीन शिव मंदिर में एक साथ होते हैं बारह ज्योतिर्लिंगों के दर्शन, महाभारत काल से जुड़ा है गहरा इतिहासअमेरिकी डॉलर के मुकाबले मेक्सिको का पेसो फिसला, 18.60 का स्तर पार करने के बाद कैरी ट्रेड का आकर्षण घटापुणे प्लांट में बनने लगी लैंड रोवर डिफेंडर, कीमतों में 34 लाख रुपये तक की भारी कटौती
1983 के जिस सदाबहार रोमांटिक गाने ने मचाया था धमाल, वही 27 साल बाद बना दिया गया था जनाजे का मातममनोरंजन
1 सित॰ 2026, 9:08 am (57 दिन पहले)· 3

1983 के जिस सदाबहार रोमांटिक गाने ने मचाया था धमाल, वही 27 साल बाद बना दिया गया था जनाजे का मातम

साल 1983 की फिल्म ‘एक जान हैं हम’ का मशहूर गाना ‘याद तेरी आएगी’ अपने दौर में बहुत लोकप्रिय हुआ था। करीब सत्ताईस साल बाद निर्देशक अनुराग कश्यप ने अपनी फिल्म ‘गैंग्स ऑफ वासेपुर 2’ में इस प्रेम गीत का ऐसा अलग इस्तेमाल किया कि यह एक खौफनाक जनाजे का मातम बन गया।

सिनेमा की दुनिया में कुछ ऐसे अमर गीत रच दिए जाते हैं जो वक्त के साथ अपनी चमक नहीं खोते। आज से चार दशक पहले जब एक दिल को छू लेने वाला रोमांटिक नगमा सिल्वर स्क्रीन पर गूंजा था, तब शायद ही किसी ने यह कल्पना की होगी कि आने वाले समय में इसका रूप पूरी तरह बदल जाएगा। प्रेम और जुदाई के दर्द को बयां करने वाला वही मधुर गीत आगे चलकर मौत और खौफ के साये में एक मातम का प्रतीक बन जाएगा। इस अनोखे संगीत प्रयोग ने साबित कर दिया कि जब कला सही हाथों में पड़ती है, तो वह हर माहौल में ढल सकती है।

इस पूरे सफर की शुरुआत होती है वर्ष 1983 से, जब निर्माता-निर्देशक राजीव मेहरा अपनी रोमांटिक ड्रामा फिल्म ‘एक जान हैं हम’ लेकर दर्शकों के सामने आए थे। इसी फिल्म के जरिए कपूर खानदान के राजीव कपूर ने बड़े पर्दे पर अपनी शुरुआत की थी, जबकि अभिनेत्री दिव्या राणा ने भी अपना पहला कदम रखा था। इस मल्टीस्टारर फिल्म में शम्मी कपूर, तनुजा और प्राण जैसे दिग्गज कलाकार भी शामिल थे। फिल्म की कुल अवधि दो घंटे इकतीस मिनट की थी, जिसमें युवा संगीतकार अनु मलिक ने सुरीले संगीत की रचना की थी और गीतकार आनंद बख्शी ने इसके भावुक बोल लिखे थे।

ये भी पढ़ें

फिल्म के सभी गानों को काफी सराहना मिली, लेकिन जिस एक ट्रैक ने पूरे देश में तहलका मचा दिया, वह था ‘याद तेरी आएगी, मुझे बड़ा सताएगी’। इस गाने को अपनी भारी और असरदार आवाज से सजाया था गायक शब्बीर कुमार ने। अस्सी के दशक के शुरुआती सालों में शब्बीर कुमार की आवाज टूटे दिलों की दास्तां बयां करने का पर्याय बन चुकी थी। प्रेमिका से दूर होने के दर्द को जिस गहराई से इस गाने में पिरोया गया था, उसने इसे हर रेडियो स्टेशन और कैसेट प्लेयर की शान बना दिया। यह गाना उस साल का सबसे बड़ा चार्टबस्टर साबित हुआ। फिल्म की कहानी में राजीव कपूर ने विक्रम सक्सेना का किरदार निभाया था और दिव्या राणा सीमा सिंह के रूप में नजर आई थीं, जबकि शम्मी कपूर और प्राण ने उनके पिताओं की भूमिकाएं अदा की थीं।

वक्त का पहिया आगे घुमा और नब्बे के दशक के बाद सिनेमा का मिजाज पूरी तरह बदल गया। अस्सी के दशक की वह सादगी भरी रोमानियत आधुनिक दौर के शोरगुल में कहीं पीछे छूट गई। लेकिन साल 2012 में निर्देशक अनुराग कश्यप अपनी कल्ट-क्लासिक फिल्म ‘गैंग्स ऑफ वासेपुर 2’ के साथ सिनेमाघरों में उतरे। वासेपुर की गोलियों, बारूद, गैंगवार और खून-खराबे की उस दुनिया में जब एक बेहद संवेदनशील और गहरे दर्द वाले दृश्य को पर्दे पर उतारने की बारी आई, तो उन्होंने उसी सत्ताईस साल पुराने रोमांटिक गाने को चुनने का दुस्साहस किया।

‘गैंग्स ऑफ वासेपुर’ अपनी अनूठी कहानी और यादगार किरदारों के लिए हमेशा याद रखी जाती है। इस फिल्म के दूसरे हिस्से में सरदार खान यानी मनोज बाजपेयी के अंतिम यात्रा के दृश्य को एक अलग ही अंदाज में फिल्माया गया। गमगीन माहौल के बीच जिस तरह से इस पुराने गाने का इस्तेमाल किया गया, उसने उस गंभीर सीन में एक अजीब सा व्यंग्य और गहराव घोल दिया। यशपाल शर्मा की नाटकीय गायकी ने उस पूरे दृश्य को एक ऐसा रंग दिया जिसे दर्शक कभी भुला नहीं पाए।

जहाँ मूल रूप से यह गीत दो प्रेमियों के बिछड़ने के गम में गाया गया था, वहीं बाद में यह किसी अपने को खोने के मातम और खूनी संघर्ष के अंजाम की दाستان बन गया। अनुराग कश्यप का यह सिनेमाई प्रयोग बेहद चौंकाने वाला था। फिल्मों में अमूमन मातम के वक्त उदास धुनें या रुदाली संगीत ही बजाया जाता है, लेकिन यहाँ एक पुराने रोमांटिक नगमे ने उस दृश्य को अमर कर दिया। जनाजे के साथ चलती भीड़ और पृष्ठभूमि में बजता यह गाना यह साबित करने के लिए काफी था कि बेहतरीन संगीत की कोई सीमा नहीं होती।

सवाल-जवाब

यह गाना मूल रूप से किस फिल्म का है?
यह गाना 1983 की फिल्म ‘एक जान हैं हम’ का है।
इस गाने को किसने गाया था?
इस गाने को अपनी भारी आवाज में गायक शब्बीर कुमार ने गाया था।
इस गाने के संगीतकार और गीतकार कौन थे?
इस गाने का संगीत अनु मलिक ने तैयार किया था और इसके बोल आनंद बख्शी ने लिखे थे।
किस फिल्म में इस गाने का इस्तेमाल जनाजे के सीन में किया गया था?
अनुराग कश्यप की फिल्म ‘गैंग्स ऑफ वासेपुर 2’ में इस गाने का इस्तेमाल सरदार खान की अंतिम यात्रा के दौरान किया गया था।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 0

अभी तक कोई टिप्पणी नहीं — पहली टिप्पणी आपकी हो!

नागरिक पत्रकारिता

TrendKia पत्रकार बनें

जनता की आवाज़

अपने आसपास की ख़बरें, तस्वीरें और वीडियो ट्रेंडकिआ के साथ साझा करें और अपनी आवाज़ देश तक पहुँचाएँ। हर नागरिक एक पत्रकार।

अभी जुड़ें
CH 01 लाइव
TrendKia TV ON AIR
Chamar no WhatsApp