कोरियाई प्रायद्वीप में एक बार फिर सरगर्मी तेज हो गई है क्योंकि उत्तर कोरिया ने अपनी सीमा के पास भारी सैन्य साजो-सामान और सैनिकों की गतिविधियां बढ़ा दी हैं। दक्षिण कोरिया की एक वेधशाला से आने-जाने वाले लोगों ने सीमावर्ती इलाकों में संदिग्ध बख्तरबंद वाहनों को देखा है, जिनकी तोपों का रुख सीधे दक्षिण कोरिया की तरफ है। शुरुआती दिनों में केवल एक वाहन दिखाई दिया था, लेकिन कुछ ही दिनों में इनकी संख्या बढ़कर तीन हो गई है। इसके साथ ही, दर्जनों उत्तर कोरियाई सैनिक संवेदनशील सीमा के पास बाड़ लगाने के काम में जुटे हुए नजर आए हैं, जिससे दोनों पड़ोसी देशों के बीच कूटनीतिक और सैन्य मोर्चे पर तनाव और अधिक गहरा गया है।
सीमा पर तैनात हुईं 122 मिमी की तोपें
सीमा के पास नजर आए इन सैन्य वाहनों की पहचान 122 मिमी की सेल्फ-प्रोपेल्ड होवित्जर तोपों के रूप में की जा रही है, जो उत्तर कोरिया के पुराने तोपखाना तंत्र का हिस्सा हैं। इन हथियारों को अस्सी के दशक के अंतिम वर्षों में सेना में शामिल किया गया था और इनकी मारक क्षमता लगभग चौबीस किलोमीटर तक की मानी जाती है। इस दायरे में दक्षिण कोरिया का जिम्पो शहर भी शामिल है, जहां से उत्तर कोरियाई गतिविधियों पर करीब से नजर रखी जाती है। हालांकि सामरिक दृष्टि से इन्हें नए हथियारों जितना आधुनिक और घातक नहीं माना जाता, फिर भी इनकी खुली तैनाती ने स्थानीय स्तर पर सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
वेधशाला से पर्यटकों ने देखा सैन्य प्रदर्शन
दक्षिण कोरिया के एगीबोंग ऑब्जर्वेटरी से उत्तर कोरिया का काएफुंग क्षेत्र महज 1.2 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है, जहां से यह सैन्य जमावड़ा साफ दिखाई दे रहा है। वियतनाम युद्ध में हिस्सा ले चुके 83 साल के जंग गिल-सियोंग भी इस वेधशाला का दौरा करने पहुंचे थे। उन्होंने कहा कि इन हथियारों को सामने देखने के बाद खतरे का अहसास और ज्यादा गहरा हो गया है। सीमावर्ती इलाकों में इस तरह के तनाव के बावजूद पर्यटकों का आना-जाना जारी है और वेधशाला अब भी पर्यटकों के बीच काफी लोकप्रिय बनी हुई है। कनाडा से आईं 28 साल की पर्यटक हन्ना रॉबिंस ने बताया कि जब उनके गाइड ने इस सैन्य तैनाती के बारे में जानकारी दी, तो उनके पूरे समूह में डर का माहौल बन गया था। हालांकि गाइड ने उन्हें शांत रहने की सलाह दी थी और आश्वस्त किया था कि उत्तर कोरियाई सेना गोलीबारी की पहल नहीं करेगी, लेकिन इसके बावजूद पर्यटकों के मन में आशंकाएं बनी हुई हैं।
सैन्य विशेषज्ञ का आकलन और आधिकारिक प्रतिक्रिया
सियोल स्थित आसन इंस्टीट्यूट फॉर पॉलिसी स्टडीज से जुड़े सैन्य विशेषज्ञ यांग उक का मानना है कि इन तोपों की मौजूदगी को किसी बड़े सैन्य हमले की तैयारी की बजाय केवल अपनी ताकत के प्रदर्शन का जरिया माना जाना चाहिए। उनका कहना है कि इन वाहनों को जानबूझकर ऐसी खुली जगहों पर खड़ा किया गया है, ताकि दक्षिण कोरियाई पक्ष और आम लोग इन्हें आसानी से देख सकें। दूसरी ओर, दक्षिण कोरिया के ज्वाइंट चीफ्स ऑफ स्टाफ के प्रवक्ता जांग दो-यंग ने स्पष्ट किया कि उत्तर कोरिया ने हाल ही में अपने बयानों में कई अत्याधुनिक हथियार प्रणालियों का दावा किया है, लेकिन सीमा पर तैनात इन पुरानी तोपों को उन नए हथियारों की श्रेणी में नहीं रखा जा सकता है।
























