सनातन धर्म में सभी तिथियों में एकादशी तिथि का विशेष महत्व है। एकादशी का दिन जगत के पालनहार भगवान विष्णु को समर्पित माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस पवित्र तिथि पर व्रत रखकर विधि-विधान से लक्ष्मी नारायण की पूजा-अर्चना करने से साधक के सभी कष्ट दूर हो जाते हैं और उसकी समस्त मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं। विशेष रूप से, सावन मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी का महत्व और भी अधिक बढ़ जाता है, क्योंकि इस दिन देवों के देव महादेव और भगवान विष्णु दोनों की एक साथ कृपा प्राप्त करने का उत्तम अवसर मिलता है। इस वर्ष सावन पुत्रदा एकादशी की तिथि, शुभ मुहूर्त और पूजा-विधि को लेकर देवघर के एक प्रतिष्ठित ज्योतिषाचार्य ने विस्तार से जानकारी दी है।
देवघर के ज्योतिषाचार्य ने दी व्रत की जानकारी
देवघर के पागल बाबा आश्रम परिसर में स्थित मुद्गल ज्योतिष केंद्र के जाने-माने ज्योतिषाचार्य पंडित नंदकिशोर मुद्गल ने बातचीत के दौरान बताया कि सावन का पूरा महीना भगवान शिव को समर्पित होता है। ऐसे में यदि इस पावन मास में भगवान विष्णु की भी आराधना की जाए, तो इसका कई गुना अधिक फल प्राप्त होता है। इससे भगवान शिव और भगवान विष्णु दोनों की संयुक्त कृपा बरसती है। सावन महीने के शुक्ल पक्ष की एकादशी को मुख्य रूप से पुत्रदा एकादशी के नाम से जाना जाता है। पंचांग के अनुसार, इस वर्ष पुत्रदा एकादशी का व्रत आगामी 5 अगस्त को रखा जाएगा।
पुत्रदा एकादशी की तिथि और शुभ मुहूर्त
ज्योतिषाचार्य के अनुसार, ऋषिकेश पंचांग की गणना के मुताबिक, सावन मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि का आरंभ 4 अगस्त को दोपहर 11 बजकर 14 मिनट से हो रहा है। वहीं, इस तिथि का समापन अगले दिन यानी 5 अगस्त को दोपहर 1 बजकर 12 मिनट पर होगा। उदयातिथि के आधार पर व्रत 5 अगस्त को ही मान्य होगा।
बन रहे हैं खास योग और भद्रा का साया
इस वर्ष सावन शुक्ल पक्ष की पुत्रदा एकादशी के पावन अवसर पर इंद्र योग और रवि योग का अत्यंत दुर्लभ और शुभ संयोग बन रहा है। हालांकि, इस दिन भद्रा का साया भी रहेगा, और शास्त्रों के अनुसार भद्रा काल में पूजा-पाठ या मांगलिक कार्य करने की मनाही होती है। पंचांग के अनुसार, भद्रा 5 अगस्त को सुबह 5 बजकर 23 मिनट से शुरू होकर उसी दिन सुबह 11 बजकर 33 मिनट तक प्रभावी रहेगी। इसके साथ ही इस दिन शिववास का भी विशेष संयोग रहेगा, जिसे बहुत ही शुभ माना जाता है। इस दौरान भगवान भोलेनाथ अपने वाहन नंदी के साथ कैलाश पर्वत पर विराजमान रहेंगे, जिससे साधकों को पूजा का दोगुना फल मिलेगा।
संतान प्राप्ति के लिए करें यह विशेष उपाय
जिन दंपतियों को संतान सुख की प्राप्ति में बाधा आ रही है या जो संतान की कामना रखते हैं, उनके लिए यह व्रत किसी वरदान से कम नहीं है। ज्योतिषाचार्य का कहना है कि पुत्रदा एकादशी के दिन संतान की इच्छा रखने वाले दंपतियों को उपवास रखना चाहिए। इसके बाद एक साफ पात्र में गंगाजल भरकर “ॐ नमः शिवाय” मंत्र का उच्चारण करते हुए शिवलिंग पर जलाभिषेक करना चाहिए। इसके साथ ही भगवान लक्ष्मी नारायण की भी सच्चे मन से पूजा करनी चाहिए। ऐसा करने से भक्तों की सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं और जल्द ही सूनी गोद भर जाती है।



















