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50 की उम्र में चमकी सुविंदर विक्की की किस्मत, जानिए 5 हजार रुपये लेकर मुंबई पहुंचे अभिनेता का बीमा बेचने से आवारापन 2 तक का प्रेरक सफरमनोरंजन
19 अग॰ 2026, 8:12 am (2 घंटे पहले)· 1

50 की उम्र में चमकी सुविंदर विक्की की किस्मत, जानिए 5 हजार रुपये लेकर मुंबई पहुंचे अभिनेता का बीमा बेचने से आवारापन 2 तक का प्रेरक सफर

थिएटर से मिले 5,000 रुपये लेकर मुंबई आए सुविंदर विक्की को शुरुआती दिनों में पेट पालने के लिए इंश्योरेंस पॉलिसी तक बेचनी पड़ी थी, लेकिन 50 साल की उम्र में 'कोहरा' और अब 'आवारापन 2' से उन्हें देशभर में बड़ी पहचान मिली है।

मायानगरी मुंबई का सपना हर साल हजारों युवा आंखों में सजाते हैं, लेकिन मनोरंजन उद्योग की इस चकाचौंध के पीछे का कठिन संघर्ष हर किसी के बस की बात नहीं होती। अनगिनत लोग कुछ समय कोशिश करने के बाद निराश होकर अपने घर लौट जाते हैं, लेकिन कुछ ऐसे भी जुनूनी कलाकार होते हैं जो विपरीत परिस्थितियों के आगे कभी घुटने नहीं टेकते। अभिनेता सुविंदर विक्की की कहानी भी कुछ ऐसी ही अडिग निष्ठा और निरंतर प्रयास की मिसाल है। हाल ही में इमरान हाशमी स्टारर फिल्म 'आवारापन 2' में अपने शानदार अभिनय से दर्शकों और समीक्षकों का दिल जीतने वाले सुविंदर विक्की को यह मुकाम रातों-रात नहीं मिला है। इस मुकाम तक पहुंचने के पीछे कई दशकों का कड़ा परिश्रम, आर्थिक तंगी का दर्द और अभिनय के प्रति एक कभी न टूटने वाला जज्बा शामिल है। 50 साल की उम्र में अपनी वास्तविक पहचान बनाने वाले सुविंदर ने साबित कर दिया है कि लगन और प्रतिभा के आगे उम्र केवल एक संख्या मात्र है।

5,000 रुपये के साथ मुंबई आगमन और शुरुआती दिनों की दुश्वारियां

पंजाब के एक बेहद साधारण और मध्यमवर्गीय परिवार में जन्मे सुविंदर विक्की को बचपन के दिनों से ही अभिनय का गहरा शौक था। रंगमंच और कला के प्रति इसी जुड़ाव के कारण उन्होंने पटियाला स्थित प्रतिष्ठित पंजाबी यूनिवर्सिटी से 'थिएटर एंड टेलीविजन' विषय में एमए की पढ़ाई पूरी की। अपनी पढ़ाई पूरी करने के बाद उनका भी एक ही सपना था कि वे देश की आर्थिक और मनोरंजन राजधानी मुंबई जाकर एक स्थापित अभिनेता के रूप में अपनी पहचान बनाएं।

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सुविंदर विक्की ने एक बातचीत के दौरान अपने उन शुरुआती संघर्षों का जिक्र करते हुए बताया था कि जब वे छात्र थे, तब उन्हें एक थिएटर नाटक में अभिनय करने के बदले 5,000 रुपये का पारिश्रमिक मिला था। अपनी जिंदगी की इस पहली बड़ी कमाई को जेब में रखकर वे बड़े-बड़े सपने लिए मुंबई की ट्रेन में सवार हो गए थे। हालांकि, मुंबई जैसे महंगे शहर की वास्तविकताओं का सामना करते ही उनकी यह छोटी सी रकम कुछ ही दिनों के भीतर पूरी तरह खत्म हो गई। स्थिति इतनी गंभीर हो गई कि उनके पास रोजाना के भोजन के लिए भी पैसे नहीं बचे और खाने के लाले पड़ गए। नतीजतन, मुंबई पहुंचने के महज एक महीने के भीतर ही उन्हें खाली हाथ और निराश होकर पंजाब वापस लौटने के लिए मजबूर होना पड़ा।

गुजारे के लिए बेची इंश्योरेंस पॉलिसी और पंजाबी फिल्मों में साइड रोल का लंबा दौर

मुंबई से वापस लौटने के बाद अपने दैनिक जीवन का खर्च चलाने और परिवार पर बोझ न बनने के लिए सुविंदर विक्की को इंश्योरेंस एजेंट के रूप में काम करना पड़ा। उन्होंने घर-घर जाकर इंश्योरेंस पॉलिसी बेचने का काम किया, लेकिन इस दौरान भी उनके भीतर का कलाकार कभी शांत नहीं हुआ। आर्थिक तंगी के बावजूद उन्होंने अपने अभिनय के जुनून को कभी मंद नहीं पड़ने दिया। साल 2004 में आई फिल्म 'देश होया परदेस' से उन्होंने पेशेवर तौर पर अपने सिनेमाई सफर की शुरुआत की।

इस शुरुआत के बाद भी सुविंदर विक्की का रास्ता आसान नहीं था। लगभग एक पूरे दशक यानी 10 सालों तक वे पंजाबी सिनेमा में छोटे-मोटे सपोर्टिंग रोल्स तक ही सीमित रहे। फिल्मों में उन्हें मुख्य रूप से चाचा, मामा या किसी रिश्तेदार के छोटे किरदार दिए जाते थे। हिंदी सिनेमा में कदम रखने का मौका उन्हें पहली बार शाहिद कपूर स्टारर फिल्म 'उड़ता पंजाब' में मिला, जहां उन्होंने एक बेहद छोटा सा किरदार निभाया था। इसके बाद वे अक्षय कुमार की मुख्य भूमिका वाली पीरियड ड्रामा फिल्म 'केसरी' में भी एक संक्षिप्त रोल में नजर आए। हालांकि ये भूमिकाएं बहुत छोटी थीं, लेकिन सुविंदर ने कभी किसी काम को छोटा नहीं समझा और लगातार उद्योग में सक्रिय रहकर अपनी कला को तराशते रहे।

पारिवारिक पृष्ठभूमि, पिता का प्रभाव और अभिनय के प्रति अडिग समर्पण

यद्यपि शुरुआती दौर के छोटे-मोटे रोल्स सुविंदर विक्की को राष्ट्रीय स्तर पर बड़ी पहचान नहीं दिला पा रहे थे, फिर भी वे इनके जरिए फिल्म उद्योग से मजबूती से जुड़े रहे। अपने संघर्ष के दिनों को याद करते हुए सुविंदर ने एक बार साझा किया था कि अभिनय कोई सामान्य 9 से 5 की निर्धारित नौकरी नहीं है, जिसमें हर महीने निश्चित वेतन मिलता रहे। उनके परिवार में हमेशा से यही परंपरा रही थी कि या तो अपनी पुश्तैनी खेती-बाड़ी संभाल ली जाए या फिर कोई सुरक्षित और पक्की सरकारी या निजी नौकरी कर ली जाए।

सौभाग्य से सुविंदर के पिता जी के पास एक पक्की नौकरी थी, और वे स्वयं अपने शौक के रूप में नाटकों में अभिनय किया करते थे। सुविंदर को अभिनय का यह गहरा जुनून अपने पिता से ही विरासत में प्राप्त हुआ था। उन्होंने बताया कि उन्होंने अपने जीवन में एक बार जबरदस्ती बीच का रास्ता निकालने की कोशिश भी की थी ताकि वे कोई नियमित नौकरी कर सकें और अभिनय को केवल एक शौक की तरह रखें। हालांकि, जैसे ही उनके मन में अभिनय के अलावा कोई और काम करने का विचार आता था, उन्हें अंदर से बेहद बेचैनी और घबराहट होने लगती थी। जहां अधिकांश लोग अवसरों की कमी के चलते थक-हारकर अपने सपनों को छोड़ देते हैं, वहीं सुविंदर ने परिस्थितियों से कभी समझौता नहीं किया।

50 साल की उम्र में 'कोहरा' से बदली किस्मत और करण जौहर की प्रशंसा

सालों के धैर्य और निरंतर साधना के बाद आखिरकार वह ऐतिहासिक क्षण आया जिसने सुविंदर विक्की के जीवन और करियर को हमेशा के लिए बदलकर रख दिया। 50 साल की उम्र में ओटीटी प्लेटफॉर्म नेटफ्लिक्स पर रिलीज हुई क्राइम थ्रिलर वेब सीरीज 'कोहरा' में उनके द्वारा निभाए गए जटिल और ग्रे शेड किरदार ने दर्शकों के साथ-साथ समीक्षकों को भी दंग कर दिया। पंजाब की पृष्ठभूमि पर आधारित इस सीरीज में उनके दमदार और शांत अभिनय की चौतरफा तारीफ हुई।

सुविंदर के इस प्रदर्शन से प्रभावित होकर मशहूर बॉलीवुड निर्देशक और निर्माता करण जौहर ने खुद अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर एक भावुक पोस्ट साझा की थी। करण जौहर ने लिखा था कि वे सुविंदर विक्की की परफॉरमेंस देखकर पूरी तरह हैरान रह गए हैं और वे उन्हें साल 2023 की सबसे बेहतरीन खोज मानते हैं। करण ने आगे यह भी कहा था कि सुविंदर के चेहरे की खामोशी में इतनी गहरी ताकत और अभिव्यक्ति है कि उस पर दर्जनों कहानियां और स्क्रिप्ट्स लिखी जा सकती हैं। 'कोहरा' ने सुविंदर विक्की को भारतीय ओटीटी स्पेस का एक प्रमुख चेहरा बना दिया और उन्हें घर-घर में व्यापक पहचान दिलाई।

'धुरंधर: द रिवेंज', 'सतलुज' और 'आवारापन 2' में अभिनय की नई ऊंचाइयां

'कोहरा' की अपार सफलता के बाद सुविंदर विक्की के पास बड़े बैनरों के ऑफर्स की झड़ी लग गई। उन्होंने रणवीर सिंह की ब्लॉकबस्टर एक्शन फिल्म 'धुरंधर: द रिवेंज' में एक छोटा लेकिन अत्यंत प्रभावशाली किरदार निभाया, जिसमें वे अर्जुन रामपाल द्वारा अभिनीत पात्र मेजर इकबाल के पिता की भूमिका में दिखाई दिए। सीमित स्क्रीन टाइम मिलने के बावजूद उन्होंने अपनी सशक्त स्क्रीन प्रेजेंस से दर्शकों पर अमिट छाप छोड़ी। इसके बाद वे गायक और अभिनेता दिलजीत दोसांझ की फिल्म 'सतलुज' में नकारात्मक किरदार निभाते हुए पुलिस अधिकारी एसएसपी सुरजीत सिंह सुग्गा के रूप में नजर आए, जहां उनके अभिनय के अलग शेड्स देखने को मिले।

इन दिनों सुविंदर विक्की हालिया रिलीज हुई फिल्म 'आवारापन 2' की बंपर सफलता का आनंद ले रहे हैं। इस बहुचर्चित फिल्म का हिस्सा बनने पर अपनी खुशी जाहिर करते हुए सुविंदर ने कहा कि जब उन्होंने पहली बार इस फिल्म की स्क्रिप्ट सुनी थी, तो उन्हें तुरंत महसूस हो गया था कि यह किरदार विशेष रूप से उन्हीं के लिए गढ़ा गया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि उन्हें ऐसे किरदार निभाना बेहद पसंद है जो गंभीर स्वभाव के हों और जिनके भीतर भावनाओं की गहरी परतें छिपी हों। यह किरदार उनके द्वारा अब तक निभाए गए तमाम रोल्स से काफी अलग है। साथ ही जब इस प्रोजेक्ट के साथ मुकेश भट्ट, इमरान हाशमी और शबाना आजमी जैसे दिग्गज नाम जुड़े हों, तो इसे मना करने की कोई वजह ही नहीं बनती थी।

सवाल-जवाब

सुविंदर विक्की ने अपने करियर की शुरुआत कब और किस फिल्म से की थी?
सुविंदर विक्की ने अपने अभिनय करियर की शुरुआत साल 2004 में आई पंजाबी फिल्म 'देश होया परदेस' से की थी।
सुविंदर विक्की के करियर का सबसे बड़ा टर्निंग पॉइंट कौन सा प्रोजेक्ट साबित हुआ?
साल 2023 में नेटफ्लिक्स पर आई वेब सीरीज 'कोहरा' उनके करियर का टर्निंग पॉइंट साबित हुई, जिसमें 50 साल की उम्र में उनके ग्रे-शेडेड किरदार की चौतरफा सराहना हुई।
मुंबई आने पर सुविंदर विक्की को किन शुरुआती परेशानियों का सामना करना पड़ा था?
सुविंदर विक्की केवल 5,000 रुपये लेकर मुंबई आए थे, जो जल्द ही खत्म हो गए। खाने के लाले पड़ने के कारण उन्हें एक महीने के भीतर पंजाब वापस लौटना पड़ा और गुजारे के लिए इंश्योरेंस पॉलिसी बेचनी पड़ी।
फिल्म 'आवारापन 2' में सुविंदर विक्की के साथ कौन-कौन से प्रमुख कलाकार जुड़े हैं?
'आवारापन 2' में सुविंदर विक्की के साथ मुख्य भूमिकाओं में इमरान हाशमी, शबाना आजमी और निर्माता मुकेश भट्ट शामिल हैं।
सुविंदर विक्की ने किन अन्य बड़ी हिंदी फिल्मों में अभिनय किया है?
उन्होंने 'उड़ता पंजाब' और 'केसरी' में छोटे रोल निभाए, जबकि रणवीर सिंह की फिल्म 'धुरंधर: द रिवेंज' में मेजर इकबाल के पिता और दिलजीत दोसांझ की फिल्म 'सतलुज' में एसएसपी सुरजीत सिंह सुग्गा की भूमिका निभाई।
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