देश में लागू E20 पेट्रोल नीति और वाहनों के इंजन पर इसके असर को लेकर जारी घमासान के बीच अखिलेश यादव ने केंद्र सरकार पर सीधा हमला बोला है। सोशल मीडिया मंच X पर साझा किए गए अपने संदेश में उन्होंने सरकार के आधिकारिक दावों और उसके सलाहकारों के बयानों में मौजूद विरोधाभास को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि सड़कों पर अपनी खराब गाड़ियों को खींचने के लिए विवश कार और बाइक चालक यह जानना चाहते हैं कि इस मामले में किसकी बात पर भरोसा किया जाए।
सरकार और सलाहकारों के बयानों में विरोधाभास
अखिलेश यादव ने अपनी पोस्ट में मुख्य रूप से यह सवाल उठाया कि जब सरकार का दावा है कि E20 पेट्रोल से वाहनों को कोई समस्या नहीं है, तो दूसरी तरफ आर्थिक सलाहकार इसे नुकसानदेह क्यों बता रहे हैं। उन्होंने कहा कि एक ओर सत्ता पक्ष सब कुछ ठीक होने का भरोसा दे रहा है, वहीं दूसरी ओर सलाहकारों की चेतावनी से आम नागरिक भ्रमित हैं। उन्होंने मांग की कि सरकार को तुरंत स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए ताकि वाहन मालिकों को आर्थिक नुकसान न उठाना पड़े।
मुख्य आर्थिक सलाहकार की सलाह से शुरू हुआ विवाद
इस पूरे मामले की शुरुआत मुख्य आर्थिक सलाहकार वी अनंत नागेश्वरन के उस सुझाव के बाद हुई, जिसमें उन्होंने पुरानी गाड़ियों के लिए E10 पेट्रोल वापस लाने की बात कही थी। उन्होंने संकेत दिया था कि उच्च एथेनॉल मिश्रण से पुरानी गाड़ियों के इंजन को नुकसान पहुंच सकता है। इस सलाह के बाद पेट्रोलियम मंत्रालय के दावों पर सवाल उठने लगे। मंत्रालय का लगातार कहना रहा है कि E20 ईंधन से इंजन को कोई तकनीकी क्षति नहीं पहुंचती है, जबकि सलाहकारों की राय ने नई बहस को जन्म दे दिया है।
एथेनॉल ब्लेंडिंग नीति के पक्ष और विपक्ष
केंद्र सरकार का लक्ष्य कच्चे तेल के भारी आयात बिल में कटौती करना और हरित ऊर्जा को बढ़ावा देना है। पेट्रोल में 20 प्रतिशत एथेनॉल मिलाने से देश की अरबों डॉलर की विदेशी मुद्रा बचती है और गन्ना व मक्का किसानों को सीधा भुगतान होता है। हालांकि, कई वाहन चालकों और विशेषज्ञों का मानना है कि जो गाड़ियां E20 ईंधन के हिसाब से डिजाइन नहीं की गई हैं, उनके इंजन के कलपुर्जों पर बुरा असर पड़ रहा है। चालकों को माइलेज में गिरावट और बार-बार मेंटेनेंस की समस्याओं से जूझना पड़ रहा है।
नीतिगत स्पष्टता की बढ़ती मांग
पुरानी गाड़ियों के मालिकों का कहना है कि सरकार को E20 के साथ-साथ E10 पेट्रोल का विकल्प भी पेट्रोल पंपों पर उपलब्ध कराना चाहिए। अगर पुरानी गाड़ियों के इंजन में खराबी आती है, तो उसका अतिरिक्त वित्तीय बोझ आम लोगों की जेब पर पड़ता है। ऐसे में सलाहकारों की टिप्पणी ने वाहन मालिकों की आशंकाओं को और बल दिया है, जिससे इस नीति की समीक्षा की मांग तेज हो गई है।
जनता की प्रतिक्रिया
अखिलेश यादव के वक्तव्य के बाद इंटरनेट पर आम लोगों के बीच तीखी चर्चा छिड़ गई है। कुछ उपयोगकर्ताओं ने उनका समर्थन करते हुए कहा कि E20 ईंधन से पुरानी गाड़ियों का मेंटेनेंस बढ़ गया है और सरकार को इस पर पारदर्शी जवाब देना चाहिए। वहीं अन्य लोगों ने तर्क दिया कि एथेनॉल ब्लेंडिंग देश के किसानों की आर्थिक स्थिति मजबूत करने और विदेशी तेल पर निर्भरता घटाने के लिए बेहद जरूरी कदम है।


























