वेब सीरीज कोहरा में पुलिस अधिकारी बलबीर सिंह की सशक्त भूमिका से दर्शकों का दिल जीतने वाले अभिनेता सुविंदर विक्की अपनी बेहतरीन अदाकारी के लिए लगातार सराहे जा रहे हैं। इस चर्चित सीरीज के बाद उन्होंने कई बड़ी फिल्मों में यादगार किरदार निभाए हैं। हाल ही में वह फिल्म धुरंधर 2 में नजर आए थे, जिसमें उनके अभिनय को काफी पसंद किया गया। इसके अलावा उन्होंने दिलजीत दोसांझ की मुख्य भूमिका वाली फिल्म सतलुज में भी काम किया है। अब इस प्रतिभावान अभिनेता ने धुरंधर 2 में अपने चरित्र द्वारा बोली गई अत्यधिक गाली-गलौज वाली भाषा और उन दृश्यों की शूटिंग के दौरान बने माहौल पर खुलकर चर्चा की है। फिल्म में उनके चरित्र और अर्जुन रामपाल के किरदार के बीच कई ऐसे दृश्य हैं जहां तीखी अभद्र भाषा का इस्तेमाल किया गया है।
छोटे रोल में भी मिला दर्शकों का भरपूर प्यार और मीम्स
अपनी हालिया बातचीत के दौरान सुविंदर विक्की ने धुरंधर 2 और सतलुज दोनों प्रोजेक्ट्स का हिस्सा बनने पर अपनी खुशी जाहिर की। उन्होंने कहा कि वह खुद को बेहद भाग्यशाली मानते हैं कि उन्हें एक साथ दो अलग-अलग तरह के सिनेमा का अनुभव मिला। यद्यपि धुरंधर 2 में उनका स्क्रीन टाइम अपेक्षाकृत कम था और उनके किरदार को भारी संख्या में गालियां बोलनी पड़ी थीं, फिर भी दर्शकों ने उनके प्रदर्शन की जमकर सराहना की। सुविंदर ने साझा किया कि उनके करियर में यह पहली बार हुआ है जब इंटरनेट पर उनके किरदार को लेकर कई मजेदार मीम्स बनाए गए हैं। अपने अभिनय को सोशल मीडिया पर इस तरह का प्यार और ट्रेंड मिलते देख उन्हें बेहद प्रसन्नता हुई है।
सिनेमा में हिंसा और आधुनिक मनोरंजन के विकल्प
फिल्मों में दिखाई जाने वाली हिंसा और यथार्थवादी दृश्यों पर अपने विचार रखते हुए सुविंदर विक्की ने कहा कि कुछ फिल्में वास्तविक जीवन की घटनाओं से प्रेरित होती हैं जबकि कुछ पूरी तरह से काल्पनिक होती हैं। हालांकि दोनों ही स्थितियों में प्रेरणा का मूल स्रोत हमारा समाज ही होता है। इंसान के भीतर अच्छाई और बुराई दोनों पहलू मौजूद होते हैं, और यह इस बात पर निर्भर करता है कि कोई व्यक्ति किसी स्थिति को किस दृष्टिकोण से देखता है। उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि आधुनिक समय में दर्शकों की देखने की आदतें पूरी तरह बदल चुकी हैं। एक समय था जब लोगों के पास मनोरंजन के नाम पर केवल सिनेमाघर और दूरदर्शन ही हुआ करते थे, परंतु आज के डिजिटल दौर में ढेरों विकल्प लोगों की उंगलियों पर उपलब्ध हैं। यदि दर्शकों को कोई कंटेंट पसंद नहीं आता, तो वे तुरंत दूसरे विकल्प पर स्विच कर सकते हैं। इसके साथ ही उन्होंने कहा कि ऑनस्क्रीन पर्दे पर हिंसा तभी जीवंत महसूस होती है जब फिल्म की पूरी टीम अपने-अपने किरदार के साथ पूरा न्याय करती है।
निर्देशक आदित्य धर की सख्त सीमाएं और संवाद लेखक का योगदान
शूटिंग के दौरान गालियों वाले दृश्यों को फिल्माने के अनुभव पर बात करते हुए सुविंदर विक्की ने इसका मुख्य श्रेय फिल्म के निर्देशक आदित्य धर को दिया। उन्होंने स्पष्ट किया कि एक कलाकार के रूप में उन्होंने अपना सौ प्रतिशत देने का प्रयास किया, लेकिन संवादों की तीक्ष्णता का पूरा श्रेय स्क्रिप्ट राइटर को जाता है क्योंकि सभी पंक्तियां पहले से लिखी हुई थीं। सुविंदर ने एक दिलचस्प किस्सा साझा करते हुए बताया कि उन्होंने मजाक में आदित्य से कहा था कि इन गालियों पर तो सेंसर बोर्ड बीप लगा देगा, इसलिए इससे बेहतर होता कि उन्हें किसी मूक चरित्र की भूमिका दे दी जाती। हालांकि, आदित्य धर को अपनी स्क्रिप्ट पर पूरा विश्वास था और उन्होंने कहा कि सेंसर बोर्ड इसमें कुछ भी कट नहीं लगाएगा। इसके बाद जब सुविंदर ने सीन को और अधिक स्वाभाविक बनाने के लिए अपनी तरफ से कुछ अतिरिक्त संवाद जोड़ने की इच्छा जताई, तो निर्देशक ने उन्हें तुरंत रोक दिया। निर्देशक आदित्य धर का स्पष्ट रुख था कि वे मां और बहन पर आधारित अपशब्दों का प्रयोग किसी भी कीमत पर नहीं करेंगे, क्योंकि दर्शकों की भावनाओं का सम्मान करना फिल्म निर्माताओं की नैतिक जिम्मेदारी है।
सह-कलाकार अर्जुन रामपाल के साथ सेट पर तालमेल
फिल्म में अर्जुन रामपाल के किरदार को गालियां देने से पहले के माहौल पर बात करते हुए सुविंदर विक्की ने बताया कि दोनों के बीच पहले से ही बहुत अच्छी बॉन्डिंग थी। वे दोनों इससे पहले फिल्म सतलुज में एक साथ काम कर चुके थे, जिससे सेट पर एक आरामदायक कम्फर्ट जोन बन चुका था। जब सुविंदर ने अर्जुन रामपाल को बताया कि अगले सीन में उन्हें बहुत ज्यादा अपशब्द बोलने हैं, तो अर्जुन ने बेहद सहज प्रतिक्रिया दी। अर्जुन रामपाल ने उनसे मुस्कुराते हुए कहा कि यह सब अभिनय और जिंदगी का हिस्सा है, इसलिए कैमरा ऑन होते ही बिना किसी झिझक के अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन दो। इस तरह के सहयोग और सहकलाकारों के बीच आपसी विश्वास के कारण ही यह कठिन दृश्य बिना किसी असहजता के सफलतापूर्वक शूट हो सका।



















