टीवी जगत के जाने-माने अभिनेता अर्जुन बिजलानी इन दिनों अपने विभिन्न शऔर प्रोजेक्ट्स की शूटिंग में काफी मशगूल रहते हैं। अपने काम के सिलसिले में उन्हें अक्सर व्यस्त रहना पड़ता है, लेकिन इतनी भागदौड़ भरी दिनचर्या के बाद भी वह अपने परिवार के लिए वक्त निकालना कभी नहीं भूलते। अभिनेता का साफ तौर पर मानना है कि त्योहारों का यह खास मौसम लोगों को रोजमर्रा की थकाऊ और व्यस्त जिंदगी से एक जरूरी ब्रेक दिलाता है।
इसी वजह से उन्हें दीपावली जैसे पावन पर्व को अपने घर पर परिजनों के बीच पारंपरिक ढंग से मनाना बेहद पसंद है। हाल ही में एक बातचीत के दौरान अभिनेता ने अपने घर पर होने वाले दीपावली के जश्न की झलक साझा की और यह भी बताया कि उम्र के साथ इस पर्व को देखने का उनकानजरिया किस तरह पूरी तरह बदल चुका है।
घर पर पूजा और सजावट के साथ मनाते हैं दीपावली
अर्जुन बिजलानी ने साझा किया कि उनके लिए दीपावली का पर्व हमेशा से ही परिवार के साथ मिलकर क्वालिटी टाइम बिताने का एक बेहतरीन अवसर रहा है। वह अमूमन अपना यह त्योहार घर पर ही परिवार के सदस्यों के साथ सेलिब्रेट करते हैं। इस दौरान घर के सभी लोग मिलकर विधिवत पूजा-अर्चना करते हैं और पूरे घर को दीपों व फूलों से सजाते हैं। इसके अलावा घर में तरह-तरह के स्वादिष्ट पकवान तैयार किए जाते हैं और सभी लोग एक साथ बैठकर इस पर्व का पूरा आनंद उठाते हैं।
अभिनेता ने इस बात को स्वीकार किया कि भले ही उनका कार्य शेड्यूल काफी कड़ा और व्यस्त रहता है, लेकिन वह अपने परिवार के खातिर समय निकालने का हरसंभव प्रयास करते हैं। उनके अनुसार, त्योहार के दिन घर के भीतर हंसी-खुशी और आत्मीयता का माहौल होना सबसे ज्यादा महत्वपूर्ण है। अपने प्रियजनों के साथ बिताए गए ये अनमोल पल उनके दिल के बहुत करीब होते हैं।
काम और परिवार के बीच ऐसे बनाते हैं तालमेल
अपने पेशेवर और निजी जीवन के बीच संतुलन बनाने को लेकर अर्जुन का कहना है कि यह बहुत आवश्यक है। वह हमेशा अपना कार्य शेड्यूल इस प्रकार व्यवस्थित करने की कोशिश करते हैं कि त्योहारों और खास मौकों पर वह अपने परिवार के साथ उपस्थित रह सकें। अभिनेता इस बात में यकीन रखते हैं कि काम अपनी जगह बेहद जरूरी है, लेकिन जिंदगी में जिन लोगों का खास स्थान है, उनके लिए भी पर्याप्त समय निकालना चाहिए।
उन्होंने अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए कहा कि दिन के अंत में अपने अपनों के साथ बिताए गए हसीन पल भी काम जितने ही अमूल्य होते हैं। यही कारण है कि वह इस बात का पूरा ध्यान रखते हैं कि काम की व्यस्तता के कारण त्योहारों की खुशियां और रौनक फीकी न पड़ने पाएं।
बड़े होने के साथ बदल गया दीपावली का मतलब
बचपन और आज के समय की तुलना करते हुए अर्जुन ने बताया कि छोटेपन में उनके लिए दीपावली का मतलब केवल नए रंग-बिरंगे कपड़े पहनना, मनपसंद मिठाइयां खाना, पटाखे फोड़ना और रिश्तेदारों से मिलना-जुलना हुआ करता था। हालांकि, उम्र बढ़ने और मेच्योर होने के बाद उन्हें इस पावन पर्व का वास्तविक अर्थ समझ में आया।
अब उनके लिए दीपावली केवल सजावट, रोशनी या आतिशबाजी तक सीमित नहीं रह गई है। वह इस पर्व को बुराई पर अच्छाई और अंधेरे पर रोशनी की विजय के साथ-साथ जीवन में उम्मीद और सकारात्मकता का प्रतीक भी मानते हैं। अभिनेता के अनुसार, यह त्योहार कठिन समय में भी मन में हिम्मत बांधे रखने और हर परिस्थिति में आगे बढ़ते रहने की प्रेरणा देता है। साथ ही, यह इंसान को उन सभी चीजों के प्रति कृतज्ञ होना भी सिखाता है जो उसके पास मौजूद हैं।
परिवार के साथ बिताए पल हैं सबसे खास
दीपावली से जुड़ी अपनी सबसे प्यारी और खूबसूरत यादों का जिक्र करते हुए अभिनेता ने कहा कि जब घर का हर सदस्य एक ही छत के नीचे एक साथ मौजूद होता है, तो वह क्षण अपने आप में बेहद यादगार बन जाता है। उनके अनुसार, किसी भी त्योहार की असली खुशी दिखावे, भव्य सजावट या खानपान में नहीं, बल्कि उन लोगों के साथ होने में छिपी है जिनसे आप बेइंतिहा मोहब्बत करते हैं।
उनका स्पष्ट मानना है कि परिवार के साथ बैठकर हल्की-फुल्की हंसी-मजाक करना, एक-दूसरे का हालचाल जानना और नई यादें संजोना ही किसी भी पर्व को खास बनाता है। जिंदगी के सफर में यही वो चुनिंदा पल होते हैं जो ताउम्र इंसान के जेहन में ताजा रहते हैं और उसे हमेशा खुशी देते हैं।


















