पर्सनल एआई असिस्टेंट टैब की एंट्री, 300 मिलियन डॉलर के वैल्यूएशन के साथ बाजार में उतराशनि का उत्तर भाद्रपद नक्षत्र में गोचर: अगले 120 दिनों तक इन 4 राशियों को मिलेंगे शुभ परिणाम और आर्थिक लाभनागपुर में दिल्ली पुलिस पर बरसे अभिजीत दिपके, दुर्व्यवहार और मनमानी के लगाए गंभीर आरोपभीलवाड़ा के टीलों का खेड़ा में पानी के टांके से 5 फीट लंबे कोबरा का सुरक्षित रेस्क्यूचुनावी प्रक्रिया पर सवाल उठाकर सड़क पर उतरेगा विपक्ष, राजधानी में सुरक्षा बलों का सख्त पहराराजस्थान में नशा तस्करों पर बड़ी चोट, पाँच अलग-अलग छापों में सवा आठ करोड़ के नशीले पदार्थ जब्तपटना के सियासी गलियारों में जेडीयू के भविष्य, एमएलसी चुनाव और निशांत कुमार की भूमिका पर जोरदार बहसमिथुन राशिफल 12 अक्टूबर 2026: काम और अध्ययन में एकाग्रता बनाए रखने के लिए अपनाएं यह खास रणनीतिकोल्हापुर में शादी तय होने पर इंजीनियरिंग छात्रा की हत्या, प्रेमी ने मिलने बुलाकर घाटी में फेंकाभारतीय सिनेमा के वैश्विक विस्तार के लिए नितेश तिवारी की फिल्म रामायण को समर्थन मिलना जरूरी, गुलशन देवैया ने रखी राय
भारतीय सिनेमा के वैश्विक विस्तार के लिए नितेश तिवारी की फिल्म रामायण को समर्थन मिलना जरूरी, गुलशन देवैया ने रखी रायमनोरंजन
11 अक्तू॰ 2026, 11:45 pm (28 मिनट पहले)· 0

भारतीय सिनेमा के वैश्विक विस्तार के लिए नितेश तिवारी की फिल्म रामायण को समर्थन मिलना जरूरी, गुलशन देवैया ने रखी राय

अभिनेता गुलशन देवैया ने आगामी बड़े बजट की फिल्म रामायण के महत्व पर बात करते हुए कहा कि निजी पसंद से परे भारतीय सिनेमा के वैश्विक कद को बढ़ाने के लिए ऐसी परियोजनाओं को बढ़ावा देना जरूरी है.

पौराणिक गाथाओं को आधुनिक बड़े पर्दे पर उतारना हमेशा एक बड़ी रचनात्मक और सांस्कृतिक परीक्षा मानी जाती है. अभिनेता गुलशन देवैया ने इसी संदर्भ में स्पष्ट किया कि भव्य पैमाने पर तैयार होने वाली परियोजनाएं देश के फिल्म उद्योग को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई प्रतिष्ठा दिला सकती हैं. उनका दृष्टिकोण है कि किसी दर्शक को व्यक्तिगत रूप से कोई प्रस्तुति भाए या न भाए, लेकिन जब कोई काम भारतीय फिल्म जगत को वैश्विक क्षितिज पर मजबूती से स्थापित करने का सामर्थ्य रखता हो, तो समूचे उद्योग और दर्शकों की तरफ से उसे व्यापक प्रोत्साहन मिलना चाहिए.

दर्शकों की सांस्कृतिक आस्था और उम्मीदों की कसौटी

धार्मिक और पौराणिक विषयों को लेकर आम जनता में बेहद गहरा भावनात्मक जुड़ाव रहता है. गुलशन देवैया के अनुसार, जब बात इस महाकाव्य की आती है, तो दर्शकों की संवेदनशीलता और पूर्वधारणाएं काफी प्रबल होती हैं. ऐसी स्थिति में फिल्मकारों के कंधों पर जनभावनाओं और आस्था के प्रति गंभीर सतर्कता बरतने की जवाबदेही आ जाती है. भगवान राम के स्वरूप को लेकर जनमानस में पहले से ही एक अटल और पवित्र धारणा बसी हुई है, जिसके चलते किसी भी नए रूपांतरण की तुलना तुरंत स्थापित मान्यताओं से होने लगती है.

ये भी पढ़ें

प्रतीकात्मक छवि और मुख्य किरदार के सामने कड़ी परीक्षा

रामानंद सागर के ऐतिहासिक धारावाहिक और उसमें अरुण गोविल द्वारा निभाई गई मर्यादा पुरुषोत्तम की भूमिका को दशकों बाद भी एक मानदंड के रूप में देखा जाता है. बड़ी संख्या में दर्शक उसी प्रस्तुति को आदर्श मानकर चलते हैं. ऐसे में जब रणबीर कपूर बड़े पर्दे पर भगवान राम का किरदार निभाते नजर आएंगे, तो दर्शकों द्वारा अतीत के स्थापित चरित्र से तुलना किया जाना पूरी तरह स्वाभाविक रहेगा. भगवान राम को मर्यादा पुरुषोत्तम के रूप में पूजा जाता है, इसलिए उनके आचरण, गरिमा और मर्यादा को स्क्रीन पर जीवंत करना किसी भी कलाकार के लिए साधारण काम नहीं बल्कि बेहद भारी दायित्व है.

वैश्विक बाजार और पूर्व उदाहरणों से मिलने वाली सीख

अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारतीय कहानियों के प्रसार को रेखांकित करते हुए उन्होंने एसएस राजामौली की प्रसिद्ध रचना का संदर्भ दिया. उन्होंने साझा किया कि निजी तौर पर उन्हें उस फिल्म से कोई खास भावनात्मक जुड़ाव महसूस नहीं हुआ था, फिर भी जब अमेरिका में उसे अपार लोकप्रियता और सराहना मिली, तो वह बेहद प्रसन्न हुए थे. व्यक्तिगत पसंद हर किसी की अलग हो सकती है, लेकिन अंतरराष्ट्रीय मंचों पर जब किसी घरेलू प्रस्तुति को व्यापक स्वीकृति मिलती है, तो वह पूरे भारतीय मनोरंजन जगत के लिए नए दरवाजे खोलती है और विदेशी दर्शकों को भारतीय सिनेमा की ओर आकर्षित करती है.

भव्य निर्माण की योजना और रिलीज की रूपरेखा

नितेश तिवारी के निर्देशन में संवर रही इस महागाथा को दो हिस्सों में सिनेमाघरों में पेश करने की तैयारी की गई है. इस वृहद प्रोजेक्ट में रणबीर कपूर भगवान राम के रूप में, साई पल्लवी माता सीता के रूप में और यश रावण के किरदार में नजर आने वाले हैं. तय कार्यक्रम के अनुसार इस गाथा के पहले भाग को दिवाली 2026 पर रिलीज करने की योजना है. यह संपूर्ण चर्चा सिर्फ कलाकारों के चयन तक सीमित नहीं है, बल्कि यह इस बात पर भी केंद्रित है कि भारतीय कथाएं वैश्विक पटल पर किस तरह अपनी विशिष्ट पहचान दर्ज करा सकती हैं.

सवाल-जवाब

गुलशन देवैया ने फिल्म रामायण को लेकर क्या विचार व्यक्त किए हैं?
उन्होंने कहा कि दर्शकों की व्यक्तिगत पसंद अलग हो सकती है, लेकिन भारतीय सिनेमा को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने वाली बड़ी फिल्मों का समर्थन करना जरूरी है.
गुलशन देवैया के अनुसार रणबीर कपूर के सामने मुख्य चुनौती क्या होगी?
रामानंद सागर के धारावाहिक में अरुण गोविल की छवि दर्शकों में बसी हुई है, इसलिए रणबीर कपूर के अभिनय की तुलना स्वाभाविक रूप से उस स्थापित मानदंड से होगी.
गुलशन देवैया ने अपनी बात स्पष्ट करने के लिए किस फिल्म का उदाहरण दिया?
उन्होंने एसएस राजामौली की फिल्म का उदाहरण दिया, जिसने अमेरिकी बाजार में बड़ी कामयाबी हासिल कर भारतीय फिल्मों के लिए वैश्विक अवसर बढ़ाए.
नितेश तिवारी की फिल्म रामायण में मुख्य कलाकार कौन-कौन हैं?
इस फिल्म में रणबीर कपूर भगवान राम, साई पल्लवी माता सीता और यश रावण की भूमिका निभा रहे हैं.
फिल्म रामायण के पहले भाग के रिलीज की क्या योजना है?
फिल्म को दो भागों में बनाने की योजना है, जिसका पहला भाग दिवाली 2026 पर सिनेमाघरों में रिलीज करने का लक्ष्य रखा गया है.
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 0

अभी तक कोई टिप्पणी नहीं — पहली टिप्पणी आपकी हो!

नागरिक पत्रकारिता

TrendKia पत्रकार बनें

जनता की आवाज़

अपने आसपास की ख़बरें, तस्वीरें और वीडियो ट्रेंडकिआ के साथ साझा करें और अपनी आवाज़ देश तक पहुँचाएँ। हर नागरिक एक पत्रकार।

अभी जुड़ें
CH 01 लाइव
TrendKia TV ON AIR
Chamar no WhatsApp