जाने-माने अभिनेता नाना पाटेकर के अचानक चले जाने से स्तब्ध प्रशंसकों और परिजनों के मन में उठ रहे सवालों पर अब पूर्ण विराम लग गया है। बांबोलिम स्थित गोवा मेडिकल कॉलेज (जीएमसी) के चिकित्सकों की टीम ने अपनी अंतिम पोस्टमार्टम रिपोर्ट जारी कर दी है। इस मेडिकल रिपोर्ट में स्पष्ट तौर पर रेखांकित किया गया है कि अभिनेता की मृत्यु पूरी तरह से प्राकृतिक कारणों से हुई थी और उन्हें एक बड़ा दिल का दौरा पड़ा था। चिकित्सीय रिपोर्ट मिलने के बाद पुलिस प्रशासन ने इसके सारे विवरण उनके परिजनों के साथ साझा कर दिए हैं, जिस पर परिवार की ओर से भी किसी प्रकार की आपत्ति दर्ज नहीं कराई गई है। परिजनों की संतुष्टि के बाद पुलिस अब इस प्रकरण में दर्ज किए गए अप्राकृतिक मौत के मामले को औपचारिक तौर पर बंद करने की तैयारी में है।
कोरोनरी आर्टरी डिजीज से जूझ रहे थे अभिनेता
नाना पाटेकर के निकटतम लोगों और उनके भतीजे के अनुसार, वे जीवन भर कड़े अनुशासन का पालन करते थे, नियमित रूप से कसरत करते थे और संतुलित आहार लेते थे। यही वजह थी कि उनकी अचानक तबीयत बिगड़ने से हर कोई स्तब्ध था। हालांकि, डॉक्टरों के पैनल द्वारा तैयार की गई रिपोर्ट ने इस बात की चिकित्सीय पृष्ठभूमि सामने रख दी है। जांच के अनुसार वे भीतर से कोरोनरी आर्टरी डिजीज (सीएडी) से ग्रस्त थे। इस चिकित्सीय स्थिति में हृदय तक रक्त ले जाने वाली नलिकाओं में अवरोध अथवा थक्का बन जाता है, जिससे दिल की मांसपेशियों को होने वाला रक्त संचार अचानक रुक जाता है। इसी रक्त अवरोध के कारण उन्हें अचानक मैसिव कार्डियक अरेस्ट आया, जो जानलेवा साबित हुआ। गोवा पुलिस ने भी साफ किया है कि निष्कर्ष पूरी तरह प्राकृतिक मौत की पुष्टि करते हैं और अब इसमें किसी प्रकार के संदेह की गुंजाइश नहीं रह गई है।
घटना की रात और अस्पताल का घटनाक्रम
यह दुखद घटना 8 अक्टूबर को गोवा स्थित उनके निवास पर घटी, जब 75 वर्षीय अभिनेता अपने स्टाफ कर्मियों के साथ घर पर थे। पुलिस की पड़ताल में पता चला है कि 7 अक्टूबर की देर रात निधन से कुछ समय पहले नाना पाटेकर ने अपने बेहद करीबी मित्र अमेय नाईक को फोन पर संदेश भेजा था। रात 2:30 बजे भेजे गए उस संदेश में उन्होंने जिक्र किया था कि उनका स्वास्थ्य ठीक नहीं लग रहा है। अमेय नाईक ने जब सुबह करीब 3:30 बजे यह संदेश देखा, तो वे तत्काल डोना पाउला में नाना के आवास पर पहुंचे। वहां पहुंचने पर अभिनेता सोफे पर अचेत अवस्था में पाए गए।
उन्हें तुरंत एंबुलेंस की मदद से मणिपाल अस्पताल ले जाया गया। अस्पताल पहुंचने पर आपातकालीन प्रोटोकॉल का पालन करते हुए डॉक्टरों ने उन्हें 45 मिनट तक लगातार सीपीआर देकर पुनर्जीवित करने का भरसक प्रयास किया। हालांकि, तमाम प्रयासों के बावजूद उनके शरीर में कोई हरकत नहीं हुई और अंततः चिकित्सकों ने सुबह 5:20 बजे उन्हें मृत घोषित कर दिया। डॉक्टरों का कहना था कि जब उन्हें अस्पताल के आपातकालीन कक्ष में लाया गया था, तभी उनकी सांसें थम चुकी थीं।
पुणे में राजकीय सम्मान के साथ विदाई
मेडिकल कॉलेज में सभी कानूनी व पोस्टमार्टम प्रक्रियाएं पूरी होने के उपरांत नाना पाटेकर की पार्थिव देह को पुणे के डोने गांव में स्थित उनके फार्महाउस ले जाया गया। वहां पूरे राजकीय सम्मान के साथ उनका अंतिम संस्कार संपन्न हुआ। अंतिम विदाई के समय महाराष्ट्र के उप मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे भी उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित करने पहुंचे थे। अभिनेता के इकलौते बेटे मल्हार पाटेकर ने मुखाग्नि देकर पिता की अंतिम क्रियाएं पूरी कीं।



















