फिल्ममेकर अनुराग कश्यप ने हाल ही में बॉलीवुड इंडस्ट्री की कार्यप्रणाली और मौजूदा माहौल को लेकर खुलकर अपनी बात रखी है। लंबे समय से मुख्यधारा की कमर्शियल फिल्मों से दूरी बना चुके अनुराग अब मुंबई छोड़कर बेंगलुरु में निवास कर रहे हैं, लेकिन इसके बावजूद वह भारतीय सिनेमा जगत से जुड़े मुद्दों पर लगातार अपनी प्रतिक्रिया देते रहते हैं। अपनी हालिया निर्मित बच्चों की फिल्म 'लिटिल थॉमस' की सिनेमाघरों में रिलीज से पहले उन्होंने फिल्म जगत की मौजूदा स्थिति को एक बड़ी त्रासदी करार दिया है।
बच्चों की फिल्मों के लिए बचा है भारी संकट
कौशल ओजा द्वारा निर्देशित फिल्म 'लिटिल थॉमस' इस शुक्रवार को बड़े पर्दे पर रिलीज होने के लिए पूरी तरह तैयार है। इस फिल्म के आने से पहले अनुराग कश्यप ने एक बातचीत के दौरान साफ तौर पर कहा कि आज के समय में बॉलीवुड गहरी मुश्किलों से गुजर रहा है। उन्होंने बताया कि किस तरह से इंडस्ट्री के भीतर विविधता खत्म होती जा रही है और बच्चों के लिए फिल्में बनाना लगभग असंभव सा हो गया है। उनके अनुसार, आज के दौर में फिल्म निर्माताओं को यह तक समझ नहीं आ रहा है कि उन्हें किस तरह की विषयवस्तु पर काम करना चाहिए और क्या दर्शकों के सामने लाना चाहिए।
सिर्फ दो शैलियों तक सीमित हुई इंडस्ट्री
अनुराग कश्यप ने इंडस्ट्री के हालात पर तीखा प्रहार करते हुए कहा कि वर्तमान में निर्माताओं का पूरा जोर सिर्फ दो खास जॉनर पर टिका हुआ है। उन्होंने स्पष्ट किया कि अब बॉलीवुड में केवल भक्ति और देशभक्ति से ओतप्रोत फिल्मों को ही पूरी तरह से बढ़ावा दिया जा रहा है। उनके मुताबिक यह एक कड़वा सच है और सिनेमा के लिहाज से किसी बड़ी त्रासदी से कम नहीं है। इस माहौल में किसी भी दूसरे अलग या लीक से हटकर बनाए गए प्रोजेक्ट को आगे बढ़ाना बेहद चुनौतीपूर्ण काम बन चुका है।
निर्माता भी असमंजस की स्थिति में
अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए उन्होंने साझा किया कि वह हाल ही में एक अन्य प्रोड्यूसर के संपर्क में थे जो खुद इस बात को लेकर बेहद भ्रमित नजर आ रहे थे कि उन्हें किस दिशा में आगे बढ़ना चाहिए। इंडस्ट्री के अंदर फैल रहे टॉक्सिक माहौल से तौबा कर चुके अनुराग ने अब पारंपरिक और बड़े बजट की कमर्शियल फिल्में बनाने का सिलसिला पूरी तरह छोड़ दिया है। वह अब केवल ऐसी छोटी और सीमित बजट वाली स्वतंत्र फिल्मों का समर्थन करते हैं, जिन पर उनका गहरा व्यक्तिगत विश्वास होता है और जो लीक से हटकर कहानियां कहती हैं।

















