लोकप्रिय टेलीविजन धारावाहिक 'बालिका वधू' में आनंदी के किरदार से घर-घर में पहचान बनाने वाली अभिनेत्री प्रत्युषा बनर्जी की मौत के मामले में कानूनी प्रक्रिया एक निर्णायक मोड़ पर पहुंच गई है। बॉम्बे हाई कोर्ट ने उनके पार्टनर रहे राहुल राज सिंह को आत्महत्या के लिए उकसाने के आरोपों से पूरी तरह दोषमुक्त कर दिया है। अदालत ने स्पष्ट किया कि अभियोजन पक्ष के पास राहुल के खिलाफ मुकदमा चलाने के लिए पर्याप्त आधार और ठोस सामग्री मौजूद नहीं है, जिसके चलते उनके खिलाफ चल रही आपराधिक कार्यवाही को समाप्त कर दिया गया।
जस्टिस एसजी डिगे की बेंच का फैसला
इस बहुचर्चित मामले की सुनवाई करते हुए बॉम्बे हाई कोर्ट के जस्टिस एसजी डिगे की एकल पीठ ने राहुल राज सिंह की डिस्चार्ज याचिका को स्वीकार किया। अदालत ने अपने फैसले में कहा कि उपलब्ध रिकॉर्ड और दस्तावेजों से ऐसा कोई साक्ष्य सामने नहीं आता जो आरोपी को आत्महत्या के लिए उकसाने का दोषी साबित करने के लिए ट्रायल का आधार बन सके। अदालत ने यह भी माना कि यदि पर्याप्त सबूतों के अभाव में भी मुकदमा जारी रखा जाता, तो यह कानूनी प्रक्रिया के दुरुपयोग जैसा होता। इस निर्णय के साथ ही राहुल राज सिंह पर दर्ज आपराधिक मामले पर पूर्ण विराम लग गया है।
गोरेगांव स्थित आवास पर हुई थी घटना
यह मामला 1 अप्रैल 2016 का है, जब 24 वर्षीय प्रत्युषा बनर्जी मुंबई के गोरेगांव वेस्ट स्थित अपने किराए के फ्लैट में फंदे से लटकी पाई गई थीं। उनके अचानक चले जाने से पूरे मनोरंजन जगत को गहरा धक्का लगा था। घटना के बाद अभिनेत्री की मां सोमा बनर्जी ने बांगुर नगर पुलिस स्टेशन में औपचारिक शिकायत दर्ज कराई थी। इस शिकायत के आधार पर पुलिस ने राहुल राज सिंह के विरुद्ध भारतीय दंड संहिता की आत्महत्या के लिए उकसाने, मारपीट, गाली-गलौज और जान से मारने की धमकी देने से संबंधित धाराओं के तहत प्राथमिकी दर्ज की थी। परिजनों ने दावा किया था कि राहुल प्रत्युषा को शारीरिक, मानसिक और वित्तीय रूप से प्रताड़ित कर रहे थे, जिसके चलते उन्हें ऐसा कदम उठाना पड़ा।
सेशन कोर्ट से हाई कोर्ट तक कानूनी सफर
मामले की जांच के दौरान जुलाई 2016 में बॉम्बे हाई कोर्ट ने राहुल राज सिंह को गिरफ्तारी से राहत देते हुए अग्रिम जमानत मंजूर की थी। पुलिस ने अपनी लंबी जांच के बाद वर्ष 2018 में अदालत के समक्ष आरोप पत्र पेश किया था। इसके बाद राहुल राज सिंह ने कानूनी राहत की मांग करते हुए स्वयं को आरोपमुक्त करने के लिए अदालत में डिस्चार्ज अर्जी दाखिल की। हालांकि, अगस्त 2023 में डिंडोशी सेशन कोर्ट ने उनकी यह याचिका खारिज कर दी थी। उस दौरान सेशन कोर्ट का मानना था कि गवाहों के बयानों से प्रथम दृष्टया यह प्रतीत होता है कि आरोपी के आचरण की वजह से मृतका का जीवन अत्यंत कठिन हो गया था। सेशन कोर्ट के इसी रुख को राहुल ने हाई कोर्ट में चुनौती दी थी।
बचाव पक्ष की प्रमुख दलीलें और साक्ष्य
हाई कोर्ट में राहुल राज सिंह का पक्ष वरिष्ठ अधिवक्ता आबाद पोंडा और श्रेयांश मिठारे ने मजबूती से रखा। वकीलों ने अदालत को बताया कि घटना के तुरंत बाद दर्ज की गई प्राथमिकी अत्यंत जल्दबाजी में कराई गई थी और पुलिस को घटनास्थल से किसी भी प्रकार का सुसाइड नोट नहीं मिला था। बचाव पक्ष ने मामले के सबसे महत्वपूर्ण तकनीकी साक्ष्य यानी प्रत्युषा की मौत से लगभग एक घंटा पहले हुई आखिरी फोन कॉल की रिकॉर्डिंग का हवाला दिया। वकीलों के अनुसार, उस फोन कॉल में राहुल स्पष्ट तौर पर प्रत्युषा को ऐसा कोई आत्मघाती कदम न उठाने के लिए समझाते हुए सुनाई दे रहे थे और उन्होंने उनके प्रति अपने प्रेम का इजहार भी किया था। इसके अलावा यह तथ्य भी अदालत के सामने रखा गया कि घटना की जानकारी मिलते ही राहुल ने ही फ्लैट का दरवाजा खुलवाया था और प्रत्युषा को तुरंत चिकित्सा सहायता दिलाने के लिए अस्पताल ले जाने का प्रयास किया था। इन तथ्यों को संज्ञान में लेते हुए अदालत ने माना कि यह मामला आत्महत्या के लिए उकसाने का नहीं बनता और आरोपी को आरोपमुक्त कर दिया।

















