ग्लैमर और शोहरत की दुनिया बाहर से जितनी चमकदार दिखती है, अंदर से अक्सर उतनी ही जटिल होती है। हर वर्ष 10 अक्टूबर को दुनिया भर में विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस मनाया जाता है, जिसका मकसद लोगों को मानसिक समस्याओं के प्रति सचेत करना और इससे जुड़ी सामाजिक भ्रांतियों को खत्म करना है। सिनेमा जगत के कई बड़े कलाकारों ने जब अपनी निजी मानसिक परेशानियों पर चुप्पी तोड़ी, तो इससे आम लोगों को भी यह समझने में मदद मिली कि अवसाद या तनाव किसी को भी अपनी चपेट में ले सकता है। जब पर्दे पर चमकने वाले चेहरे अपनी कमजोरियों को साझा करते हैं, तो मानसिक स्वास्थ्य पर बात करना समाज में सामान्य बनने लगता है।
शाहरुख खान: व्यक्तिगत त्रासदियों और उदासी से संघर्ष
सिनेमा जगत में किंग खान के नाम से पहचाने जाने वाले शाहरुख खान भी मानसिक संघर्षों से अछूते नहीं रहे हैं। उन्होंने काफी कम उम्र में ही अपने माता-पिता को खो दिया था, जिसने उनके मन पर गहरा भावनात्मक आघात पहुंचाया। अपने कई साक्षात्कारों में उन्होंने इस गहरे दुख और मन की उदासी के दौर पर चर्चा की है। किसी भी बड़े भावनात्मक बिखराव से खुद को बचाने के लिए अभिनेता ने लगातार काम करते रहने का रास्ता चुना और खुद को व्यस्त रखा, ताकि वह मन के उस खालीपन से जूझ सकें।
अनुष्का शर्मा: चिंता और विशेषज्ञ सलाह की अहमियत
अभिनेत्री अनुष्का शर्मा ने भी एंग्जायटी यानी घबराहट और चिंता की समस्या पर सार्वजनिक रूप से अपनी बात रखी है। यद्यपि उन्होंने इस परेशानी के पीछे की किसी खास वजह का जिक्र नहीं किया, लेकिन उनका मानना है कि मानसिक सेहत भी शारीरिक तंदुरुस्ती जितनी ही महत्वपूर्ण होती है। उनका स्पष्ट कहना है कि जब कोई व्यक्ति मानसिक उलझनों से गुजर रहा हो, तो उसे पेशेवर डॉक्टरों या विशेषज्ञों से मदद मांगने में तनिक भी संकोच नहीं करना चाहिए।
दीपिका पादुकोण: क्लिनिकल डिप्रेशन और निरंतर जागरूकता
दीपिका पादुकोण उन अभिनेत्रियों में शामिल हैं जिन्होंने क्लिनिकल डिप्रेशन के अपने अनुभव को बेहद संजीदगी से साझा किया है। उन्होंने बताया था कि जब उनका करियर सफलता के चरम पर था, तब भी वह भीतर से भारी खालीपन, निराशा और चिंता से घिरी रहती थीं। वोग पत्रिका को दिए गए एक पुराने साक्षात्कार में उन्होंने उस समय को अपनी जिंदगी का सबसे कठिन पड़ाव करार दिया था। दीपिका के अनुसार, इस स्थिति में दोबारा जाने से बचने के लिए इंसान को निरंतर सचेत रहकर प्रयास करने पड़ते हैं। इसी व्यक्तिगत अनुभव ने उन्हें समाज में मानसिक स्वास्थ्य के प्रति अलख जगाने की प्रेरणा दी।
वरुण धवन: गहन किरदारों का मानसिक प्रभाव
वरुण धवन ने अपनी चर्चित फिल्म बदलापुर की शूटिंग के दौरान उपजे तनाव और उदासी के दौर का जिक्र किया था। बोल्लीस्पाइस को दिए एक साक्षात्कार में उन्होंने खुलासा किया था कि फिल्म के गंभीर माहौल और किरदार ने उनकी मानसिक स्थिति को प्रभावित किया था, जिसके बाद उन्होंने चिकित्सक से परामर्श भी लिया था। अभिनेता ने यह भी रेखांकित किया कि लोगों को डिप्रेशन जैसे गंभीर चिकित्सीय शब्द का इस्तेमाल बेहद सोच-समझकर और जिम्मेदारी के साथ करना चाहिए।
तनुश्री दत्ता: उत्पीड़न के आरोपों के बाद उपजा तनाव
तनुश्री दत्ता ने जुलाई 2025 में एक सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए अपनी मानसिक और शारीरिक पीड़ा साझा की थी। उन्होंने बताया कि वह क्रॉनिक फटीग सिंड्रोम यानी सीएफएस से जूझ रही हैं। अभिनेत्री का आरोप है कि फिल्म हॉर्न ओके प्लीज के सेट पर नाना पाटेकर ने उनके साथ गलत व्यवहार करने की कोशिश की थी। इस घटना के खिलाफ आवाज उठाने के बाद उन्हें जिस तरह के दबाव, धमकियों और नकारात्मक माहौल का सामना करना पड़ा, उसने उनकी मानसिक स्थिति को बहुत गहरे स्तर पर चोट पहुंचाई।
इलियाना डिक्रूज: शारीरिक छवि और खुद को स्वीकारना
इलियाना डिक्रूज ने बॉडी डिस्मॉर्फिया और अवसाद के साथ अपनी लंबी लड़ाई के बारे में खुलकर बातचीत की है। उन्होंने लोगों को यह संदेश दिया कि हर इंसान में कुछ न कुछ खामियां जरूर होती हैं, लेकिन अपनी कमियों को स्वीकार करके खुद से प्यार करना ही सबसे बड़ा उपचार है। उनके मुताबिक, इंसान की यही अपूर्णताएं दरअसल उसकी अनोखी पहचान का हिस्सा होती हैं।



















