भारतीय सिनेमा के इतिहास में आमिर खान की फिल्म दंगल सबसे बड़ी कमाई करने वाली फिल्म के तौर पर जानी जाती है। महावीर सिंह फोगाट नाम के पूर्व पहलवान के जीवन पर आधारित इस कहानी में दिखाया गया है कि कैसे वे अपनी बेटियों को कुश्ती के मैदान में उतारकर गोल्ड मेडल जीतने का अपना अधूरा सपना पूरा करते हैं। महज 70 करोड़ रुपये के बजट में तैयार हुई इस फिल्म ने दुनिया भर के बॉक्स ऑफिस पर लगभग 2200 करोड़ रुपये का शानदार कारोबार किया था। समीक्षकों ने भी इसकी जमकर तारीफ की थी और आईएमडीबी पर इसे 8.3 की दमदार रेटिंग मिली है। इसके बावजूद, भारतीय सिनेमा में ऐसी कई अन्य फिल्में मौजूद हैं जो कमाई के आंकड़ों में भले ही इससे पीछे रह गई हों, लेकिन दर्शकों के दिलों और रेटिंग के मामले में दंगल से भी आगे निकल जाती हैं।
कोशिश (1972)
संजीव कुमार और जया बच्चन की मुख्य भूमिकाओं वाली फिल्म कोशिश एक दिव्यांग जोड़े की संघर्षपूर्ण जिंदगी को पर्दे पर उतारती है, जो समाज के बीच अपनी इज्जत और गरिमा के साथ जीने का अधिकार पाने के लिए लंबी लड़ाई लड़ते हैं। जाने-माने गीतकार गुलजार के निर्देशन में बनी यह फिल्म दर्शकों के दिलो-दिमाग को झकझोर कर रख देने की ताकत रखती है। साल 1972 में रिलीज हुई इस मार्मिक कहानी को आईएमडीबी पर 8.4 की ऊंची रेटिंग हासिल है।
3 ईडियट्स (2009)
साल 2009 में आई फिल्म थ्री ईडियट्स दर्शकों को हंसाने के साथ-साथ जीवन का एक गहरा संदेश भी दे जाती है। यह फिल्म आधुनिक जीवन की अंधी दौड़ और दबाव में फंसे युवाओं को ठहरकर अपनी शर्तों पर जिंदगी जीने के लिए प्रेरित करती है। राजकुमार हिरानी के निर्देशन में बनी इस लोकप्रिय फिल्म में आमिर खान, आर माधवन और करीना कपूर जैसे दिग्गज कलाकार नजर आए थे। दर्शकों के बीच बेहद पसंद की गई इस फिल्म को आईएमडीबी पर 8.4 की रेटिंग मिली है।
गाइड
देव आनंद और वहीदा रहमान की यह सदाबहार फिल्म रिलीज के 60 साल बीत जाने के बाद भी आज उतनी ही प्रासंगिक और दर्शकों के दिल के करीब है। फिल्म की कहानी में दिखाया गया है कि जब एक गांव के लोग एक पूर्व गाइड को गलती से साधु मान लेते हैं, तो वह उन्हें उनके इतिहास और सच्चाई से अवगत कराता है। वह उन ग्रामीणों को जीवन की सही राह दिखाने के लिए एक गहरे आध्यात्मिक सफर का मार्ग प्रशस्त करता है। इस क्लासिक फिल्म को आईएमडीबी पर 8.4 की रेटिंग दी गई है।
ब्लैक फ्राइडे
निर्देशक अनुराग कश्यप की फिल्म ब्लैक फ्राइडे साल 1993 के कुख्यात बॉम्बे बम ब्लास्ट केस को कई अलग-अलग लोगों के नजरिए से बेहद बारीकी से उठाती है। फिल्म की पूरी पटकथा पुलिस की जांच, इस खौफनाक साजिश को रचने वालों और इस त्रासदी के पीड़ितों के बयानों तथा अनुभवों पर आधारित है। केके मेनन और पवन मल्होत्रा जैसे सशक्त कलाकारों के अभिनय से सजी इस फिल्म को आईएमडीबी पर 8.4 की बेहतरीन रेटिंग प्राप्त है।
जय भीम
कोरोना महामारी के दौर में जब हिंदी सिनेमा पटरी पर लौटने के लिए संघर्ष कर रहा था, तब दक्षिण भारतीय सिनेमा से जय भीम के रूप में एक जबरदस्त बवंडर उठा था। इस फिल्म को दर्शकों का असीम स्नेह मिला और समीक्षकों ने भी इसकी मुक्तकंठ से प्रशंसा की। कहानी में दिखाया गया है कि जब पुलिस एक आदिवासी समुदाय के साधारण व्यक्ति को झूठे चोरी के मामले में गिरफ्तार कर लेती है, तो उसकी बेबस पत्नी न्याय पाने के लिए एक वकील का दरवाजा खटखटाती है। साउथ के सुपरस्टार सूर्या ने इसमें मुख्य भूमिका निभाई है। इस फिल्म को आईएमडीबी पर सबसे ज्यादा 8.6 की शानदार रेटिंग मिली है।
गोल माल (1979)
ऋषिकेश मुखर्जी के निर्देशन में बनी साल 1979 की यह कल्ट क्लासिक कॉमेडी फिल्म ऐसी है जिसे आप कितनी भी बार देख लें, कभी बोर नहीं होते। अमोल पालेकर, उत्पल दत्त और बिंदिया गोस्वामी जैसे बेहतरीन कलाकारों से सजी इस फिल्म को आईएमडीबी पर 8.5 की दमदार रेटिंग दी गई है। इसकी कहानी एक साधारण युवक के इर्द-गिर्द घूमती है जिसे नौकरी पाने के लिए एक झूठ का सहारा लेना पड़ता है, लेकिन उस एक झूठ को छिपाने के चक्कर में उसे आगे कई और झूठ बोलने पड़ते हैं जिससे हास्यास्पद स्थितियां पैदा होती हैं।
दो आंखें बारह हाथ (1957)
साल 1957 में रिलीज हुई फिल्म दो आंखें बारह हाथ को भारतीय सिनेमा में कल्ट का दर्जा हासिल है। इसकी लोकप्रियता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि आईएमडीबी ने इसे 8.4 की उच्च रेटिंग दी है। फिल्म की पटकथा एक युवा जेल वार्डन के इर्द-गिर्द बुनी गई है, जिसे जेल के छह खतरनाक और गुस्सैल हत्यारों को सुधारने की अनुमति मिलती है। वह उन्हें एक वीरान पड़े गांव के बंजर खेत पर ले जाता है, जहां उनके बीच एक अनोखा बदलाव शुरू होता है।


















