राजस्थान की राजनीति में स्थानीय निकायों का दंगल अब बेहद दिलचस्प मोड़ पर पहुंच गया है। इन चुनावों को केवल भजनलाल शर्मा सरकार की परीक्षा के रूप में नहीं देखा जा रहा है, बल्कि भारतीय जनता पार्टी ने इसे अपनी सांगठनिक प्रतिष्ठा से जोड़ लिया है। इसी सियासी सरगर्मी के बीच भाजपा के राष्ट्रीय संगठन महामंत्री बीएल संतोष ने शुक्रवार को राजधानी जयपुर का दौरा किया। उन्होंने प्रदेश भाजपा कार्यालय में एक उच्च स्तरीय चुनाव संचालन समिति की बैठक की अध्यक्षता की, जहां चुनावी जमीन की मौजूदा स्थिति और आगामी रणनीति पर लंबी चर्चा हुई।
बैठक में पार्टी के कई दिग्गज नेता मौजूद रहे। इनमें प्रदेशाध्यक्ष मदन राठौड़, संगठन महामंत्री अजेय कुमार और निकाय चुनाव प्रभारी सह राष्ट्रीय महामंत्री हरीश द्विवेदी प्रमुख रूप से शामिल थे। इनके अलावा चुनाव संचालन समिति के अन्य सदस्यों ने भी इस मंथन में हिस्सा लिया, जिनमें राजेंद्र राठौड़, अशोक परनामी, राजेंद्र गहलोत, अरुण चतुर्वेदी, प्रभुलाल सैनी और लालचंद कटारिया के नाम शामिल हैं।
बीएल संतोष ने बैठक के दौरान संभागवार चुनावी तैयारियों का जायजा लिया। उन्होंने विशेष रूप से यह जानकारी जुटाई कि विभिन्न संभागों से कुल कितने नामांकन दाखिल किए गए और उनमें से कितने कागजात खारिज हुए। इसके साथ ही मैदानी हकीकत और पार्टी की आगामी दिशा पर भी विस्तार से विचार-विमर्श हुआ। इस दौरान उन्होंने पार्टी नेताओं को स्पष्ट निर्देश दिए कि हर हाल में अपने अधिकृत उम्मीदवार के साथ अंत तक डटे रहना होगा। उन्होंने कहा कि प्रत्याशी की स्थिति कैसी भी क्यों न हो, चुनाव के अंतिम क्षण तक उसका पूरा साथ दिया जाना चाहिए। इसके अलावा, बैठक में सांसदों की चुनावी सक्रियता का विषय भी प्रमुखता से उठाया गया। नेताओं को हिदायत दी गई कि वे पूरी ऊर्जा से पार्टी के लिए काम करें और अपने मूल निर्वाचन क्षेत्रों के साथ-साथ प्रभाव वाले अन्य क्षेत्रों में भी प्रचार व संगठन कार्यों में सक्रिय भूमिका निभाएं।
बैठक के बाद पत्रकारों से बातचीत करते हुए प्रभुलाल सैनी ने स्पष्ट किया कि पार्टी इन स्थानीय चुनावों को किसी भी अन्य बड़े चुनाव की तरह ही राष्ट्रीय स्तर पर देख रही है। उन्होंने कहा कि पार्टी का मुख्य उद्देश्य राज्य में ट्रिपल इंजन की सरकार का खाका उतारना है और उसी के अनुसार रूपरेखा बनाई जा रही है। जब उनसे कांग्रेस द्वारा अपने राष्ट्रीय स्तर के नेताओं को मैदान में उतारने की संभावना पर सवाल किया गया, तो उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि कांग्रेस के पास अब कोई बड़ा नेता बचा ही नहीं है, इसलिए वे किसे बुलाएंगे।
राज्य वित्त आयोग के प्रमुख डॉ. अरुण चतुर्वेदी ने भी इस बात पर जोर दिया कि पार्टी के लिए हर चुनाव समान रूप से महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि चाहे पार्षद पद का चुनाव हो या फिर विधानसभा, लोकसभा और राज्यसभा का, हर मुकाबला पार्टी गंभीरता से लड़ती है। चतुर्वेदी के अनुसार, निकाय चुनाव सीधे तौर पर बूथ स्तर और जमीनी कार्यकर्ताओं से जुड़े होते हैं, इसलिए इनका महत्व और भी बढ़ जाता है। उनके इस बयान से साफ जाहिर होता है कि पार्टी इन चुनावों को केवल स्थानीय स्तर की छोटी लड़ाई नहीं मान रही है।
मुख्यालय में चल रही बैठकों के इस सिलसिले के बीच राजेंद्र राठौड़ ने भी विश्वास जताया कि पार्टी इन चुनावों में अभूतपूर्व सफलता हासिल करेगी। उन्होंने कहा कि भाजपा उन तमाम संकल्पों को पूरा करेगी जिनके वादे जनता से किए गए थे। कांग्रेस नेताओं के प्रचार में उतरने के सवाल पर उन्होंने कटाक्ष करते हुए कहा कि भाजपा के राष्ट्रीय नेता जमीन पर एक आम कार्यकर्ता की तरह मेहनत करते हैं। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि कांग्रेस नेताओं के लिए यह चुनाव शायद मामूली हो सकता है, लेकिन भाजपा के लिए ऐसा नहीं है। उन्होंने राहुल गांधी पर निशाना साधते हुए कहा कि वे और उनके दल के नेता महलों में रहने वाले लोग हैं और चुनाव के वक्त उनकी पार्टी को उनकी तलाश करनी पड़ती है, और हो सकता है कि वे इस समय विदेश यात्रा पर हों।
नामांकन प्रक्रिया समाप्त होने के बाद अब चुनावी मैदान में उतरने वाले प्रत्याशियों की तस्वीर पूरी तरह साफ हो चुकी है। ऐसे में भाजपा का पूरा फोकस अब संगठन को जमीनी स्तर पर धार देने, अपने उम्मीदवारों की पूरी ताकत से पीठ थपथपाने और प्रमुख नेताओं के दौरों को बढ़ाने पर है। बीएल संतोष की इस मैराथन बैठक और फीडबैक लेने के तरीके से यह संकेत साफ मिल रहे हैं कि पार्टी इस चुनाव को लेकर किसी भी तरह की ढिलाई बरतने के मूड में नहीं है।


















